‘पहलगाम ना होता तो आज अमेरिका-ईरान इस्लामाबाद में ना बैठे होते’!


इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर अबू मूसा कश्मीरी ने इस्लामाबाद में हो रही ईरान-अमेरिका की बैठक पर प्रतिक्रिया दी है। मूसा ने कहा है कि आज इस्लामाबाद में हो रही बैठक से पाकिस्तान का रुतबा दुनियाभर में बढ़ गया है लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि इसकी बुनियाद कैसे पड़ी। अबू मूसा कश्मीरी ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक कामयाबी की तरह पेश करते हुए कहा कि इस घटना और इसके बाद भारत-पाकिस्तान की लड़ाई की वजह से ही आज इस्लामाबाद में इतनी बड़ी वार्ता हो रही है।

पाकिस्तान के यूएन की ओर से घोषित आतंकवादी घोषित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर अबू मूसा कश्मीरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता को लेकर आज पाकिस्तान की जो हैसियत है, वह पूरी तरह से भारत के कश्मीर में हुए पहलगाम आतंकी हमले की वजह से है।

पाकिस्तान से पहलगाम पर कबूलनामा
आतंकी मूसा ने दावा किया कि पहलगाम हमले की वजह से ही आज दुनियाभर में पाकिस्तान का कद बढ़ा है। इसी घटनाक्रम की बदौलत पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सुलह करा रहा है। इस बैठक के बाद पाकिस्तान का कद और बढ़ेगा और इजरायल को भी इस्लामाबाद आने पड़ेगा। इसके बाद भारत को भी ये करना होगा।

बीते साल अप्रैल में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की हत्या कर दी गई थी। भारत ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और इसके जवाब के तौर पर ऑपरेशन सिंदूर करते हुए पाकिस्तान में हमले किए थे। दूसरी ओर पाकिस्तान ने हमलों में हाथ होने से इनकार किया है। ऐसे में मूसा का वीडियो पहलगाम हमले पर उसके कबूल नामे की तरह है।

जहर उगलता रहा है मूसा
लश्कर आतंकी अबू मूसा कश्मीरी का जम्मू कश्मीर और भारत को लेकर यह कोई पहला बयान नहीं है। वह अक्सर भारत में हिंसा फैलाने और कश्मीर पर पाकिस्तान के कब्जे जैसी बातें करता रहा है। इस साल की शुरुआत में मूस का कुछ बयान सामने आए थे, जिसमें वह धर्म के आधार पर हिंसा को उकसा रहा था।

अबू मूसा का बयान नया नहीं है लेकिन इसकी टाइमिंग खास है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेता इस्लामाबाद में मौजूद हैं। पाकिस्तान ने खुद को ‘शांतिदूत’ और युद्ध रुकवाने वाले देश के तौर पर पेश किया है। ऐसे में एक आतंकी का खुलकर सामने आना और बयानबाजी करना इस्लामाबाद के शांति प्रयासों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

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