Noida International Airport News: उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है. जिस एयरपोर्ट को दिल्लीNCR के लोगों के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा था, अब इस पर महंगी उड़ानों का खतरा मंडराने लगा है. एयरलाइंस कंपनियों और यात्रियों दोनों की चिंता बढ़ने वाले रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें दिल्ली के इंदिरा गांधी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तुलना में जेवर एयरपोर्ट की पार्किंग फीस यूजर डेवलपमेंट फीस और अन्य शुल्क काफी ज्यादा बताए गए हैं.

यही वजह है कि अब सवाल उठने लगे हैं कि अगर एयरपोर्ट से उड़ान भरना दिल्ली एयरपोर्ट से महंगा हुआ तो क्या यात्री वास्तव में इस अपनाएंगे या फिर दिल्ली एयरपोर्ट को ही प्राथमिकता देंगे. खुद जेवर के विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह ने अभी हाल ही में एक वीडियो जारी कर बताया कि नोएडा से लखनऊ का किराया पांच हजार के पार है. जबकि दिल्ली से लखनऊ तक का किराया तीन हजार से लेकर चार हजार के बीच में है.
दिल्ली से दोगुनी पार्किंग फीस ने बढ़ाई चिंता
जानकारी के अनुसार, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एयरबस A321 जैसे विमान की 6 घंटे की पार्किंग फीस करीब 14500 तय की गई है. वहीं, दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर यही शुल्क करीब 6900 है. यानी दिल्ली की तुलना में जेवर एयरपोर्ट पर विमान पार्किंग लगभग दोगुनी महंगी पड़ेगी. यही नहीं मुंबई एयरपोर्ट की तुलना में भी जेवर एयरपोर्ट की पार्किंग फीस अधिक बताया जा रहा है. एयरलाइंस कंपनियों का कहना है कि जब ऑपरेशन कॉस्ट बढ़ेगी तो उसका सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ेगा इसका मतलब साफ है कि यात्रियों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है.
यूडीएफ में भारी अंतर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा असर
रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू उड़ानों के लिए नोएडा एयरपोर्ट पर यूजर डेवलपमेंट फीस 653 पर प्रस्तावित है. जबकि, दिल्ली एयरपोर्ट पर यह फीस मात्र 129 रुपए है. यानी करीब 406 प्रतिशत ज्यादा शुल्क देखने को मिला रहा है. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में भी एयरपोर्ट की यूडीएफ दिल्ली से काफी अधिक बताई जा रही है. एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि यदि यही शुल्क लागू रहे तो उन्हें हर साल करोड़ों रुपए अतिरिक्त देने पड़ सकते है.
वहीं, एक्सपर्ट्स का मानना है कि एयरलाइंस इस अतिरिक्त बोझ को यात्री पर डालेगी और टिकट के दाम बधाई जाएंगे. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इससे नोएडा एयरपोर्ट की प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हो सकती है. वहीं दूसरी ओर दिल्ली का आईजीआई एयरपोर्ट पहले से ही एक स्थापित और बेहतर कनेक्टिविटी वाला एयरपोर्ट है. यह मेट्रो एक्सप्रेसवे बस और रेलवे जैसी सुविधाएं उपलब्ध है. वहीं, जेवर एयरपोर्ट अभी शुरुआती चरण में है और वहां तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी तैयार भी नहीं हुई है. अब ऐसे में नोएडा और आसपास के रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान और सस्ता है तो फिर ज्यादा किराया देकर जेवर एयरपोर्ट से उड़ान क्यों ली जाए.
एयरलाइन कंपनी ने भी जताई आपत्ति
बताया जा रहा है कि इंडिगो एयरलाइंस ने एयरपोर्ट इकोनामिक रेगुलेटरी अथॉरिटी को पत्र लिखकर इन शुल्कों पर चिंता जताई है. एयरलाइंस का कहना है कि नोएडा एयरपोर्ट के फीस संरचना दिल्ली की तुलना में काफी ज्यादा है. एयरलाइंस ने ये भी सवाल उठे हैं कि अभी एयरपोर्ट के कनेक्टिविटी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है. मेट्रो रैपिड रेल और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधा भी अभी तक निर्माणधीन है. ऐसे में ज्यादा शुल्क लेना यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए बेहतर नहीं है. इस पूरे मामले में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है. फिलहाल, अस्थाई शुल्क लागू है और अंतिम निर्णय एयरपोर्ट इकोनामिक रेगुलेटरी अथॉरिटी द्वारा लिया जाएगा. एयरपोर्ट प्रबंध का दावा है कि शुल्क देश के अन्य बड़े एयरपोर्ट के अनुरूप हैं और भविष्य में यात्रियों की सुविधा और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अभी इस पर काम किया जा रहा है.
15 जून से शुरू होंगी घरेलू उड़ानें
एयरपोर्ट प्रबंधन के मुताबिक, 15 जून से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से घरेलू उड़ाने शुरू होने जा रही हैं, जिसकी शुरुआत में बेंगलुरु मुंबई लखनऊ हैदराबाद और अन्य शहरों के लिए उड़ने संचालित की जा सकती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अभी यात्रियों को इंतजार करना होगा. बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का निर्माण कार्य अभी जारी है और इसे सितंबर तक पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ाने शुरू होंगी. वहीं, एक्सपर्ट कामना है कि दिल्ली नोएडा ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद और पश्चिम उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों के लिए एयरपोर्ट से बड़ी उम्मीद थी. लेकिन अगर टिकट किराया ज्यादा हुआ तो यात्रियों का रुझान वापस दिल्ली एयरपोर्ट की ओर जा सकता है. खासकर वो यात्री जो पहले से दिल्ली एयरपोर्ट के आसपास रहते हैं यह जिनके पास बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी है.





