नशे में देश की युवा पीढ़ी तबाह हो रही है. कई राज्य ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में है. देश का शायद ही कोई हिस्सा होगा, जहां नशे के कारोबारी सक्रिय न हों. इस मामले में असलियत और आंकड़ों में बहुत बड़ा अंतर है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के ड्रग से जुड़े जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उसके मुताबिक नशे के मामले में केरल टॉप पर है, जबकि पंजाब बदनाम राज्य है.

नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो ने हाल ही में साल 2024 के ताजा कुल आपराधिक आंकड़े जारी किये हैं. इसकी डिटेल आना बाकी है. मतलब यह कि किस मद में कितने मुकदमे दर्ज हुए, यह आना शेष है, पर इसी बहाने ड्रग की पड़ताल की तो पता चला कि बदनाम पंजाब कहीं नहीं ठहरता. केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्य आंकड़ों में टॉप टू पर हैं.
जुदाजुदा है पंजाब की तस्वीर
राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने एनसीआरबी के हवाले से जो राज्यवार आंकड़े दिए, उनके अनुसार साल 2022 में पंजाब में एनडीपीएस एक्ट 12,442 केस दर्ज हुए. हाँ, यह जरूर याद रखना चाहिए कि एनसीआरबी खुद अपनी रिपोर्ट में कहता है कि उसके आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों पर आधारित हैं.
यानी यह पूरी नशे की समस्या का अंतिम सच नहीं, बल्कि रिपोर्टेड तस्वीर है, जो राज्य पुलिस ने दर्ज किये हैं. रिपोर्ट यह भी कहती है कि राज्यों की तुलना बहुत सावधानी से करनी चाहिए, क्योंकि पुलिसिंग, रजिस्ट्रेशन और स्थानीय हालात हर राज्य के अलगअलग हो सकते हैं.
नशे के मामलों में टॉप पांच राज्य ये रहे
एनसीआरबी के मुताबिक, साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक देश के टॉप 5 राज्य कुछ यूं हैं.
- केरल: 26,619 केस
- महाराष्ट्र: 13,830 केस
- पंजाब: 12,442 केस
- उत्तर प्रदेश: 11,541 केस
- तमिलनाडु: 10,385 केस
इसके बाद राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्य आते हैं. गुजरात इस सूची में बहुत नीचे है. राज्यवार हिस्सेदारी देखें पता चलता है कि साल 2022 में एनडीपीएस एक्ट के कुल 1.15 लाख मामले दर्ज हुए, इनमें केरल का हिस्सा लगभग 23 फीसदी, महाराष्ट्र का करीब 12 फीसदी, पंजाब का करीब 11 फीसदी, उत्तर प्रदेश का करीब 10 फीसदी तथा तमिलनाडु का करीब नौ फीसदी बैठता है. यानी सिर्फ ये पांच राज्य मिलकर कुल मामलों का बड़ा हिस्सा बना देते हैं.
पंजाब और गुजरात की तस्वीर में इतना फर्क क्यों?
एनसीआरबी की रिपोर्ट पढ़ने पर कुछ बातें साफ समझ आती हैं. पहली बात, यह डेटा दर्ज मामलों का है.अगर किसी राज्य में पुलिस ज्यादा सक्रिय है, ज्यादा एफआईआर दर्ज हो रही हैं, या विशेष अभियान चल रहे हैं, तो मामलों की संख्या भी बढ़ सकती है. दूसरी बात, एनडीपीएस के तहत केस दो तरह के बड़े वर्गों में आते हैं. व्यक्तिगत खपत और तस्करी यानी सिर्फ तस्करी ही नहीं, सेवन या कब्जे के मामले भी इसमें जुड़ते हैं.
तीसरी बात, पंजाब लंबे समय से नशे पर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा रहा है. इस वजह से वहां कार्रवाई, जांच और केस रजिस्ट्रेशन पर ज्यादा ध्यान भी दिख सकता है. गुजरात का नाम अक्सर बड़े समुद्री जब्ती मामलों में आता है, लेकिन बड़े सीजर और राज्य में दर्ज एनडीपीएस केसों की संख्या हमेशा एक ही चीज नहीं होते.
मामलों में क्यों आया उछाल?
