भारत उभरते बाजारों में 2020 के बाद से सबसे मजबूत इकोनॉमी बना हुआ है और इसके बड़े विदेशी मुद्रा भंडार ने ग्लोबल झटकों के दौरान करेंसी की अस्थिरता को कंट्रोल करने तथा विश्वास को मजबूत करने में मदद की है. साख तय करने वाली एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने मंगलवार को उभरते बाजारों पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्पष्ट एवं भरोसेमंद मॉनेटरी पॉलिसी रूपरेखा, महंगाई अपेक्षाओं का स्थिर रहना और जरूरत पड़ने पर एक्सचेंज रेट्स का समायोजित हो पाना, इन सभी कारणों से भारत भविष्य के झटकों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है. मूडीज ने कहा कि उभरते देशों में भारत बेहतर स्थिति में है और भविष्य में किसी भी तनाव के समय में देश मजबूत सुरक्षा बनाए रखेगा.

क्यों है भारत मजबूत?
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि घरेलू फंडिंग पर भारत की निर्भरता स्थानीय बाजारों की मजबूती और बेहतर भंडार से संतुलित होती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। हालांकि, भारत का अपेक्षाकृत हाई डेट बोझ और कमजोर राजकोषीय संतुलन लगातार झटकों से निपटने के लिए उपलब्ध गुंजाइश को सीमित करता है. इसमें कहा गया कि हाल के दबाव से पहले ही भारत ने स्थिरता को समर्थन देने वाले महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए थे. मूडीज ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में कई बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने वैश्विक स्तर के कई बड़े झटकों को जोखिम उपाय बढ़ाए बिना और तेज वृद्धि या बाजार पहुंच खोए बिना सहन किया है. यह नीतिगत ढांचे में स्थायी सुधार, सुरक्षा उपायों और अनुकूल बाहरी परिस्थितियों को दर्शाता है.
इतने देशों को छोड़ा पीछे
मूडीज ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अस्थिर वित्तीय परिस्थितियों में उनके वित्त पोषण लागत और बाजार पहुंच के आधार पर उनकी जुझारू क्षमता का आकलन किया. इसमें भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, मलेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, तुर्किये और अर्जेंटीना जैसे बड़े उभरते बाजार देशों पर ध्यान केंद्रित किया गया. साथ ही दबाव के चार दौर का विश्लेषण किया गया. इनमें 2020 की शुरुआत में कोविड19 वैश्विक महामारी की शुरुआत, 2022 में वैश्विक मुद्रास्फीति में उछाल और उससे जुड़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व का कड़ा मौद्रिक नीति रुख, 2023 की शुरुआत में अमेरिकी क्षेत्रीय बैंकिंग संकट और 2025 में नए सिरे से शुल्क दबाव शामिल हैं.





