भारत में डीज़ल की कीमतों में बड़े अंतर के कारण बल्क ग्राहक अब रिटेल पेट्रोल पंप से सस्ता डीज़ल खरीद रहे हैं. इससे तेल कंपनियों की बल्क बिक्री में 3050% तक गिरावट आई है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, थोक ग्राहकों को डीजल की बिक्री में 30% से 50% तक की गिरावट आई है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि कई बड़े ग्राहक अब रिटेल पेट्रोल पंप से डीजल खरीद रहे हैं, जहां कीमत लगभग ₹50 प्रति लीटर तक सस्ती पड़ रही है.

दरअसल, हाल ही में तेल कंपनियों ने बड़े ग्राहकों के लिए डीज़ल के दाम बढ़ा दिए हैं, जिनमें जैसे डिफेंस, रेलवे, फैक्ट्रियां, खनन कंपनियां और सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल होती हैं. कंपनी ने यह फैसला ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद लिया था.
डीजल की कीमतों में इतना है अंतर
कंपननियों ने आम जनता के लिए रिटेल पंप पर मिलने वाले डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं. इससे कंपनियों को हर लीटर पर नुकसान हो रहा है. अब जब बल्क ग्राहक भी सस्ता डीजल लेने के लिए रिटेल पंप की ओर जा रहे हैं, तो कंपनियों का नुकसान और बढ़ रहा है. दिल्ली में बल्क ग्राहकों के लिए डीजल की कीमत लगभग ₹134.5 प्रति लीटर है, जबकि रिटेल पंप पर यही डीजल ₹87.6 प्रति लीटर मिल रहा है. यानी करीब ₹47 का अंतर. इसी तरह विशाखापट्टनम में बल्क कीमत ₹148.5 और रिटेल कीमत ₹96.4 प्रति लीटर है, यानी ₹52 का फर्क.
ये महंगे दाम पर खरीद रहे डीजल
कीमतों में यह बड़ा अंतर ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है, क्योंकि सस्ता ईंधन सीधे उनके मुनाफे को बढ़ाता है. हालांकि, रक्षा, रेलवे और कुछ बड़ी कंपनियां अभी भी महंगे दाम पर ही बल्क में डीजल खरीद रही हैं. दूसरी तरफ, छोटे उद्योग, खनन और सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदार और मछली पकड़ने वाले संगठन अब तेजी से रिटेल पंप की ओर शिफ्ट हो रहे हैं. भारत में कुल डीजल खपत का लगभग 12% हिस्सा बल्क बिक्री से आता है. ऐसे में इन ग्राहकों का रिटेल पंप की ओर जाना, पेट्रोल पंप की बिक्री को बढ़ा रहा है.
सरकार ने कहा घबराने की जरूरत नहीं
कुछ इलाकों में आम लोग भी डीजल और पेट्रोल की कीमत बढ़ने की आशंका से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं. हालांकि सरकार ने कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है. यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है. 2022 में यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब बल्क ग्राहक सस्ते रिटेल डीजल की ओर चले गए थे. फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियां ग्राहकों को छूट देने के बजाय अपना मार्केट शेयर खोने के लिए तैयार दिख रही हैं.





