
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते होने वाली गैस सप्लाई ठप होने के बाद सरकार ने ये कदम उठाया है।
गैस किल्लत को देखते हुए दिल्ली मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस रोक की वजह से रेस्टोरेंट्स और होटलों के बंद होने की नौबत आ गई है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। छोटे होटल और भोजनालय चलाने वालों ने सरकार से कहा है कि सप्लाई बहाल की जाए।
ESMA कानून क्या है
आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) ऐसा कानून है, जिसने 1968 में भारत की संसद ने पारित किया था। ESMA भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में सूची संख्या 33 के तहत एक कानून है। इसका मकसद जरूरी सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
ESMA कानून के दायरे में कौन-कौन सी सेवाएं हैं
ESMA कानून के दायरे में सार्वजनिक परिवहन जैसे बस सेवाएं, डॉक्टर-नर्स और अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। एस्मा लागू नहीं होने पर आम आदमी का जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है।
यह पूरे देश में आवश्यक सेवाओं की न्यूनतम शर्तें प्रदान करके राष्ट्रीय एकरूपता बनाए रखता है। सार्वजनिक संरक्षण, स्वच्छता, जल आपूर्ति या राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित सेवाएं भी आवश्यक हैं।
पेट्रोलियम, कोयला, बिजली, इस्पात या उर्वरक के उत्पादन, वितरण या आपूर्ति में शामिल कोई भी प्रतिष्ठान आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आता है।
इसके अलावा, बैंकिंग से संबंधित कोई भी सेवा ESMA के दायरे में आ सकती है।
यह कानून संचार और परिवहन सेवाओं और खाद्यान्नों की खरीद और वितरण से संबंधित किसी भी सरकारी पहल पर भी लागू होता है।
क्या राज्य सरकारें भी एस्मा लागू कर सकती हैं
विशिष्ट क्षेत्रों में किसी भी उल्लंघन के लिए राज्य सरकारें अकेले या अन्य राज्य सरकारों के साथ मिलकर अपने-अपने अधिनियम को लागू कर सकती हैं।
हर राज्य का अपना अलग राज्य आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम है , जिसके प्रावधानों में केंद्रीय कानून से कुछ मामूली अंतर हैं। ऐसे में अगर हड़ताल की प्रकृति केवल एक या अधिक राज्यों को बाधित करती है, तो राज्य इसका सहारा ले सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर व्यवधान की स्थिति में विशेष रूप से रेलवे में केंद्र सरकार ESMA 1968 का सहारा ले सकती है।
कमोडिटी एक्ट लागू होने के बाद 4 कैटेगरी में गैस बंटेगी
पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): इसमें आपके घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी।
चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।
क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट?
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 का एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल कर सके। इसे आसान भाषा में ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कह सकते हैं।
ब कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते।
इन राज्यों में सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर
उत्तर प्रदेश: कॉमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पर अघोषित रोक से होटल-रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कंपनियों ने एजेंसियों को पूरा फोकस सिर्फ घरेलू गैस पर रखने को कहा है, लेकिन इसके बावजूद आम लोगों में घबराहट का माहौल है। लखनऊ, कानपुर और वाराणसी जैसे शहरों में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी डिलीवरी नहीं हो पा रही है।



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