जिंदगी की जंग जीत गया 880 ग्राम का ‘नन्हा फाइटर’, 60 दिन बाद मिली नई सांस; डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

मध्य प्रदेश के ​बालाघाट जिला अस्पताल में एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला है जिसने मेडिकल साइंस और दुआओं की शक्ति पर विश्वास और बढ़ा दिया है. यहां महज 880 ग्राम वजन के साथ समय से पहले जन्मे एक नवजात ने 60 दिनों तक मौत से संघर्ष किया और आखिरकार स्वस्थ होकर अपने घर लौटा.

जिंदगी की जंग जीत गया 880 ग्राम का ‘नन्हा फाइटर’, 60 दिन बाद मिली नई सांस; डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

​मामला लामता तहसील के मोहगांव का है. यहां की निवासी सुमन्द्री उइके ने 24 फरवरी 2026 को एक शिशु को जन्म दिया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जन्म के समय बच्चा प्रीमैच्योर था, जिसके कारण उसका वजन सामान्य से बहुत कम, केवल 880 ग्राम था. ऐसी स्थिति में परिजनों ने भी उम्मीदें छोड़ दी थीं, लेकिन जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड के डॉक्टरों ने हार नहीं मानी.

​60 दिनों का कड़ा संघर्ष और उपचार

​सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के अनुसार, बच्चे की हालत बेहद नाजुक थी और उसे सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी. मेडिकल स्टाफ ने पूरी तत्परता दिखाते हुए निम्नलिखित कदम उठाए जिसमें शिशु को शुरुआती 11 दिनों तक जीवन रक्षक मशीन पर रखा गया. संक्रमण से बचाने के लिए 5 दिनों तक गहन दवाओं का कोर्स दिया गया. शुरुआत में नली के माध्यम से मां का दूध दिया गया, जिसके बाद धीरेधीरे कटोरीचम्मच से फीडिंग शुरू की गई.

डॉक्टरों को 60 दिन बाद मिली सफलता

​लगातार 60 दिनों की निगरानी और मेडिकल स्टाफ के समर्पण का परिणाम सुखद रहा. बच्चा अब सीधे मां का दूध पीने में सक्षम है और उसका वजन 880 ग्राम से बढ़कर 1500 ग्राम हो गया है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया है.

​दो महीने तक अस्पताल में मौत से जूझ रहे अपने कलेजे के टुकड़े को स्वस्थ देख मातापिता की खुशी का ठिकाना नहीं है. उन्होंने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने मुस्तैदी से सेवा कर उनके बच्चे को नई जिंदगी दी.

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