नई दिल्ली: कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के बाद अब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की बारी है। इसके साफ संकेत मिल गए हैं। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है। ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद खुदरा दरों को चार साल से स्थिर रखा गया है। इसके कारण तेल कंपनियों का नुकसान बढ़ता जा रहा है।

ऊंची बनी हुई हैं क्रूड कीमतें
इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें चार साल के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गईं।
126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद उनमें थोड़ी नरमी आई।
लेकिन, वे 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही बनी रहीं।
होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही अभी भी सीमित है।
शांति वार्ता ठप होने के बीच अमेरिकाईरान के नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है।
पेट्रोलडीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत
सरकारी सूत्रों ने बताया कि निकट भविष्य में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसके पहले दिन में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने उद्योग की ओर से एक बयान जारी करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा लागत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों के साथ घरेलू एलपीजी दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जा रही है।
सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनियों ने लागत को ध्यान में रखते हुए कमर्शियल एलपीजी, औद्योगिक डीजल, 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर और अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को बेचे जाने वाले जेट ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है।
पहले से ही जताई जा रही है संभावना
विश्लेषकों ने पहले ही इस बात की संभावना जताई थी कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान समाप्त होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2528 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमला किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसके बाद तेहरान ने भी कड़ा पलटवार किया। इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद हो गया। यह स्ट्रेट दुनिया की सबसे एनर्जी सप्लाई के अहम मार्गों में से एक है। होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ग्लोबल मार्केट्स से जोड़ता है। ग्लोबल ऑयल ट्रेड का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते गुजरता है। साथ ही बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नैचुरल गैस के परिवहन का भी यही प्रमुख मार्ग है।
कितना हो रहा है नुकसान?
पिछले सप्ताह पेट्रोलियम मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि:
सरकारी स्वामित्व वाली ईंधन खुदरा कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
डीजल के मामले में यही नुकसान लगभग 100 रुपये प्रति लीटर तक है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्लोबल तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
इसके बावजूद पिछले लगभग चार साल से पंप पर बिकने वाले ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
हालांकि, अधिकारी ने यह भी कहा था कि फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।
कच्चे तेल की कीमत इस महीने औसतन 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही है। इसकी कीमत पिछले साल 70 डॉलर प्रति बैरल थी।
खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 की शुरुआत से ही स्थिर बनी हुई हैं। यह वह समय है जब कुछ महीनों में तेल की कीमतें बढ़ीं तो कुछ महीनों में उनमें गिरावट भी आई। जब कीमतें गिरीं तो सरकारी तेल कंपनियों ने अच्छाखासा मुनाफा कमाया। इसका इस्तेमाल उन्होंने कीमतें बढ़ने पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया।
दिल्ली में अभी पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर है। डीजल 87.67 रुपये में मिल रहा है।
हरदीप सिंंह पुरी ने बताए हालात
वहीं, गुजरात में एक कार्यक्रम में पहुंचे पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में गंभीर रुकावट पैदा हुई है। इसके बावजूद भारत ने घरेलू सप्लाई को स्थिर बनाए रखा है। उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटके से बचाया है।
पुरी ने सूरत में दक्षिण गुजरात के लिए आयोजित ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण 60 दिनों से जारी सप्लाई बाधाओं के बावजूद भारत मजबूती से खड़ा है।
पुरी ने बताया कि सरकार ने वैश्विक झटकों को सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय राजकोषीय स्तर पर समायोजित किया। संकट शुरू होने के बाद से पिछले 60 दिनों के दौरान कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की सप्लाई की दैनिक आधार पर निगरानी की जा रही है। इससे देशभर में निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकी है।
उन्होंने कहा, ‘ग्लोबल सप्लाई चेन के प्रमुख मार्गों और उत्पादों में 2030 फीसदी तक व्यवधान आने पर कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता। ढुलाई और बीमा लागत बढ़ती है, आपूर्ति में देरी होती है और देशों को कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।’





