कांस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत 12 मई से हो गई है जो 23 मई तक चलेगा. यह महत्वपूर्ण समारोह फ्रांस के कांस शहर के पैलेस डेस फेस्टिवल्स में आयोजित हो रहा है. दक्षिण कोरियाई फिल्म निर्माता पार्क चानवूक इस बार जूरी के अध्यक्ष हैं. पियरे साल्वा डोरी की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ला वेनस इलेक्ट्रिक के वर्ल्ड प्रीमियर के साथ इस मशहूर आयोजन की शुरुआत हुई. आइए, इसी बहाने जानते हैं कि आखिर फिल्म फेस्टिवल के लिए फ्रांस के कांस शहर को ही क्यों चुना गया? इसकी शुरुआत कैसे हुई?

फ्रांस में कई शहर सुंदर हैं. पर, कांस सिर्फ एक शहर नहीं है. यहां एक खास माहौल है. समुद्र है. धूप है. आराम है. और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए अनेक सुविधाएं हैं. इसी वजह से कान्स फिल्म फेस्टिवल दुनिया का सबसे चर्चित फिल्म समारोह बन चुका है.
कांस को ही क्यों चुना गया?
कांस फ्रांस के दक्षिण में है. यह फ्रेंच रिविएरा का हिस्सा है. यह इलाका पहले से ही अमीर पर्यटकों में लोकप्रिय था. दुनिया भर से लोग यहां आते रहे हैं. यहां का वातावरण फिल्म समारोह के लिए अनुकूल था. कांस को चुनने के पीछे कुछ सीधे कारण थे.
1 मौसम और प्राकृतिक सुंदरता
कांस में मौसम अक्सर साफ रहता है. खासकर वसंत और शुरुआती गर्मियों में. यही समय फिल्म फेस्टिवल के लिए चुना गया. बारिश कम होती है. ठंड भी ज्यादा नहीं होती. समुद्र किनारे का दृश्य बहुत आकर्षक लगता है. मेहमानों को घूमने के विकल्प मिलते हैं. मीडिया को सुंदर लोकेशन मिलती है. यह सब फेस्टिवल की चमक बढ़ाता है.
कांस शहर की खूबसूरती.
2 पर्यटन शहर और पहले से मौजूद सुविधाएं
कांस पहले से एक पर्यटन शहर था. यहां अच्छे होटल थे. बड़े हॉल थे. कैफे और रेस्टोरेंट थे. फिल्म समारोह में हजारों लोग आते हैं. रहने और आनेजाने की सुविधा जरूरी होती है. कांस इस जरूरत पर खरा उतरता था.
3 अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक आसान पहुंच
कांस के पास बड़े शहर और ट्रांसपोर्ट लिंक हैं. पास में नाइस का एयरपोर्ट है. रेलवे कनेक्शन भी अच्छे हैं. उस समय भी मेहमानों को यहां पहुंचाना तुलनात्मक रूप से आसान माना गया. यह चयन का एक और बड़ा कारण बना.
4 ग्लैमर और रिविएरा वाली पहचान
फेस्टिवल केवल फिल्मों का आयोजन नहीं होता. यह एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भी होता है. इसमें फैशन, फोटो, इंटरव्यू, रेड कार्पेट, और पार्टियां शामिल होती हैं. कांस की छवि पहले से ही लक्जरी और हॉलिडे वाली थी. इसलिए यह शहर फेस्टिवल की पहचान के साथ जल्दी जुड़ गया.
कांस के पास बड़े शहर और ट्रांसपोर्ट लिंक हैं.
फेस्टिवल की शुरुआत का आइडिया कैसे आया?
कांस फिल्म फेस्टिवल का विचार अचानक नहीं आया. इसके पीछे उस दौर की राजनीति और संस्कृति दोनों थीं. 1930 के दशक में यूरोप में फिल्म समारोह पहले भी होते थे. सबसे बड़ा नाम वेनिस फिल्म फेस्टिवल का था. लेकिन धीरेधीरे यह आरोप लगने लगे कि वहां पुरस्कार और चयन पर राजनीति का असर है. उस समय यूरोप में तनाव बढ़ रहा था. कई देश प्रचार और प्रभाव के लिए कला का इस्तेमाल कर रहे थे. फ्रांस के कई लोगों को लगा कि एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह होना चाहिए जो ज्यादा स्वतंत्र हो. इसी सोच ने फ्रांस में एक नए फेस्टिवल की मांग पैदा की. यह फेस्टिवल दुनिया भर के सिनेमा को निष्पक्ष मंच दे सके. और किसी एक सत्ता के दबाव में न चले.
कांस में मौसम अक्सर साफ रहता है.
कब हुई शुरुआत?
