नासा के सबसे भरोसेमंद मिशन में से एक क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर कुछ ऐसा खोज दिया है जो सीधे-सीधे जिंदगी की कहानी से जुड़ा है। मंगल ग्रह जिसे हम एक सूखा, ठंडा और बंजर ग्रह मानते हैं। वहीं से अब मिले हैं ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स। अब ये ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स क्या होते हैं वोबता देते हैं। दरअसल सीधी भाषा में ये वही केमिकल कंपाउंड्स हैं जिनसे धरती पर जीवन की शुरुआत हुई थी। यानी यह लाइफ के बिल्डिंग ब्लॉक्स माने जाते हैं। क्यूरियोसिटी रोअ ने मंगल के इक्वेटर के पास मौजूद एक सूखी झील यानी कि गेल क्रेटर में सात अलग-अलग ऑर्गेनिक कंपाउंड्स डिटेक्ट किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यहां यह है कि इनमें से पांच कंपाउंड्स पहले भी कभी मंगल पर देखे ही नहीं गए।
अब यहीं से शुरू होता है असली सस्पेंस। बता दें कि क्या यह मॉलिक्यूल्स इस बात का सबूत है कि मंगल पर कभी जिंदगी थी? साइंटिस्ट का जवाब है शायद। लेकिन अभी पक्का नहीं है क्योंकि यह मॉलिक्यूल्स तीन तरीके से आते हैं। प्राचीन माइक्रोस्कोपिक लाइफ से, मेट्रॉइड से या फिर जियोलॉजिकल प्रोसेससेस से। लेकिन एक बात साफ है कि अगर मंगल पर कभी जिंदगी थी तो उसके केमिकल निशान आज भी मौजूद है। आज मंगल का टेंपरेचर 100° सेल्सियस तक पहुंच चुका है और बहुत ही पतला एटमॉस्फियर है। खतरनाक सोलर रेडिएशंस हैं। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। बिलियंस पहले वहां पानी बहता था। झीलें थी और एटमॉस्फयर भी थिक था। यानी बिल्कुल वैसा जैसा अर्थ पे होता है। इसलिए साइंटिस्ट मानते हैं कि मंगल पर जीवन की शुरुआत होना पूरी तरह से पॉसिबल हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यहां ये उठता है क्या इतने पुराने केमिकल ट्रेसेस आज तक सर्वाइव कर सकते हैं? और यहीं पर यह डिस्कवरी बनती है गेम चेंजर। बता दें कि क्यूरियोसिटी रोवर ने ऐसे मॉलिक्यूल्स डिटेक्ट किए हैं जैसे कि बेंजोथियोफीन यानी कि सल्फर कंटेनिंग कंपाउंड और इसके साथ ही नाइट्रोजन बेस्ड कंपाउंड्स और इनका स्ट्रक्चर बिल्कुल डीएनए से जुड़ा हुआ है। यानी डीएनए से जुड़े मॉलिक्यूल्स जैसा मिलताजुलता है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ध्यान रखें कि ये डीएनए नहीं है लेकिन डीएनए बनाने वाली बिल्डिंग ब्लॉक जरूर हो सकते हैं। क्यूरियोसिटी मिशन से जुड़ी जेनफर जैसी वैज्ञानिक यानी कि साइंटिस्ट का मानना है कि हम शायद 3 बिलियन साल पुराने ऑर्गेनिक मैटर को देख रहे हैं। अब जरा सोचिए 3.5 अरब साल पुराना केमिकल एविडेंस आज भी मौजूद है। यूरोपियन स्पेस एजेंसी का रोजलैंड फ्रैंकलिन रोअ 2028 में लॉन्च होगा और यह रोअ मंगल की सरफेस के 2 मीटर नीचे तक ड्रिल करेगा क्योंकि सरफेस के नीचे रेडिएशन कम होता है और ऑर्गेनिक मटेरियल ज्यादा सुरक्षित रहते हैं। तो अब सवाल यह है कि क्या मंगल पर कभी भी जिंदगी थी या यह सब सिर्फ केमिकल कोइंसिडेंस है और अगर मंगल पर जिंदगी थी तो क्या वो कहीं और भी हो सकती है। बता दें कि मंगल अब सिर्फ एक रेड प्लनेट नहीं रहा है यह हमारी सबसे बड़ी डिस्कवरी का दरवाजा बन चुका है।





