
वॉशिंगटन। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 26वां दिन है। ईरान ने मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट ड्रोन अटैक किया, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई।
कुवैत की सेना ने जवाबी कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अगर कहीं धमाके की आवाज सुनाई दे रही है, तो वह दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की वजह से है। सेना ने लोगों से अपील की है कि वे सरकार के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। इससे पहले कुवैत के नेशनल गार्ड ने बताया कि उसने अपने इलाके में 5 ड्रोन मार गिराए हैं।
वहीं, इराक के एक उग्रवादी समूह इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने कहा है कि उसने पिछले 24 घंटे में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर हमले किए हैं। ग्रुप के मुताबिक, इन हमलों में ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों से कितना नुकसान हुआ, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
ईरान में हमलों का असर…
अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत, 18,551 घायल।
मरने वालों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग।
जंग में अब तक करीब 200 महिलाओं की मौत हुई।
28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई।
जंग में 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत।
इराक के एक होटल पर मंगलवार रात ड्रोन हमला हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक होटल की जिस मंजिल को निशाना बनाया गया वहां अमेरिकी कर्मचारी ठहरे हुए थे।
ईरानी ने मंगलवार को इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर मिसाइल हमला किया, जिससे कई कार के परखच्चे उड़ गए। ईरान ने मंगलवार को इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को टारगेट करके मिसाइल दागीं।
ईरान युद्ध की वजह से फिलीपींस में एनर्जी इमरजेंसी लागू
फिलीपींस ने देश में एनर्जी इमरजेंसी लागू कर दी है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा कि देश में बिजली और तेल की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा।
सरकार के मुताबिक, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इससे देश में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया है।
हालात को संभालने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। लोगों से बिजली और ईंधन बचाने की अपील की गई है, साथ ही फ्यूल सस्ता करने के लिए सब्सिडी दी जाएगी। सरकार ने यह भी कहा है कि जमाखोरी और ज्यादा कीमत वसूलने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
इसके अलावा, आम लोगों को राहत देने के लिए ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और बाइक टैक्सी चालकों को 5,000 पेसो की आर्थिक मदद दी जाएगी। किसानों, मछुआरों और अन्य कामगारों के लिए भी सहायता योजनाएं शुरू की गई हैं।
ईरान ने ट्रम्प के दावे को नकारा, कहा- कोई बातचीत नहीं हो रही
ईरान की सेना ने ट्रम्प के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहीम जोल्फाघरी ने कहा कि अमेरिका की बात सही नहीं है और कोई बातचीत नहीं हो रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपनी असफलता को समझौता मत कहिए। हालात तब तक ठीक नहीं होंगे, जब तक हमारी शर्तें पूरी नहीं होतीं।
ईरान का आरोप- अतंरराष्ट्रीय राजनीति में डबल स्टैंडर्ड
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘डबल स्टैंडर्ड’ यानी दोहरे रवैये का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश अलग-अलग संघर्षों में अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं। उनके मुताबिक, गाजा और यूक्रेन के मामलों में सख्त रुख अपनाया जाता है, लेकिन ईरान के खिलाफ इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई पर चुप्पी साध ली जाती है।
इस बीच, अराघची ने जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमायर के बयान की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जर्मनी के राष्ट्रपति ने ईरान के लोगों के खिलाफ हो रही कार्रवाई पर खुलकर बात की, जो एक सराहनीय कदम है।
वहीं, रूस ने भी बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने चेतावनी दी कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले खतरनाक हो सकते हैं और इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
किम जोंग बोले- परमाणु हथियार रखने का फैसला सही, ईरान जंग ने सच साबित किया
नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था।
किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया।
ट्रम्प बोले- जेडी बेंस और मार्को रुबियो ईरान से बात कर रहे
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और जल्द ही कोई समझौता हो सकता है। उन
्होंने बताया कि इस बातचीत को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अन्य अधिकारी आगे बढ़ा रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा कि ईरान भी अब समझौता करना चाहता है। उनका दावा है कि ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान हुआ है, इसलिए वह बातचीत के लिए तैयार है।
कुछ दिन पहले ट्रम्प ने कहा था कि वे सीजफायर नहीं चाहते, लेकिन अब उन्होंने रुख बदल लिया है।
उन्होंने कहा कि ईरान ठीक तरीके से बात कर रहा है, इसलिए अब बातचीत हो रही है। सबसे जरूरी बात यह है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए।
दावा- ट्रम्प ने ईरान को 15 सूत्री सीजफायर प्लान भेजा
राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को 15 पॉइंट का सीजफायर प्लान भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया है। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में मदद करेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका ईरान के आस-पास अपनी सेना भी बढ़ा रहा है। पहले से ही इस इलाके में करीब 50,000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं । साथ ही करीब 5,000 मरीन (समुद्री सैनिक) और कई जहाज भी तैनात किए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि ट्रम्प एक साथ दोनों रास्ते खुले रखना चाहते हैं अगर बात बनती है तो समझौता, नहीं तो कार्रवाई। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। हालांकि अभी तक इस 15 पॉइंट के सीजफायर प्लान के पूरे डिटेल्स सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
एक्सपर्ट बोले- ईरान और ज्यादा मजबूत हो सकता है
अमेरिका के डिफेंस एक्सपर्ट और व्हाइट हाउस के पूर्व सलाहकार रॉबर्ट पेप ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के चारों ओर जाल कसता जा रहा है। ट्रम्प ईरान के साथ बढ़ते तनाव में ऐसे हालात में फंस सकते हैं, जहां युद्ध धीरे-धीरे और बड़ा होता चला जाता है।
रॉबर्ट पेप ने भारतीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि शुरुआत में छोटे-छोटे हमले किए जाते हैं, लेकिन जब उनसे बड़ा टागरेट हासिल नहीं होता, तो हमले और बढ़ा दिए जाते हैं। इसी को ‘एस्केलेशन ट्रैप’ कहा जाता है, यानी ऐसा जाल जिसमें फंसकर युद्ध लगातार बढ़ता जाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युद्ध बढ़ा, होर्मुज स्ट्रेट पर असर पड़ सकता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। इससे तेल महंगा हो सकता है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।
पेप के मुताबिक, इस स्थिति में ईरान मजबूत हो सकता है और तेल पर ज्यादा कंट्रोल हासिल कर सकता है। हालात संभालने के लिए इजराइल की सैन्य कार्रवाई को कंट्रोल करना जरूरी है और यह फैसला ट्रम्प ही ले सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के मरीन सैनिक ईरान पहुंच जाते हैं, तो हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं। अभी ट्रम्प ने हमले कुछ दिनों के लिए कम किए हैं, लेकिन यह सिर्फ समय लेने का तरीका हो सकता है। पेप ने यह भी कहा कि जब तक अमेरिका अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाता, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि तनाव कम हो रहा है।
ट्रम्प बोले- अमेरिका ने युद्ध जीता, ईरान पूरी तरह कमजोर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को दावा किया है कि अमेरिका ने युद्ध जीत लिया है।
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमत हो गया है और अब समझौता करने के लिए तैयार है। अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर घूम रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा कि लगातार हमलों के बाद ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है और उसके पास डील करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और इसमें अमेरिका के टॉप अधिकारी भी शामिल हैं।
ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब बातचीत में समझदारी दिखा रहा है और जल्द समझौता हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे खासकर पावर प्लांट्स पर दोबारा हमला कर सकता है।




