भीषण हुई लडाईः इजराइल की 50 फाइटर जेटों से बमबारीः मारा गया मोजतबा खामेनेई!


ईरान की अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है. ट्रंप ने कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जिससे तेहरान में सत्ता को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर (मोजतबा खामेनेई) अब जीवित नहीं हैं और देश का नेतृत्व ढांचा लगभग ध्वस्त हो चुका है.

मियामी में आयोजित फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव समिट में बोलते हुए ट्रंप ने कहा, ‘उनका सुप्रीम लीडर अब सुप्रीम नहीं रहा, वह मर चुका है.’ उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के अन्य बड़े नेता भी मारे जा चुके हैं. ट्रंप के मुताबिक, नए उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है और संभव है कि वह या तो मारे गए हों या गंभीर रूप से घायल हों.

इजराइल की ईरान पर 50 फाइटर जेट से एयरस्ट्राइक:एटमी ठिकानों को निशाना बनाया

ईरान-इजराइल जंग के 28 दिन बाद अब हूती विद्रोही भी इसमें शामिल हो गए हैं। इजराइल ने ईरान के अंदर 50 फाइटर जेट्स से हमला किया। इजराइली सेना के मुताबिक शुक्रवार रात ईरान के तीन इलाकों में हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया।

सेना ने बताया कि ये हमले खुफिया जानकारी के आधार पर किए गए और कई घंटों तक चले। हमलों में अराक और यज्द जैसे अहम इलाके शामिल थे। जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें हथियार बनाने वाली सैन्य इंडस्ट्री और बैलिस्टिक के साथ एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल के पुर्जे बनाने वाली फैक्ट्री शामिल थी।

इसके अलावा अराक में मौजूद हेवी वॉटर प्लांट पर भी हमला किया गया, जिसे इजराइल ने परमाणु हथियारों के लिए प्लूटोनियम तैयार करने में अहम बताया है। वहीं यज्द में उस प्लांट को भी निशाना बनाया गया, जहां यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) के लिए जरूरी विस्फोटक सामग्री तैयार की जाती है।

वहीं, ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर शुक्रवार रात को 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागीं। इस हमले में कम से कम 15 सैनिक घायल हुए, जिनमें 5 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

शनिवार को ईरान ने मिडिल ईस्ट को बारूदी कर दिया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ईरान की सेना ने कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ड्रोन हमले किए. इसके बाद कुवैत नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बताया कि ईरान के इन हमलों के दौरान हवाई अड्डे की रडार प्रणाली बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है. ईरान की सेना यहीं नहीं रुकी. आज ही ईरानी सेना ने कहा कि उसने संयुक्त अरब अमीरात में स्थित यूक्रेनी ड्रोन-रोधी प्रणाली डिपो को निशाना बनाया है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना की सहायता के लिए किया जा रहा था. ईरान के केंद्रीय सैन्य अभियान कमान खातम अल-अनबिया ने सरकारी टीवी पर प्रसारित एक बयान में कहा, “दुबई में अमेरिकी कमांडरों और सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाए जाने के साथ ही… दुबई में स्थित यूक्रेनी ड्रोन-रोधी प्रणाली डिपो, जो अमेरिकी सेना की सहायता के लिए था, को भी निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया.” इससे पहले शनिवार को, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त अरब अमीरात की अचानक यात्रा के दौरान कहा कि दोनों देश रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हुए हैं.

इजरायल पर हमला
वहीं ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शनिवार तड़के इजरायल की ओर मिसाइल दागने का दावा किया, जो मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से उनका पहला हमला था. हालांकि, इजरायली सेना ने कहा कि उसने मिसाइल को रोक लिया. शुक्रवार को तेहरान के खिलाफ अपने अभियान को “तेज और विस्तारित” करने की धमकी देने के कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला किया.

दुबई पर हमला
ईरान ने शनिवार को दावा किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच उसने दुबई में अमेरिकी सेना के दो “छुपने के ठिकानों” पर हमला किया है. यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी ने दी. समाचार एजेंसी के अनुसार, हजरत खातम अल-अनबिया के केंद्रीय मुख्यालय के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद अमेरिकी सेना के जवान इन छुपने के ठिकानों में चले गए थे. प्रवक्ता ने दावा किया कि इन छुपने के ठिकानों में 500 से अधिक अमेरिकी सेना के जवान थे, जिनमें से लगभग 400 पहले ठिकाने में और 100 दूसरे ठिकाने में थे. फार्स न्यूज एजेंसी द्वारा प्रकाशित प्रवक्ता के दावों के अनुसार, आईआरजीसी ने इन स्थानों की पहचान की और सटीक मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे भारी नुकसान हुआ. प्रवक्ता ने आगे कहा, “ट्रंप और अमेरिकी सेना के कमांडरों को यह अच्छी तरह समझ आ गया होगा कि यह क्षेत्र अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रिस्तान बन जाएगा, और उनके पास वीर लोगों और इस्लाम के बहादुर योद्धाओं की दिव्य इच्छा के आगे आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.”

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