फेस्टिवल की पहली योजना 1939 में बनी. उसी साल इसे शुरू करने की तैयारी हुई. कांस को स्थान के रूप में चुना गया. मेहमानों को बुलाया गया. फिल्मों का चयन भी होने लगा. लेकिन तभी दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। युद्ध के कारण आयोजन रुक गया. इसलिए कहा जा सकता है कि घोषणा और तैयारी 1939 में हुई. पर, नियमित शुरुआत तब नहीं हो पाई.
वास्तविक पहला फेस्टिवल कब हुआ?
युद्ध खत्म होने के बाद फ्रांस ने फिर से यह विचार आगे बढ़ाया. अंततः 1946 में कांस में पहला वास्तविक अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल हुआ. युद्ध के बाद दुनिया एक नई दिशा खोज रही थी. सांस्कृतिक मेलजोल की जरूरत थी. फिल्मों के जरिए देशों के बीच संवाद संभव था. इस माहौल में कांस फेस्टिवल का जन्म एक उम्मीद की तरह हुआ. यह केवल मनोरंजन नहीं था. यह सांस्कृतिक संबंधों की शुरुआत भी थी.
चुनौतियां भी कम न थीं
शुरुआत में सब कुछ आसान नहीं था. युद्ध के बाद संसाधन सीमित थे. आयोजन के लिए धन और व्यवस्थाएं जुटानी थीं. कई बार कार्यक्रम स्थगित भी हुए. कभी आर्थिक कारणों से. कभी संगठनात्मक कारणों से. फिर भी कांस ने धीरेधीरे अपनी जगह बनाई. क्योंकि इसके पीछे एक स्पष्ट लक्ष्य था. दुनिया की अच्छी फिल्मों को मंच देना.
कांस फिल्म फेस्टिवल में पहुंचीं आलिया भट्ट.
कांस ने अपनी अलग पहचान कैसे बनाई?
कांस फेस्टिवल ने कुछ बातों पर खास ध्यान दिया. यही बातें इसे अलग बनाती हैं.
- चयन की प्रतिष्ठा: कांस में चुनी गई फिल्मों को सम्मान माना जाता है. यहां चयन प्रक्रिया कड़ी मानी जाती है. फेस्टिवल में कई सेक्शन होते हैं. कुछ मुख्य प्रतियोगिता में. कुछ विशेष प्रदर्शन में. इससे अलगअलग प्रकार की फिल्मों को जगह मिलती है.
- कांस का सर्वोच्च पुरस्कार: कांस का सबसे प्रसिद्ध पुरस्कार पाम डीओर है. यह पुरस्कार समय के साथ फेस्टिवल की पहचान बन गया. यह सम्मान मिलने पर फिल्म को वैश्विक ध्यान मिलता है. निर्देशक और कलाकारों के करियर पर भी असर पड़ता है.
- बाजार और उद्योग का केंद्र: कांस केवल पुरस्कार समारोह नहीं है. यह फिल्म उद्योग का बड़ा मिलन स्थल भी है. यहां डील होती हैं. वितरक मिलते हैं. नए प्रोजेक्ट पर बातचीत होती है. इस व्यावसायिक भूमिका ने भी कांस को मजबूत बनाया.
- रेड कार्पेट और मीडिया की ताकत: कांस का रेड कार्पेट विश्व प्रसिद्ध है. यहां की तस्वीरें दुनिया भर में छपती हैं. मीडिया की मौजूदगी फेस्टिवल को हर साल चर्चा में रखती है. कांस ने इस आकर्षण को अपनी ब्रांडिंग का हिस्सा बना लिया.
कांस फिल्म फेस्टिवल में ऐश्वर्या राय बच्चन.
कांस शहर को इससे क्या मिला?
कांस शहर को फेस्टिवल से आर्थिक लाभ हुआ. पर्यटन बढ़ा. होटल, रेस्तरां, टैक्सी, दुकानों को काम मिला. शहर की वैश्विक पहचान बनी. फेस्टिवल के दिनों में कांस एक वैश्विक मंच में बदल जाता है. इससे शहर की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है.
इस तरह कहा जा सकता है कि फ्रांस में फिल्म फेस्टिवल के लिए कांस का चयन कई वजहों से हुआ. मौसम अनुकूल था. शहर सुंदर था. सुविधाएं मौजूद थीं. अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए पहुंच आसान थी. और रिविएरा की चमक फेस्टिवल के साथ फिट बैठती थी. शुरुआती विचार 1939 में बना. लेकिन विश्व युद्ध के कारण आयोजन रुक गया. वास्तविक पहला आयोजन 1946 में हुआ. इसके बाद कांस ने धीरेधीरे दुनिया के सबसे प्रभावशाली फिल्म समारोहों में जगह बना ली. आज भी कांस का नाम आते ही सिनेमा की कला, प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय आकर्षण एक साथ याद आते हैं.





