कच्चे तेल की मार, शेयर बाजार में हाहाकार: निवेशकों के डूबे 6 लाख करोड़​

भारतीय शेयर बाजार सोमवार, 11 मई को लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ. कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में हर तरफ बिकवाली देखने को मिली. 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,313 अंक या 1.70 फीसदी गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ, जबकि NSE का निफ्टी 50 1.50 फीसदी गिरकर 23,815.85 पर बंद हुआ. BSE 150 मिडकैप और 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 1.26 फीसदी और 0.96 फीसदी की गिरावट आई.

कच्चे तेल की मार, शेयर बाजार में हाहाकार: निवेशकों के डूबे 6 लाख करोड़​

BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन पिछले सत्र के 473.5 लाख करोड़ से गिरकर लगभग 467.5 लाख करोड़ रुपए पर आ गया, जिससे निवेशकों को एक ही सत्र में 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. महज तीन सत्रों में, सेंसेक्स 1,973 अंक या 2.5 फीसदी गिर गया है, जबकि निफ़्टी 50 में 2.1 फीसदी की गिरावट आई है. मासिक आधार पर, अप्रैल में 7 फीसदी की शानदार बढ़त के बाद, इस महीने ये इंडेक्स नकारात्मक दायरे में चले गए हैं.

वैसे इस गिरावट के पीछे कई कारण मानें जा रहे हैं. सबसे बड़ा कारण है कच्चे तेल की कीमतें. इसमें लगातार तेजी देखने को मिल रही है. सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला है. वहीं दूसरी ओर रुपए में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है. रुपया डॉलर के सामने 85 पैसे गिरकर बंद हुआ है. वहीं दूसरी ओर अभी तक ईरान वॉर का कोई हल नहीं निकल सका है. ट्रंप ने ईरान के प्रपोजल को मानने से इनकार कर दिया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण कौन से हैं…

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड, जो वैश्विक तेल का बेंचमार्क है, 4.32 प्रतिशत बढ़कर 105.7 USD प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. एनरिच मनी के CEO, पोनमुडी आर ने कहा कि नई चिंताएं तब सामने आईं जब डोनाल्ड ट्रम्प ने कथित तौर पर अमेरिका के फ्रेश शांति प्रस्ताव पर ईरान की प्रतिक्रिया को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताते हुए खारिज कर दिया, जिससे तत्काल कूटनीतिक सफलता की उम्मीदें धूमिल हो गईं. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और ग्लोबल एनर्जी मार्केट्स में सप्लाई में बाधा के व्यापक जोखिमों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

कमजोर विदेशी शेयर बाजार

जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे, जबकि अमेरिकी बाजार के वायदा संकेत वॉल स्ट्रीट के लिए कमजोर शुरुआत का इशारा कर रहे थे. जिसका असर भी भारत के शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में दिखाई दिया.

रुपए में भारी गिरावट

रुपया दबाव में आ गया और शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 139 पैसे गिरकर 94.90 पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और विदेशी फंडों का लगातार बाहर जाना घरेलू मुद्रा पर भारी पड़ा. इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में, रुपया डॉलर के मुकाबले 94.97 पर खुला और बाद में अपनी पिछली बंद कीमत के मुकाबले मामूली सुधार के साथ 94.90 पर पहुंच गया. वैसे ताजा जानकारी के अनुसार डॉलर के मुकाबले में रुपए में 85 पैसे की गिरावट देखने को मिली है.

FII की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को 4,110.60 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. FII की लगातार बिकवाली घरेलू बाजारों पर असर डालती है, क्योंकि इससे पूंजी का आउटफ्लो होता है और निवेशकों का भरोसा कमजोर होता है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार, वीके विजयकुमार ने कहा कि इस महीने भी FPI के बाहर जाने का सिलसिला जारी है. 8 मई तक, FPIs ने द्वितीयक बाजारों के माध्यम से 14,232 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं. इससे 2026 में अब तक एक्सचेंजों के माध्यम से FPI की कुल बिकवाली का आंकड़ा बढ़कर 2,18,540 करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने आगे कहा कि करेंसी में गिरावट और भारत में कमाई में वृद्धि से जुड़ी चिंताएं इस साल भारत से FPI के बाहर जाने के प्रमुख कारक रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत की अपील

कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत की अपील का भी बाज़ार के मूड पर असर पड़ा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच, रविवार को PM ने भारतीयों से पेट्रोल, गैस, डीजल और ऐसी ही चीजों का बहुत सोचसमझकर इस्तेमाल करने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ़ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट, VK विजयकुमार ने कहा कि मुझे लगता है कि आज बाज़ार पर ईरान संकट के हल न होने के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बचत की अपील का ज्यादा असर पड़ा है. प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल, डीज़ल, सोना और यहां तक कि विदेश यात्रा पर भी खर्च कम करने की अपील की. ​​संक्षेप में कहें तो, यह बचत की अपील है.

USईरान बातचीत में रुकावट

US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करके उसे ‘अस्वीकार्य’ बताने के बाद, USईरान बातचीत की उम्मीदें खत्म हो गईं. फॉक्स न्यूज के अनुसार, विश्लेषकों का मानना ​​है कि USईरान बातचीत के असफल होने पर वॉशिंगटन तेहरान की सैन्य क्षमताओं को तेजी से कमजोर कर सकता है. इस बीच, खबरों के मुताबिक ट्रंप ने कहा है कि US तेहरान के बचे हुए एनरिच्ड यूरेनियम को ज़ब्त करने के अपने इरादे पर कायम है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हाल के सैन्य अभियानों के बावजूद ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी एक अनसुलझा खतरा बना हुआ है.

India VIX में उछाल

India VIX, जिसे बाजार का ‘डर का पैमाना’ माना जाता है, 12 प्रतिशत बढ़कर 18.82 पर पहुंच गया. वोलैटिलिटी इंडेक्स में इस उछाल से पता चलता है कि निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है और बाज़ार में बड़े उतारचढ़ाव की उम्मीदें बढ़ गई हैं.

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