एक तीर से दो न‍िशाने… ईरानी तेल से कैसे तेहरान को द‍िवाल‍िया बना रहे ट्रंप, चीन का भी कर द‍िया ‘इंतजाम’!


How US will bankrupt Iran: इजरायल और ईरान जंग के बीच दुन‍ियाभर में क्रूड ऑयल की क‍िल्‍लत बनी हुई है. इसका असर यह हुआ क‍ि क्रूड के दाम 120 डॉलर प्रत‍ि बैरल तक पहुंच गए हैं. इस बीच जंग के 21वें द‍िन अमेर‍िका की तरफ से चौंकाने वाला कदम उठाया गया है. अमेर‍िकी सरकार ने अगले 30 द‍िन के ल‍िए ईरान के उन तेल के जहाजों पर लगी पाबंद‍ियां हटा दी हैं, जो युद्ध शुरू होने के बाद से समुद्र में फंसे हुए हैं. ट्रंप के इस कदम का मकसद ग्‍लोबल ऑयल मार्केट में तेल की कीमत को नीचे लाना है, साथ ही ईरान को उस तेल से होने वाली कमाई से दूरी रखना है.

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इसे ‘ईरानी बैरल्स को तेहरान के खिलाफ इस्तेमाल करने’ की स्‍ट्रैटजी बताया है. दोनों देशों में जंग के 20वें दिन ट्रंप प्रशासन ने 30 दिन के ल‍िए पाबंदी में छूट देने का फैसला क‍िया है. इस छूट के बाद करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल बाजार में आ जाएगा. एक अनुमान के यह दुन‍ियाभर की जरूरत का करीब 15 द‍िन का तेल है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यह वही तेल है जो युद्ध शुरू होने से पहले जहाजों पर लोड क‍िया गया था और अब समुद्र में फंसा हुआ है.

अमेरिका ने दुन‍िया के ल‍िए अनलॉक क‍िया क्रूड
बेसेंट की तरफ से एक्‍स पर शेयर क‍िये गए बयान में कहा गया क‍ि अमेरिका इस तेल को दुनिया के लिए अनलॉक कर रहा है. इससे सप्‍लाई के दवाब को कम क‍िया जा सकेगा. इस छूट के बाद ईरान का तेल को ग्‍लोबल मार्केट में सप्‍लाई हो जाएगा, लेक‍िन इससे ईरान को एक भी पैसा नहीं मिलेगा और इसे बैंक अकाउंट में फ्रीज कर द‍िया जाएगा. आपको बता दें 28 फरवरी को जंग शुरू होने के बाद ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में आवागमन सबसे ज्‍यादा प्रभाव‍ित हुआ है. ये वही समुद्री रास्‍ता है, जहां से दुनियाभर का 20% तेल गुजरता है.

119 डॉलर प्रत‍ि बैरल तक पहुंचे रेट
तेल की सप्‍लाई बाध‍ित होने का असर यह हुआ क‍ि ब्रेंट क्रूड के दाम 119 डॉलर प्रत‍ि बैरल तक पहुंच गए. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) की तरफ से इसे ग्‍लोबल ऑयल मार्केट का सबसे बड़ा डिसरप्शन कहा जा रहा है. अमेरिका की तरफ से अब यह कदम ईरान को कमजोर करने के मकसद से उठाया गया है. ट्रंप प्रशासन की तरफ से अब तक 440 मिलियन बैरल एक्‍स्‍ट्रा तेल बाजार में लाया जा चुका है, इसमें घरेलू रिजर्व भी शामिल है.

चीन का भी हो गया ‘इंतजाम’
बेसेंट की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया क‍ि चीन ईरान-इजरायल युद्ध के दौरान ईरानी तेल को बहुत सस्ते में जमा (hoard) कर रहा है. अब इस छूट से बाजार में तेल की बाढ़ आएगी, जिससे चीन का ‘डिस्काउंट’ खत्म हो जाएगा. तेल की ब‍िक्री से जुड़ी यह छूट केवल ट्रांजिट में मौजूद तेल पर ही लागू होगी. नए प्रोडक्‍शन या खरीद पर इसकी इजाजत नहीं है.

ईरान को दिवालिया बनाने की साजिश
बेसेंट ने ईरान को ग्लोबल टेररिज्म का अगुआ बताया और कहा क‍ि अमेरिका इस स्‍ट्रैटजी से ईरान को द‍िवाल‍िया बनाएगा. इस स्‍ट्रैटजी के तहत ईरान का तेल तो ब‍िकेगा लेक‍िन रेवेन्यू नहीं मिलेगा. इससे तेहरान के तेल के भंडार तो खत्‍म होंगे लेक‍िन जंग में हि‍स्‍सा लेने के ल‍िए उसे विदेशी मुद्रा नहीं मिलेगी. अमेरिका मैक्सिमम प्रेशर जारी रखते हुए ईरान को इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम से काटेगा.

ईरान बोला-हमारे पास सरप्‍लस तेल नहीं
अमेर‍िका की तरफ से उठाए गए इस कदम पर ईरान की ऑयल मिनिस्ट्री के प्रवक्ता समन घोदूसी ने एक्स पर बयान जारी कर कहा क‍ि उनके पास अब कोई सरप्लस तेल नहीं है, ज‍िसे इंटरनेशनल मार्केट में बेचा जा सके. अमेरिका का यह बयान केवल खरीदारों को झूठी उम्मीद देने के लिए है. अब यह देखने वाली बात होगी क‍ि दुश्मन के तेल को बेचकर उसकी कमाई रोकना और दुनिया के एनर्जी प्राइस को कंट्रोल करने का कदम क‍ितना कारगर साब‍ित होता है?

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