गर्मियों की छुट्टियों में घूमने का प्लान बना रहे यात्रियों को इस बार महंगाई का बड़ा झटका लगा है. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूटों पर हवाई किराया 40 से 50 फीसदी तक बढ़ गया है, जिससे विदेश ट्रिप पर जाने वाले लोगों का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है. जेट फ्यूल की महंगी कीमतें, एयरस्पेस में रुकावटें और उड़ानों की कम होती क्षमता ने टिकटों को बेहद महंगा बना दिया है. ऐसे में अब लोग यूरोपअमेरिका की जगह दक्षिणपूर्व एशिया और घरेलू हिल स्टेशनों का रुख कर रहे हैं.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से लेह जाने वाली फ्लाइट का किराया सालाना आधार पर करीब 74 फीसदी बढ़ गया है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। वहीं, श्रीनगर और शिमला के टिकट 60 से 68 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं. भीषण गर्मी और हीटवेव के बीच लोग बड़ी संख्या में ठंडी जगहों का रुख कर रहे हैं, जिससे मांग तेजी से बढ़ी है. अंतरराष्ट्रीय रूटों पर भी हालात अलग नहीं हैं. लंदन और पेरिस की उड़ानों का किराया 53 फीसदी तक बढ़ गया है, जबकि सिडनी के लिए टिकट लगभग 38 फीसदी महंगे हो चुके हैं. थाईलैंड और सिंगापुर जैसे लोकप्रिय डेस्टिनेशन भी इस बार यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं. इन जगहों के किराए में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
क्यों बढ़े हैं दाम?
एयरलाइंस इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे अहम वजह जेट फ्यूल की कीमतों में तेज उछाल है. अप्रैल के आखिरी सप्ताह में वैश्विक जेट फ्यूल की कीमत 179 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो फरवरी के मुकाबले करीब 80 फीसदी ज्यादा है. इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव और एयरस्पेस बंद होने की वजह से कई उड़ानों को लंबे रूट से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन खर्च और ऑपरेशनल लागत दोनों बढ़ गए हैं.
उधर, एयरलाइंस की क्षमता में कटौती ने भी किरायों को ऊपर पहुंचा दिया है. वैश्विक एविएशन डेटा कंपनी OAG के मुताबिक, IndiGo ने मई में अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता फरवरी के मुकाबले 17 फीसदी घटा दी है. वहीं, Air India भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर रोजाना करीब 100 उड़ानों में कटौती कर सकती है. इसका असर खासतौर पर यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जाने वाले यात्रियों पर पड़ने वाला है.
लोग बदल रहे हैं ट्रेवल डेस्टिनेशन
महंगे टिकटों के कारण अब भारतीय यात्रियों का ट्रैवल पैटर्न भी बदलने लगा है. ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक, लोग लंबी दूरी की महंगी यात्राओं से बच रहे हैं और अब कम दूरी वाले वीजाफ्री या बजट फ्रेंडली देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं. थाईलैंड, वियतनाम, श्रीलंका, नेपाल और मलेशिया जैसे देशों की मांग तेजी से बढ़ी है. Cleartrip के अनुसार, फिलीपींस के लिए बुकिंग तीन गुना तक बढ़ चुकी है.
घरेलू पर्यटन में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. ऋषिकेश, लेह, वाराणसी और पूर्वोत्तर के शहरों जैसे शिलांग, गुवाहाटी और इंफाल के लिए बुकिंग तेजी से बढ़ी है. AbhiBus के आंकड़ों के अनुसार, हिल स्टेशनों के लिए एडवांस बुकिंग में 38 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कूर्ग के लिए मई की बुकिंग 115 फीसदी तक बढ़ चुकी है. हालांकि महंगे किराए के बावजूद यात्रा की मांग कमजोर नहीं हुई है. Yatra के मुताबिक, इस गर्मी में एडवांस बुकिंग सामान्य सीजन की तुलना में 20 से 25 फीसदी ज्यादा चल रही है. इससे साफ है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए यात्रा अब सिर्फ शौक नहीं, बल्कि प्राथमिकता बन चुकी है.




