46 साल पुराने प्रयागराज कचहरी हत्याकांड मामले में पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को 13 मई 2026 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. कोर्ट ने उनके साथ तीन अन्य आरोपियों को भी दोषी मानते हुए सख्त सजा दी. यह मामला 1980 में कोर्ट परिसर में हुई गोलीबारी और हत्या से जुड़ा था. विजय मिश्रा लंबे समय तक पूर्वांचल की राजनीति और अपराध जगत का चर्चित चेहरा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत से जुड़े सबसे चर्चित नामों में शामिल पूर्व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा को आखिरकार 46 साल पुराने हत्याकांड में उम्रकैद की सजा मिल गई. प्रयागराज की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में विजय मिश्रा समेत चार आरोपियों को दोषी मानते हुए कठोर आजीवन कारावास सुनाया. फैसले के बाद एक बार फिर यूपी की राजनीति, माफिया नेटवर्क और बाहुबलियों के इतिहास पर बहस तेज हो गई है.
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ज्ञानपुर सीट से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा लंबे समय से हत्या, रंगदारी, गैंगस्टर और अपहरण जैसे गंभीर मामलों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. कोर्ट ने इस फैसले के जरिए साफ मैसेज दिया है कि चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो? कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है.
क्या था विजय मिश्रा का 46 साल पुराना मामला?
यह मामला 11 फरवरी 1980 का है. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र प्रकाश नारायण पांडेय जिला अदालत परिसर में जमानत के सिलसिले में पहुंचे थे. आरोप है कि पुरानी रंजिश के चलते विजय मिश्रा अपने साथियों जीत नारायण, संतराम और बलराम के साथ वहां पहुंचे और कोर्ट परिसर में ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले में 35 वर्षीय प्रकाश नारायण पांडेय की मौके पर मौत हो गई, जबकि पांच अन्य लोग घायल हो गए थे. घटना के बाद मृतक के भाई श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में FIR दर्ज कराई थी.
कोर्ट ने विजय मिश्रा समेत चारों आरोपियों को क्या सजा सुनाई?
विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तिवारी ने विजय मिश्रा, जीत नारायण, संतराम मिश्रा और बलराम मिश्रा को हत्या का दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अदालत ने सभी दोषियों पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया. वहीं IPC की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास के मामले में 10 साल अतिरिक्त सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका गया.
पूर्व विधायक विजय मिश्रा की कुंडली पर एक नजर
निषाद पार्टी से विजय मिश्रा भदोही जिले के ज्ञानपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रह चुके हैं. पूर्वांचल की राजनीति में उनका नाम लंबे समय तक दबदबे, बाहुबल और विवादों के लिए जाना जाता रहा. उन पर हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, गैंगस्टर एक्ट, शस्त्र अधिनियम, खनन माफिया गतिविधियों और रंगदारी समेत 77 से ज्यादा मुकदमे दर्ज रहे हैं. प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर और मेरठ तक उनके खिलाफ कई गंभीर केस दर्ज हैं. हालांकि कुछ मामलों में उन्हें राहत भी मिली, कई में फाइनल रिपोर्ट लगी और कई मुकदमे अब भी अदालतों में लंबित हैं.
क्या इस केस की फाइल भी गायब कर दी गई थी?
इस हाई-प्रोफाइल केस की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मामले की पत्रावली तक गायब कर दी गई थी. आरोप लगे कि प्रभावशाली लोगों ने आरोपियों को बचाने के लिए केस को कमजोर करने की कोशिश की. करीब चार दशक तक यह मामला अदालतों में चलता रहा, लेकिन आखिरकार सरकारी पक्ष की मजबूत पैरवी के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया.
फिलहाल विजय मिश्रा कहां है?
विजय मिश्रा फिलहाल आगरा जेल में बंद है. वह पहले से कई मामलों में दोषसिद्ध हो चुका है. एक चर्चित सिंगर से दुष्कर्म केस समेत अन्य गंभीर मामलों में भी उसे सजा मिल चुकी है. बताया जाता है कि यूपी सरकार पहले ही विजय मिश्रा की एक अरब रुपये से ज्यादा की चल और अचल संपत्तियां कुर्क कर चुकी है. सरकार ने उन्हें ‘सफेदपोश माफिया’ की श्रेणी में चिन्हित किया हुआ है.
विजय मिश्रा के खिलाफ कौन-कौन से बड़े केस दर्ज हैं?
विजय मिश्रा पर जिन मामलों में केस दर्ज रहे, उनमें शामिल हैं-
- हत्या
- हत्या का प्रयास
- गैंगस्टर एक्ट
- अपहरण
- शस्त्र अधिनियम
- खनन माफिया गतिविधियां
- रंगदारी और धमकी
- गुंडा एक्ट
उनके खिलाफ प्रयागराज, भदोही, वाराणसी, मिर्जापुर, मेरठ और हावड़ा तक मुकदमे दर्ज रहे हैं.





