अलग-अलग नाम से दो बार दी थी मैट्रिक की परीक्षा, 21 साल बाद खुली पोल… सुपौल के CO प्रिंस राज बर्खास्त!

अलग-अलग नाम से दो बार दी थी मैट्रिक की परीक्षा, 21 साल बाद खुली पोल… सुपौल के CO प्रिंस राज बर्खास्त

बिहार सरकार ने जालसाजी कर सरकारी सेवा में आए सुपौल सदर के अंचल अधिकारी (CO) प्रिंस राज को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है. शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, प्रिंस राज (मूल निवासी मधुबनी) ने बीपीएससी की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से नौकरी पाई थी.

जांच में पाया गया कि उन्होंने उम्र और योग्यता साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया था. उन्होंने 2004 में धर्मेंद्र कुमार के नाम से हाई स्कूल खीरहर, मधुबनी से मैट्रिक की परीक्षा पास की. इसके बाद उन्होंने प्रिंस राज नाम से 2006 में एसटीएसवाई हाईस्कूल मनमोहन, मधुबनी से दोबारा मैट्रिक का सर्टिफिकेट बनवाया.

विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जब 2025 में इस मामले की गहराई से जांच की, तो पता चला कि एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग पहचान के साथ दो बार परीक्षा दी थी. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने 1 अगस्त 2025 को उनके 2006 के फर्जी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया था.

सरकार की सख्त चेतावनी

डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े के दम पर नौकरी पाने वालों के लिए व्यवस्था में कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा- फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी लेने वाले सभी संदिग्ध मामलों की जांच तेज कर दी गई है. जो अधिकारी ईमानदारी से काम करेंगे उन्हें पदोन्नति मिलेगी, लेकिन गलत करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

बीपीएससी से मशवरे के बाद बड़ी कार्रवाई

सर्टिफिकेट रद्द होने के बाद राजस्व विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से राय मांगी थी. आयोग की हरी झंडी मिलने के बाद विभाग ने कड़ी विभागीय कार्रवाई करते हुए प्रिंस राज को सेवा से मुक्त कर दिया.

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