‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन व्यंजन’ की सूची जारी, जानें कौन सा जिला किस व्यंजन के लिए प्रसिद्ध

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘वन डिस्ट्रिक्टवन क्यूज़ीन’ के तहत राज्य के 75 जिलों का एक विस्तृत जिलावार खाद्य मानचित्र जारी किया है। इस योजना में प्रत्येक जिले को उसके विशिष्ट व्यंजनों के लिए चिन्हित किया गया है, ताकि इन्हें ब्रांडिंग, मार्केटिंग और निर्यात के लिए बढ़ावा दिया जा सके। लेकिन इस सूची में शामिल सभी व्यंजन शाकाहारी हैं।

‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन व्यंजन’ की सूची जारी, जानें कौन सा जिला किस व्यंजन के लिए प्रसिद्ध

लखनऊ और अन्य जिलों की व्यंजन सूची
लखनऊ, जिसे यूनेस्को ने वैश्विक गैस्ट्रोनॉमी सिटी के रूप में मान्यता दी है, को रेवड़ी, आम के उत्पाद, चाट और मलाई मक्खन जैसे व्यंजन दिए गए हैं। लेकिन गालावती कबाब, अवधी बिरयानी, निहारी कुलचा और काकोरी कबाब जैसे प्रसिद्ध व्यंजन सूची से बाहर रहे।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मशहूर मोरादाबादी बिरयानी भी सूची में शामिल नहीं है। वहीं, गौतम बुद्ध नगर को केक और बेकरी उत्पाद, और रायबरेली को सिर्फ मसाले ही सूचीबद्ध किया गया है।

योजना की घोषणा और उद्देश्य
इस योजना की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 नवंबर 2025 को की थी, और इसे 24 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने औपचारिक रूप से लॉन्च किया। यह योजना राज्य की ‘वन डिस्ट्रिक्टवन प्रोडक्ट’ योजना पर आधारित है। सरकार ने योजना के कार्यान्वयन के लिए 150 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। योजना के तहत कारीगरों और उद्यमियों को 25% तक की सब्सिडी दी जाएगी।

किस जिले में मिली किस व्यंजन को जगह? ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं।
आगरा पेठा
मथुरा पेड़ा, छप्पन भोग
जौनपुर इमरती
वाराणसी कचौरी, ठंडाई, लस्सी, बनारसी पान
लखनऊ रेवड़ी, चाट, मलाई मक्खन, आम उत्पाद
अज़मगढ़ सफेद गाजर का हलवा
महोबा खजूर का गुड़
हमीरपुर बुंदेली दालआधारित व्यंजन
नोएडा केक, बेकरी उत्पाद
रायबरेली मसाले

योजना के लाभ और आलोचना
योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के व्यंजनों को भारत और विश्व स्तर पर बढ़ावा देना है। इसमें गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग सुधार, शेल्फलाइफ सुधार, मानकीकरण, हर व्यंजन के लिए अलग लोगो और ऑनलाइन व ऑफलाइन मार्केटिंग का प्रावधान है।

हालांकि, इस सूची का केवल शाकाहारी होना और कुछ व्यंजन चयन को लेकर विशेषज्ञों ने आलोचना की है। खाद्य इतिहासकार पुष्पेश पंत ने कहा, “यह प्रयास हास्यास्पद है। व्यंजन को केवल जिले के प्रशासनिक सीमाओं में बाँधना उचित नहीं।”

एक वरिष्ठ MSME अधिकारी ने कहा कि ODOC सूची को अंतिम रूप देने से पहले कई पहलुओं पर विचार किया गया, जिसमें ब्रांडिंग, पैकेजिंग और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुँचाना शामिल है।

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