
Poland Gold Reserve: दुनियाभर के देशों की नजर सोने की खरीदारी पर टिकी हुई है. पिछले एक साल के दौरान गोल्ड ने जिस तेजी के साथ दाम में छलांग लगाई है, उससे अच्छे-अच्छे निवेश का रिटर्न पीछे छूट गया है. सोने के दाम में तेजी का आलम यह रहा कि साल की शुरुआत में जनवरी के महीने में यह चढ़कर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. इसके बाद जनवरी में खरीदारी में कुछ कमी देखी गई. लेकिन जब फरवरी में नरमी आई तो इसका फायदा उठाकर दुनियाभर के देशों के सेंट्रल बैंक ने जमकर खरीदारी की.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने दोबारा सोने की खरीदारी शुरू कर दी. जनवरी महीने में सोने की खरीदारी में गिरावट आने के बाद फरवरी में कुल 27 टन सोने की खरीदारी हुई. यह आंकड़ा, जनवरी 2026 के 6 टन के आंकड़े से बहुत बेहतर है. लगातार 23वें महीने सेंट्रल बैंक सोने के बड़े खरीदार रहे. इस दौरान तुर्किये और रूस ने गोल्ड रिजर्व से सोने की बिक्री की है.
पोलैंड ने खरीदा सबसे ज्यादा 20 टन सोना
फरवरी महीने में हुई 27 टन गोल्ड की खरीदारी में पोलैंड की भूमिका अहम रही. पोलैंड के सेंट्रल बैंक ने पुरवरी में सबसे ज्यादा 20 टन सोना खरीदा. फरवरी 2025 के बाद यह उसकी सबसे बड़ी मंथली खरीदारी है. पिछले साल फरवरी के महीने में पोलैंड ने 29 टन सोना खरीदा था. इसके साथ ही पोलैंड का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 570 टन पर पहुंच गया. यह उसके कुल फॉरेक्स रिजर्व का 31 प्रतिशत है. पोलैंड ने 700 टन सोने का गोल्ड रिजर्व रखने का टारगेट रखा हुआ है. सितंबर 2025 के आखिर तक आरबीआई (RBI) के पास 880 टन गोल्ड रिजर्व है.
केंद्रीय बैंक क्यों बढ़ा रहे खरीदारी?
इसके अलावा फरवरी में सोना खरीदने वालों की लिस्ट में उज्बेकिस्तान, चीन, मलेशिया और कंबोडिया भी रहे. तुर्कीये ने इस दौरान 8 टन और रूस ने अपने खजाने से 6 टन गोल्ड की बिक्री की. आपको बता दें दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोना अपने गोल्ड रिजर्व को मजबूत करने, ग्लोबल फाइनेंशियल रिस्क से बचाव गरने और अपनी होल्डिंग्स को डाइवर्सिफाई करने के मकसद से खरीद रहे हैं. जियो-पॉलिटिकल टेंशन, महंगाई का खतरा और डॉलर पर निर्भरता भी सोने की तरफ दूसरे देशों का फोकस बढ़ा रही हैं. पोलैंड और चीन लंबे समय से इन पॉलिसी पर फोकस कर रहे हैं.
2025 के मुकाबले पीछे है आंकड़ा
साल 2025 में केंद्रीय बैंकों की तरफ से हर महीने मंथली एवरेज गोल्ड की खरीदारी 26 टन की रही. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। 2026 की शुरुआत में यह रफ्तार धीमी रही लेकिन फरवरी में इसमें रिकवरी देखी गई. जानकारों का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षक बना हुआ है.
सोने की कीमत पर असर
अलग-अलग देशों के केंद्रीय बैंकों की तरफ से लगातार खरीदारी से सोने की कीमत में तेजी देखी जा रही है. फरवरी के बाद चीन ने मार्च के महीने में भी खरीदारी को जारी रखा गया. यही कारण है कि ग्लोबल लेवल पर सोने की मांग में मजबूती बनी हुई है. इस रिपोर्ट से यह साफ है कि ग्लोबल इकोनॉमी में उतार-चढ़ाव के लिए केंद्रीय बैंक सोने को अपनी स्ट्रेटजी का अहम हिस्सा मान रहे हैं.





