उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर दौरे के दौरान पारंपरिक भगवा वेशभूषा में वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान दर्ज कराई. निवेश बैठकों के साथ-साथ उनके सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों से जुड़े संदेश भी चर्चा में रहे. दो दिवसीय यात्रा में निवेश समझौतों, ‘सनातनी अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा और वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य पर खास जोर दिया गया.

काले रंग की मर्सिडीज़ कार जब सिंगापुर की सड़कों पर उतरी और उसमें से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पारंपरिक भगवा वस्त्रों में बाहर आए, तो वहां मौजूद कारोबारी जगत और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई. आमतौर पर विदेशी निवेश यात्राओं में नेता सूट-बूट में दिखते हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ ने यहां भी अपनी पहचान और विचारधारा को पहले रखा. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। लोगों को उम्मीद थी कि बिज़नेस मीटिंग्स में वे औपचारिक पश्चिमी पोशाक में नज़र आएंगे, मगर उन्होंने अपनी सांस्कृतिक छवि के साथ ही वैश्विक मंच पर कदम रखा.
23 और 24 फरवरी को सिंगापुर में हुए कार्यक्रमों में उनका यही अंदाज़ चर्चा का केंद्र बना रहा. कुछ भारतीय युवाओं ने उनके स्वागत में डमरू बजाते हुए नारे लगाए – “आ रहे हैं भगवाधारी.” यह दृश्य सिर्फ स्वागत का नहीं था, बल्कि उस राजनीतिक-सांस्कृतिक मॉडल का प्रतीक था जिसे वे विदेश में भी प्रस्तुत करना चाहते थे.
सिंगापुर में मिला नया नारा, नया रिश्ता
सिंगापुर में निवेश और समझौतों की औपचारिक बातचीत के बीच भावनात्मक क्षण भी सामने आए. भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में मंच पर मौजूद स्वाति लाहोटी नाम की महिला ने मुख्यमंत्री को अपना भाई बताया. उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जिस तरह के कदम उठाए गए हैं, उससे उनमें भरोसा जगा है.
उन्होंने मंच से यह भी कहा कि अपराधियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई जारी रहनी चाहिए. यह संकेत सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश में चर्चित ‘बुलडोज़र एक्शन’ की ओर था. योगी आदित्यनाथ कई मंचों से यह बात दोहराते रहे हैं कि अपराधियों के लिए राज्य में अब कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है.
कार्यक्रम में संस्कृत और हिंदी के मिश्रित प्रयोग ने माहौल को और अलग बना दिया. जब योगी ने “हर हर” कहा, तो सामने बैठे लोगों ने “महादेव” का उद्घोष किया. इसके बाद “जय श्रीराम” के नारे के साथ उनका संबोधन समाप्त हुआ. इस पूरी प्रक्रिया ने राजनीतिक भाषण को धार्मिक-सांस्कृतिक रंग दे दिया.
अयोध्या से काशी तक ‘सनातनी अर्थव्यवस्था’ की मिसाल
सिंगापुर में व्यापारिक नेताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने ‘सनातनी अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा रखी. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद वहां का आर्थिक नक्शा बदल गया है. होटल, परिवहन, छोटे व्यापार और पर्यटन – हर क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं.
इसी तरह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने वाराणसी और आसपास के जिलों की अर्थव्यवस्था को गति दी है. मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण और राधारानी से जुड़ी आस्था अब वैश्विक आकर्षण बन रही है. दुनिया भर से लोग न सिर्फ दर्शन के लिए आ रहे हैं, बल्कि अध्यात्म और संस्कृति को समझने के लिए भी भारत की ओर देख रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ ने भेदभाव और जातिगत राजनीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने प्रयागराज के महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि जब करोड़ों लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ स्नान करते हैं, तो यह साबित करता है कि आस्था सबको जोड़ती है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर भेदभाव मानवता के खिलाफ अपराध है.
