नई टैक्स रिजीम कम टैक्स दरों और आसान प्रक्रिया के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रही है. खासकर वेतनभोगी लोग ₹12.75 लाख तक और अन्य आय वाले लोग ₹12 लाख तक की आय पर शून्य टैक्स का लाभ उठा पा रहे हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स बिना ज्यादा सोचविचार के इस विकल्प को चुन रहे हैं.

लेकिन फैसला इतना आसान नहीं
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कम टैक्स रेट देखकर निर्णय लेना सही नहीं है. पुरानी टैक्स रिजीम में मिलने वाली कई छूट और कटौतियां टैक्स बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं. नई रिजीम में इन ज्यादातर छूटों को हटा दिया गया है, जिससे कई मामलों में कुल टैक्स बोझ बढ़ भी सकता है.
पुराने सिस्टम की खासियत
पुरानी टैक्स रिजीम में HRA, बच्चों की शिक्षा भत्ता, LTC, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य कई लाभ मिलते हैं. इनका सही उपयोग करने पर टैक्सेबल इनकम काफी कम हो सकती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। खासकर वे लोग जो निवेश और टैक्स सेविंग स्कीम्स में पैसा लगाते हैं, उनके लिए यह विकल्प अब भी फायदेमंद हो सकता है.
दोनों रिजीम में मिलते हैं कुछ कॉमन फायदे
कुछ टैक्स लाभ ऐसे हैं जो दोनों सिस्टम में मिलते हैं. उदाहरण के लिए, फूड कूपन पर ₹200 प्रति मील तक टैक्स छूट दी जा रही है, जो पहले ₹50 थी. इसके अलावा, कंपनी द्वारा दी गई कार सुविधा पर टैक्स का एक तय नियम है, जिससे अतिरिक्त अलाउंस पर टैक्स नहीं लगता. ₹15,000 तक के गिफ्ट और वाउचर भी दोनों रिजीम में टैक्स फ्री हैं.
ITR फाइलिंग की समयसीमा
वित्त वर्ष 202627 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2027 तय की गई है. वहीं, असेसमेंट ईयर 202627 के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है और उस पर नए नियम लागू नहीं होंगे.
सही चुनाव से ही होगा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्सपेयर्स को अपनी आय, खर्च और निवेश की आदतों के आधार पर दोनों टैक्स रिजीम की तुलना करनी चाहिए. जहां नई रिजीम सरल है, वहीं पुरानी रिजीम सही प्लानिंग के साथ ज्यादा बचत का मौका देती है. इसलिए ITR फाइल करते समय सही विकल्प चुनना बेहद अहम है.





