Ganga Expressway News: उत्तर प्रदेश के विकास की रफ्तार अब बुलेट ट्रेन की गति से आगे बढ़ने को तैयार है. बुधवार को यानि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में देश के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर राज्य को एक नई पहचान दी. लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अब ‘मिशन 2029’ का खाका तैयार कर लिया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को 3200 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.

36,230 करोड़ रुपये की भारीभरकम लागत से तैयार 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ता है. यह मार्ग मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत 12 जिलों के 519 गांवों की तकदीर बदलेगा. इस छह लेन एक्सप्रेसवे पर वाहनों की निर्बाध आवाजाही के लिए 14 बड़े पुल, 165 छोटे पुल और 32 फ्लाईओवर बनाए गए हैं.
सुरक्षा और सामरिक महत्व: 3.5 किमी की हवाई पट्टी
गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि आपात स्थिति में भारतीय वायुसेना का एक रनवे भी है. शाहजहांपुर के पास 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी विकसित की गई है, जहां लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई जा सकेगी. इसके अलावा, मेरठ और प्रयागराज में दो मुख्य टोल प्लाजा के साथ 19 रैंप टोल प्लाजा और 9 अत्याधुनिक जन सुविधा केंद्र बनाए गए हैं.
देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60% हिस्सेदारी
गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का 60 प्रतिशत से भी अधिक है. आगामी मई माह में जब लखनऊकानपुर एक्सप्रेसवे शुरू होगा, तो यह नेटवर्क बढ़कर 1973 किलोमीटर हो जाएगा.
मिशन 2029: 11 नई परियोजनाओं पर काम शुरू
यूपीडा के मुताबिक, राज्य सरकार केवल गंगा एक्सप्रेसवे पर नहीं रुक रही है. प्रदेश में कनेक्टिविटी का ऐसा जाल बिछाने की तैयारी है कि हर शहर एक्सप्रेसवे से जुड़ जाए. राज्य में वर्तमान में 11 नई लिंक और मुख्य एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर प्रारंभिक कार्य शुरू हो चुका है. कई रूटों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है. 2029 तक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 3200 किमी पहुंचाने का लक्ष्य है, जो किसी भी भारतीय राज्य के लिए एक रिकॉर्ड होगा.
आर्थिक और औद्योगिक क्रांति का आधार
इन एक्सप्रेसवे के किनारों पर औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं. इससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी और उद्योगों को कच्चा माल लाने व तैयार माल भेजने में आसानी होगी. मेरठ से प्रयागराज तक के सफर में समय की भारी बचत से न केवल आम जनता को लाभ होगा, बल्कि व्यापार और निवेश के लिए उत्तर प्रदेश ‘पहली पसंद’ बनेगा.
यूपी पहले से ही एक्सप्रेसवे के मामले में अग्रणी है. फिलहाल यहां निम्नलिखित मार्ग संचालित हैं:
- यमुना एक्सप्रेसवे
- आगरालखनऊ एक्सप्रेसवे
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे
- नोएडाग्रेटर नोएडा और दिल्लीमेरठ एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण यूपी को ‘उत्तर भारत का ग्रोथ इंजन’ बनाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है. आने वाले वर्षों में 3200 किलोमीटर का यह विशाल नेटवर्क प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने के सपने को पंख देगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही ये इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं यूपी को वैश्विक स्तर पर एक निवेश हब के रूप में स्थापित कर रही हैं.