अब सबसे जरूरी हिस्सा पर चर्चा. ड्रग से जुड़े कुछ ऐसे आंकड़े, जो कहानी को और साफ करते हैं. साल 2022 में एनडीपीएस केसों में तेज उछाल आया. यह पुलिस की सतर्कता भी हो सकती है. या नशे में बढ़ोत्तरी भी हो सकती है. साल 2021 में देश भर में एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 78,331 केस दर्ज हुए थे. साल 2022 में यह बढ़कर अचानक 1.15 लाख से ज्यादा हो गए यानी सिर्फ एक साल में करीब 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. यह बहुत बड़ा उछाल है.
व्यक्तिगत सेवन बनाम ड्रग तस्करी
प्रेस इनफॉर्मेशन ब्यूरो की ओर से जारी NCRB के आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में व्यक्तिगत नशे के जो मामले दर्ज हुए उनकी संख्या 77,172 रही तथा ड्रग तस्करी के मामले 38 हजार से ज्यादा दर्ज हुए यानी कुल मामलों में सेवन या निजी उपयोग से जुड़े केस ज्यादा हैं. यह बताता है कि समस्या सिर्फ सप्लाई की नहीं, डिमांड की भी है. साल 2021 में नशे के व्यक्तिगत मामले सिर्फ 46,029 दर्ज हुए जबकि अगले साल यही नंबर बढ़कर 77,172 हो गए यानी करीब 68 फीसदी की बढ़ोतरी. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ये आंकड़े निश्चित तौर पर चिंताजनक है. इससे पता चलता है कि नशे की पकड़ सिर्फ तस्करों तक सीमित नहीं है.
उपभोक्ता स्तर पर भी समस्या फैल रही है. साल 2021 में ड्रग तस्करी के मामले 32,302 थे जो अगले साल यानी साल 2022 में बढ़कर 38,064 हो गए यानी करीब 18 प्रतिशत की बढ़त.
साल 2022 में 1.45 लाख लोग हुए गिरफ्तार
साल 2022 में एनडीपीएस मामलों में 1,44,812 लोगों की गिरफ्तारी हुई. साल 2021 में यह संख्या 1,07,808 थी यानी एक साल में गिरफ्तारियों में भी करीब 34 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. जब्ती में गांजा सबसे ज्यादा रहा. साल 2022 में 17,11,916 किलोग्राम केवल गाँजा जब्त किया गया. नशीले पदार्थों की कुल जब्ती 17,16,700 किलोग्राम रही. यह दिखाता है कि मात्रा के हिसाब से गांजा अब भी बहुत बड़ा हिस्सा रखता है.
चौंकाती है पोस्ता छिलका, हेरोइन की मात्रा
साल 2022 में पोस्ता छिलका और हेरोइन की बरामद मात्रा चौंकाती है. यह बताने को पर्याप्त है कि नशे का कारोबार और कारोबारी देश की युवा पीढ़ी को नशे के गिरफ्त में लेने को आमादा हैं. इस दौरान 3,18,701 किलोग्राम से ज्यादा पोस्ता छिलका, 4,798 किलोग्राम हेरोइन तथा 1,209 किलोग्राम मार्फीन बरामद हुई है. हेरोइन की मात्रा गांजे जितनी नहीं है, लेकिन इसका अपराध और तस्करी नेटवर्क पर असर कहीं ज्यादा गंभीर माना जाता है.
कोकीन की मात्रा कम, लेकिन महत्व बड़ा
साल 2022 में कोकीन की जब्ती सिर्फ 71.82 किलोग्राम दर्ज की गई है. वजन में यह कम लग सकती है लेकिन इसकी बाजार कीमत और नेटवर्क वैल्यू बहुत ज्यादा होती है.
NCRB के आंकड़े पढ़ते समय बरतें सावधानी
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डेटा पुलिस रिकॉर्डेड अपराधों पर आधारित है. एक एफआईआर में कई अपराध हों तो प्रिंसिपल अफेन्स नियम लागू होता है. सामाजिक और आर्थिक कारण रिपोर्ट में नहीं पकड़े जाते. राज्यों की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है यानी ज्यादा केस का मतलब हमेशा यह नहीं कि वही राज्य सबसे ज्यादा असुरक्षित है, जहां मामले ज्यादा दर्ज हुए हैं या जब्ती ज्यादा हुई है. कई बार इसका मतलब यह भी हो सकता है कि वहां रजिस्ट्रेशन बेहतर है या कार्रवाई अधिक है.





