
नई दिल्ली: ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका का सैन्य संघर्ष जारी है। ईरान को को इस महायुद्ध में बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। उनके सुप्रीम लीडर खामेनेई का खात्मा हो चुका है। वहीं इस जंग पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। भारत भी लगातार इन हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात को सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की। इसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। यह बैठक अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद मौजूदा वैश्विक स्थिति और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का जायजा लेने के लिए बुलाई गई थी।
सीसीएस की बैठक में इन मुद्दों पर बात
पश्चिमी एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक रविवार शाम हुई।
इसमें समिति को 28 फरवरी को ईरान पर हुए हवाई हमलों और उसके बाद खाड़ी देशों में हुए अटैक सहित बढ़ते तनाव के बारे में जानकारी दी गई।
समिति ने क्षेत्र में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के बड़े समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।
सीसीएस ने क्षेत्र से होकर गुजरने वाले भारतीय यात्रियों और निर्धारित परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों को हो रही कठिनाइयों पर चर्चा हुई।
इसके साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक और वाणिज्यिक गतिविधियों पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों की भी समीक्षा की गई।
CCS बैठक में ये अहम फैसले
सीसीएस ने सभी संबंधित विभागों को इन घटनाक्रमों से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक और जरूरी उपाय करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही क्षेत्र में जारी संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और संवाद के साथ कूटनीति की ओर लौटने के महत्व पर जोर दिया गया। सीसीएस देश के सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है। प्रधानमंत्री मोदी ने सीसीएस की बैठक की अध्यक्षता की।
राज्यों के दौरे से लौटकर पीएम मोदी ने की बैठक
पीएम मोदी के राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुडुचेरी का दो दिवसीय दौरे के बाद रात लगभग साढ़े नौ बजे राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के तुरंत बाद सीसीएस की बैठक आयोजित की गई। सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत समिति के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक में अजीत डोभाल समेत ये अफसर रहे मौजूद
बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत पर इसके प्रभावों के बारे में जानकारी दी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और शक्तिकांत दास, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी बैठक में उपस्थित थे।
पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा
बैठक में पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, साथ ही फंसे हुए लोगों की सुरक्षा और स्थिति बिगड़ने पर उससे निपटने के तरीकों पर चर्चा हुई। फिलहाल, पश्चिम एशिया का हवाई क्षेत्र लगभग बंद है। पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाएं बाधित हो गई हैं, जिससे सैकड़ों भारतीय दुबई और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। इनमें से कई लोग सोशल मीडिया पर भारतीय सरकार से सहायता की अपील कर रहे हैं।
इजरायल-अमेरिका और ईरान जंग पर निगाहें
सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरानी अधिकारियों की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से उत्पन्न स्थिति का भी जायजा लिया गया, जो भारतीय तेल वाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख मार्ग है। ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक जबकि इजराइल में 40,000 से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग 90 लाख है। भारत ने अतीत में संघर्षों के बीच पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों भारतीयों को सफलतापूर्वक निकाला है।
MEA के खास निर्देश, लोगों से खास अपील
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में भारतीय दूतावास अपने नागरिकों के साथ लगातार संपर्क में हैं और हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इजराइल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई मारे गए। ये ऐलान अमेरिका और इजराइल की शनिवार से शुरू हुई संयुक्त हवाई बमबारी के बाद की गईं, जिसमें ईरान के सैन्य और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का सबसे बड़ा मौका मिला है। ट्रंप ने कहा कि भारी और सटीक बमबारी सप्ताह भर या जितने समय तक जरूरी होगी, जारी रहेगी।




