एनसीआरबी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत: महिला अपराधों में भारी गिरावट, दोषसिद्धि दर 76.6%; बंगाल की हालत चिंताजनक​

लखनऊ। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और अभियोजन तंत्र की साख को मजबूती प्रदान की है। वर्ष 2024 के दौरान राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध, डकैती, लूट और चोरी जैसे संगीन अपराधों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़े राज्य में कानूनव्यवस्था की स्थिति में ठोस सुधार की तस्वीर पेश करते हैं।

एनसीआरबी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत: महिला अपराधों में भारी गिरावट, दोषसिद्धि दर 76.6%; बंगाल की हालत चिंताजनक​

अपहरण और दुष्कर्म के आंकड़ों में ऐतिहासिक गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, अपहरण के प्रकरणों में भारी कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां ऐसे 14,272 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर मात्र 5,306 रह गई, जो 62.8 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट को दर्शाता है। आधार वर्ष 2022 से तुलना करें तो इसमें 64.4 प्रतिशत तक की कमी आंकी गई है। दुष्कर्म के मामलों में भी गिरावट जारी रही; 2023 में दर्ज 3,516 मामलों के सापेक्ष 2024 में यह आंकड़ा 3,209 पर आ गया। इसी प्रकार, महिलाओं की हत्या के मामलों में 4.8 प्रतिशत की कमी के साथ संख्या 702 से घटकर 668 हो गई।

एंटी रोमियो अभियान का दिखा व्यापक असर

महिलाओं की अस्मिता पर हमले और छेड़छाड़ के मामलों में भी अप्रत्याशित गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2023 में ऐसे 9,453 मामले सामने आए थे, जो घटकर 2024 में 4,418 रह गए। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। एनसीआरबी डेटा में राज्य सरकार के ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ अभियान का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। जहां 2023 में छेड़छाड़ के 2,175 मामले दर्ज थे, वहीं सघन चेकिंग और सख्त कार्रवाई के चलते 2024 में यह बढ़कर 4,418 मामले दर्ज हुए, जो पुलिस की बेहतर संग्रहण क्षमता और पीड़िताओं की बढ़ती जागरूकता को भी दर्शाता है। हालांकि, घरेलू उत्पीड़न के मामलों में मामूली बढ़त दर्ज की गई और 2024 में ऐसे 21,266 मामले दर्ज किए गए।

दोषसिद्धि के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश सबसे आगे

केवल अपराध दर्ज करना ही नहीं, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर बाजी मारी है। वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराध में राज्य की दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत रही। कुल 3,52,664 लंबित मामलों में से 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी हुई, जिनमें से 21,169 मामलों में अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। राज्य ने कुल 27,743 मामलों का निस्तारण किया, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। महिलाओं के खिलाफ अपराध में वहां की दोषसिद्धि दर मात्र 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई। अन्य राज्यों की बात करें तो मिजोरम 87.8% के साथ शीर्ष पर है, जबकि कर्नाटक , महाराष्ट्र , तेलंगाना , केरल , पंजाब , तमिलनाडु , मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य पीछे हैं।

लंबित मामलों की चुनौती बरकरार

हालांकि, पुलिस और न्यायपालिका के बेहतर प्रदर्शन के बावजूद लंबित प्रकरणों की संख्या अब भी एक बड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 92.1 प्रतिशत मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। बंगाल में यह दर 96.6 प्रतिशत, बिहार में 97.9 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 95.4 प्रतिशत है, जो देश भर में त्वरित न्याय की राह में मौजूद अड़चनों को रेखांकित करता है।

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