UP Rape News : यूपी से ऐसी खबर सामने आई है, जिसने रिश्तों और मानवता को झकझोर कर रख दिया है। बस्ती जिले में दो नाबालिग बच्चियां मां बनी हैं। इनमें से एक की उम्र महज 13 साल और दूसरी की 14 साल है।

Basti Crime News : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली दो ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने समाज के नैतिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां दो ऐसी बच्चियों ने शिशुओं को जन्म दिया है, जिनकी अपनी उम्र अभी गुड़ियों से खेलने की थी। महज 13 और 14 साल की इन मासूमों के साथ दरिंदगी करने वाले कोई और नहीं, बल्कि उनके अपने और जान-पहचान के लोग ही थे।
पहली विचलित कर देने वाली घटना गोंडा जनपद के खोड़ारे क्षेत्र की है। यहां एक 14 वर्षीय किशोरी को उसके ही 16 साल के सगे चचेरे भाई ने अपनी हवस का शिकार बनाया। रक्षक ही जब भक्षक बन गया, तो मासूम की चीखें घर की दीवारों में ही दबकर रह गईं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस मामले का सबसे वीभत्स पहलू तब सामने आया जब बच्ची के गर्भवती होने पर आरोपी के परिजनों ने न्याय देने के बजाय उसकी अस्मत की कीमत महज 20 रुपये लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की।
बस्ती मेडिकल कॉलेज में कराई गई डिलीवरी
दूसरी घटना बस्ती के नगर थाना क्षेत्र की है, जहां एक 13 साल की बच्ची को गांव के ही एक किशोर ने खेत में ले जाकर डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। जब 6 महीने बाद गर्भ का पता चला तो आरोपी पक्ष ने जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल, दोनों पीड़ित बच्चियों की डिलीवरी बस्ती मेडिकल कॉलेज में कराई गई है और पुलिस ने दोनों मामलों में पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेज दिया है।
देशभर में बढ़ती बाल-क्रूरता की पदचाप
यह केवल बस्ती या गोंडा की कहानी नहीं है। हाल में राजस्थान के अलवर और मध्य प्रदेश के उज्जैन से भी ऐसी ही डरावनी खबरें आईं, जहां नाबालिगों के साथ उनके करीबियों ने ही विश्वासघात किया। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में 90% से अधिक मामलों में अपराधी कोई परिचित या रिश्तेदार ही होता है। यह स्थिति समाज में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक रेड अलर्ट की तरह है।
गुड टच-बैड टच के प्रति शिक्षित करना जरूरी
इन घटनाओं ने साबित कर दिया है कि कानून के डर से ज्यादा जरूरी सामाजिक जागरूकता और बच्चों को गुड टच-बैड टच के प्रति शिक्षित करना है। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई तो की है, लेकिन उन मासूम जिंदगियों का क्या, जिनका बचपन इन अंधेरी गलियों में खो गया है?




