ईरान से भारत की कैसी डील, क्यों तेहरान ने होर्मुज से जाने दिए भारतीय टैंकर, ब्रह्मा चेलानी ने बताई अंदर की बात!


Brahma Chellaney Analysis: पश्चिम एशिया की स्थिति भयानक बनी हुई है. ईरानी द्वीप खर्ग पर अमेरिकी के अब तक सबसे बड़े हमले ने जंग का रुख बदल दिया है. इस द्वीप पर हमले के कारण सीधे तौर पर चीन के हितों पर चोट हुआ है. इस बीच ईरान के साथ भारत के कूटनीतिक संबंधों में काफी सुधार हुआ है.

दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर बातचीत हुई है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के दो टैंकरों को जाने दिया है. ये दोनों टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर भारत पहुंच गए हैं. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान कब्जा करके बैठा है वहां से उसने भारतीय टैंकरों को जाने की अनुमति क्यों दी.

ईरान के साथ डील
इसके पीछे की कहानी सामरिक मामलों के जाने माने विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी बताते हैं. उन्होंने एक्स और फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा है कि भारत और ईरान के बीच एक डील हुई है. इस डील के तहत ही दो तेल टैंकर शिवालिक और नंदा देवी भारत पहुंचे हैं. हालांकि इंडियन एक्सप्रेस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अभी भी भारत के 22 टैंकर फंसे हुए हैं.

ब्रह्मा चेलानी के मुताबिक नई दिल्ली और तेहरान के बीच एक डील हुई है. इस डील के मुताबिक भारत ने ईरानी नौसेना के करीब 180 नाविकों को घर लौटने की अनुमति दी है. इसके बदले तेहरान ने भारत से आने वाले दो टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी. यह डील गुरुवार-शुक्रवार को अंजाम तक पहुंची थी.

इसके तहत कोच्चि में उतरी एक चार्टर फ्लाइट ईरानी नाविकों को लेकर तेहरान रवाना हुई. ये नाविक आईआरआईएस लवान नामक ईरानी नौसैनिक जहाज के थे. अमेरिकी हमले के बाद यह जहाज कोच्चि में डॉक हुआ था. ये पूरा मामला आईआरआईएस डेना की घटना से जुड़ा है. चार मार्च को अमेरिकी सबमरीन यूएसएस चार्लोटी ने हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को डुबो दिया था.

श्रीलंका ने नाविको को नहीं भेजा, क्यों?

हालांकि यह घटना भारतीय जल क्षेत्र से बाहर हुई थी. इस घटना में ईरान के 87 नाविक मारे गए. 61 अब भी लापता हैं और 32 को बचा लिया गया था. डेना श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में था. यह जहाज भारत में आयोजित एक नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस जहाज के नाविकों के शव श्रीलंका के पास थे. उसने इसे ईरान को सौंप दिया है. लेकिन उसने इसके 208 अन्य क्रू मेंबर्स और 32 बचाए गए नाविकों यानी जीवित बचे लोगों को ईरान नहीं भेजा है. दूसरी तरफ भारत ने ईरानी आईआरआईएस लवान को मानवीय आधार पर शेलटर दिया और उसके क्रू को वापस ईरान भेज दिया गया है.

ब्रह्मा चेलानी का दावा है कि यह एक तरह का क्विड प्रो क्वो था. भारत ने ईरानी नाविकों की मदद की, बदले में तेहरान ने भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित पैसेज दिया. भारत का करीब 40 फीसदी क्रूड ऑयल होर्मुज के रास्ते आता है. भारत की बड़ी मात्रा में एलपीजी की सप्लाई कतर से आती है. यह भी होर्मुज से होकर गुजरता है. रिपोर्ट के मुताबिक शिवालिक और नंदा देवी ने 92 हजार टन से अधिक एलपीजी के साथ होर्मुज पार किए हैं.

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