पुरानी टैक्स रिजीम के ये धांसू विकल्प बचाएंगे आपकी गाढ़ी कमाई, ज्यादातर लोग नहीं जानते तरीका!​

मई का महीना शुरू होते ही नौकरीपेशा वर्ग और करदाताओं के माथे पर एक चिंता साफ दिखने लगती है, टैक्स कैसे बचाया जाए? हर साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत में या फिर बिल्कुल आखिरी पलों में लोग आननफानन में निवेश के विकल्प तलाशने लगते हैं. इस हड़बड़ी का नतीजा यह होता है कि सही जानकारी के अभाव में वे अपने पैसों का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते और टैक्स छूट का पूरा फायदा उठाने से चूक जाते हैं.

पुरानी टैक्स रिजीम के ये धांसू विकल्प बचाएंगे आपकी गाढ़ी कमाई, ज्यादातर लोग नहीं जानते तरीका!​

वर्तमान में सरकार ने नई और पुरानी, दो टैक्स रिजीम का विकल्प दिया हुआ है. नई व्यवस्था में टैक्स की दरें भले ही कम रखी गई हैं, लेकिन इसमें से ज्यादातर डिडक्शन या टैक्स छूट का लाभ खत्म कर दिया गया है. ऐसे में जो करदाता पुरानी टैक्स व्यवस्था के साथ बने हुए हैं, उनके लिए आयकर अधिनियम का सेक्शन 80C आज भी सबसे बड़ा हथियार है.

इस सेक्शन के जरिए सही जगह पर पैसा लगाकर न सिर्फ टैक्स का भारीभरकम बोझ कम किया जा सकता है, बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत फंड भी तैयार हो सकता है. आइए समझते हैं निवेश के उन चार प्रमुख विकल्पों को, जो टैक्स बचाने के साथसाथ आपकी पूंजी को भी बढ़ाते हैं.

ELSS: जहां टैक्स छूट के साथ मिलता है बाजार का बंपर मुनाफा

अगर आप निवेश में थोड़ा जोखिम उठाकर बेहतरीन रिटर्न की तलाश में हैं, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम एक शानदार जरिया बन सकती है. यह मूल रूप से एक म्यूचुअल फंड है, जिसका पैसा शेयर बाजार में लगाया जाता है. इसमें निवेश करने पर सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका लॉकइन पीरियड महज तीन साल का होता है. बाजार की चाल अगर अच्छी रही, तो लंबी अवधि में यह स्कीम निवेशकों की वेल्थ क्रिएट करने में काफी कारगर साबित होती है. टैक्स बचाने और पूंजी बढ़ाने के इस दोहरे फायदे के कारण इसे काफी पसंद किया जाता है.

PPF और NSCरंटीड रिटर्न का पक्का फॉर्मूला

बाजार के उतारचढ़ाव से दूर जो लोग अपनी मेहनत की कमाई को पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रॉविडेंट फंड एक सदाबहार विकल्प है. यह सरकार की एक बेहद भरोसेमंद स्कीम है, जिस पर फिलहाल लगभग 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें निवेश की गई रकम और उस पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा के लिए पीपीएफ आज भी लोगों की पहली पसंद है.

इसी तरह, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट भी जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए एक बेहतरीन रास्ता है. डाकघर की इस योजना में पांच साल का लॉकइन पीरियड होता है और इसमें सरकार की तरफ से तय दर पर ब्याज मिलता है. जिन लोगों को गारंटीड और फिक्स्ड रिटर्न चाहिए, वे अक्सर अपनी पूंजी इसी स्कीम में लगाते हैं.

सुकन्या समृद्धि योजना से मिलेगा फायदा

जिन करदाताओं के घर में बेटियां हैं, उनके लिए सुकन्या समृद्धि योजना सिर्फ टैक्स बचाने का टूल नहीं, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने का एक अहम माध्यम है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इस सरकारी योजना में सालाना महज 250 रुपये से लेकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है. पीपीएफ की तरह ही, इसमें भी अर्जित ब्याज और मैच्योरिटी का पूरा पैसा टैक्स के दायरे से बाहर रहता है.

निवेश से पहले जान लें ये जरूरी नियम

टैक्स प्लानिंग करते समय एक तकनीकी पहलू को समझना बहुत आवश्यक है. आप ऊपर बताए गए विकल्पों में से किसी एक में पूरा पैसा लगाएं या फिर अलगअलग स्कीमों में बांटकर निवेश करें, आयकर विभाग सेक्शन 80C के तहत सालाना अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की ही छूट देता है.

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