वन ट्रिलियन इकॉनमी का लक्ष्य
दो दिन की सिंगापुर यात्रा में तकनीकी क्षेत्र की कई प्रमुख कंपनियों से समझौते हुए. पहले ही दिन लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी. इनमें यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप के साथ 6,650 करोड़ रुपये का करार भी शामिल है, जिसके तहत नोएडा में टाउनशिप और डेटा सेंटर बनाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ बनाना है. उनका दावा है कि राज्य की आर्थिक रफ्तार बीते वर्षों में तीन गुना हो चुकी है. निवेश, औद्योगिक विकास और प्रति व्यक्ति आय – हर स्तर पर बढ़ोतरी को उन्होंने अपनी नीति का परिणाम बताया.
सिंगापुर से नोएडा तक डेटा सेंटर की कड़ी
सिंगापुर में योगी आदित्यनाथ की मुलाकात लॉरेंस वोंग, राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और निवेश जगत की दिग्गज संस्थाओं से हुई. बैठकों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के आसपास बड़े टेक्निकल पार्क विकसित करने की योजना रखी गई. डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, रिन्यूएबल एनर्जी और स्किल डेवलपमेंट – इन चार क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर दिया गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि तकनीकी और औद्योगिक निवेश का भी बड़ा हब बन रहा है.
जापान में ‘स्पिरिचुअल टूरिज़्म मॉडल’ की प्रस्तुति
सिंगापुर के बाद मुख्यमंत्री जापान रवाना हुए. वहां उन्होंने विदेशी निवेशकों को ‘स्पिरिचुअल टूरिज़्म मॉडल’ समझाया. उनका तर्क था कि उत्तर प्रदेश में आस्था और उद्योग एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि जब अध्यात्म के साथ आर्थिक विकास जुड़ता है, तो उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचता है. जापान में ओसाका, क्योटो और यामानाशी जैसे शहरों में बैठकों का सिलसिला तय किया गया, जहां निवेश और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई.
सुपर स्पीड ट्रेन से भविष्य की झलक
जापान दौरे का एक अहम आकर्षण दुनिया की सबसे तेज़ मैग्लेव ट्रेन का सफर रहा, जिसकी गति लगभग 600 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है. इस सफर के ज़रिये योगी आदित्यनाथ ने जापान के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को करीब से समझा. जापान की आठ प्रमुख कंपनियों के साथ ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों पर बातचीत हुई. उत्तर प्रदेश सरकार इन क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए खुद को तैयार बता रही है.
‘योगी मॉडल’ की ग्लोबल ब्रांडिंग
इस पूरे दौरे में मुख्यमंत्री के साथ 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम मौजूद रही. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल ‘नंदी’ भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे. कुल मिलाकर 33 वैश्विक कंपनियों से बातचीत और समझौते हुए – जिनमें 25 सिंगापुर और 8 जापान की कंपनियां थीं.
हर मीटिंग, हर कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का पारंपरिक भगवा वेश चर्चा का विषय बना रहा. तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचे. यह सिर्फ निवेश यात्रा नहीं रही, बल्कि एक तरह की ‘ब्रांडिंग एक्सरसाइज़’ बन गई – जहां उत्तर प्रदेश को एक नई पहचान देने की कोशिश हुई.
आस्था, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि
योगी आदित्यनाथ के लिए सिंगापुर और जापान का यह दौरा केवल निवेश जुटाने का प्रयास नहीं था, बल्कि ‘योगी मॉडल’ को वैश्विक मंच पर पेश करने का अवसर भी था. उन्होंने दिखाने की कोशिश की कि उत्तर प्रदेश में धर्म और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साझेदार हैं. एक तरफ अयोध्या, काशी और मथुरा की आस्था से जुड़ी अर्थव्यवस्था, दूसरी तरफ डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और ग्रीन एनर्जी – इन दोनों ध्रुवों को जोड़कर उन्होंने उत्तर प्रदेश की नई कहानी लिखने की कोशिश की.
अब असली परीक्षा इस बात की है कि सिंगापुर और जापान में हुए समझौते ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरते हैं. अगर ये योजनाएं सफल होती हैं, तो उत्तर प्रदेश की पहचान सिर्फ एक बड़े राज्य के रूप में नहीं, बल्कि ‘आस्था और उद्योग के संगम’ वाले मॉडल के रूप में बन सकती है. यही वह बिंदु है, जहां से ‘योगी मॉडल’ की वैश्विक गूंज को वास्तविक अर्थ मिल सकता है.





