नारी शक्ति बिल पर खरगे का पीएम मोदी को खत: सरकार की मंशा पर उठाए बड़े सवाल, की यह मांग!


Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष को भरोसे में लिए बिना फैसला लिया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए.

महिला आरक्षण कानून को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. संसद के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस और केंद्र सरकार आमने-सामने नजर आ रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि सरकार जल्दबाजी में इस कानून को लागू कर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। वहीं, सरकार का दावा है कि यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सच में महिला सशक्तिकरण है या फिर चुनावी रणनीति? आइए समझते हैं पूरा मामला.

क्या चुनाव के बीच बुलाया गया सत्र सही है?
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि राज्य चुनावों के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाना कई सवाल खड़े करता है. उनका मानना है कि इससे यह संदेश जाता है कि सरकार महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू कर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि इतने अहम मुद्दे पर जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए.

क्या सरकार ने विपक्ष को भरोसे में लिया?
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस विशेष सत्र को बुलाने से पहले विपक्षी दलों से कोई चर्चा नहीं की. उन्होंने कहा कि सरकार सहयोग मांग रही है, लेकिन जरूरी जानकारी साझा नहीं कर रही. खासतौर पर परिसीमन (डिलिमिटेशन) जैसे अहम मुद्दे पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई है, जिससे सार्थक चर्चा मुश्किल हो जाती है.

क्यों जरूरी है ऑल-पार्टी मीटिंग?
खरगे ने मांग की है कि 29 अप्रैल के बाद सभी दलों की बैठक बुलाई जाए, ताकि महिला आरक्षण कानून और उससे जुड़े परिसीमन पर विस्तार से चर्चा हो सके. उनका कहना है कि यह फैसला सिर्फ केंद्र ही नहीं, राज्यों को भी प्रभावित करेगा, इसलिए सभी पक्षों की राय लेना जरूरी है.

क्या पहले भी उठे हैं ऐसे सवाल?
खरगे ने अपने पत्र में सरकार के पिछले फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि नोटबंदी, जीएसटी और जनगणना जैसे मुद्दों पर भी पर्याप्त संवाद नहीं हुआ था. उन्होंने कहा कि ऐसे रिकॉर्ड के कारण सरकार पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं.

खरगे ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से पारित किया था और उस समय कांग्रेस ने इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि मोदी जी ने भी तत्काल लागू करने पर सहमति की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया.

आगे क्या हो सकता है?
संसद का यह विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने वाला है, जिसमें महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़े विधेयक पेश किए जा सकते हैं. वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं. अब देखना होगा कि यह सियासी टकराव आगे क्या मोड़ लेता है और क्या सभी दल किसी सहमति पर पहुंच पाते हैं.

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