पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही धड़ाम हुए तेल कंपनियों के शेयर, आखिर निवेशकों ने क्यों निकाला पैसा?​

भारत की सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों को लंबे समय बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से भी ज्यादा राहत मिलती नहीं दिख रही है. करीब 2022 के बाद पहली बार पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर ₹3 तक की बढ़ोतरी की गई, लेकिन बाजार की प्रतिक्रिया उलटी रही. कीमत बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियों के शेयर टूट गए और निवेशकों की चिंता बढ़ गई.

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही धड़ाम हुए तेल कंपनियों के शेयर, आखिर निवेशकों ने क्यों निकाला पैसा?​

शुक्रवार को कीमतें बढ़ने के बाद HPCL और BPCL के शेयर करीब 3% तक गिर गए. मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को लगने लगा कि केवल ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी तेजी से बढ़ रहे नुकसान को संभालने के लिए काफी नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और फिलहाल ईरानअमेरिका युद्ध खत्म होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं.

कंपनियों को रोजाना इतना नुकसान

ET की रिपोर्ट में रेटिंग एजेंसी ICRA के हवाले से दावा किया गया है कि पेट्रोल और डीजल में की गई यह छोटी बढ़ोतरी तेल कंपनियों को सीमित राहत ही देगी. उनका अनुमान है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 105110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती है, तो तेल कंपनियों को रोजाना लगभग ₹500 करोड़ का नुकसान हो सकता है. इसमें ऑटो फ्यूल और घरेलू LPG बिक्री दोनों शामिल हैं. दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर हो गया है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी मौजूदा घाटे की तुलना में बहुत कम है.

क्या और महंगा होगा पेट्रोलडीजल?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा क्रूड ऑयल कीमतों पर कंपनियों को प्रति लीटर ₹1718 तक का घाटा हो रहा है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। इसका सीधा मतलब है कि तेल कंपनियों को एक तिमाही में ₹57,000 करोड़ से ₹58,000 करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है. इस घाटे को पूरा करने के लिए कम से कम ₹10 प्रति लीटर तक कीमत बढ़ाने की जरूरत हो सकती है. यह बढ़ोतरी एक बार में या 23 सप्ताह में धीरेधीरे की जा सकती है. इसका असर आम जनता पर भी पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है. साफ शब्दों में कहें तो जो ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, वह जरूरत की तुलना में बहुत कम मानी जा रही है. इसी वजह से बाजार में निराशा देखने को मिली.

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी

इरान युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव है. फरवरी में ब्रेंट क्रूड लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल था, जो बढ़कर 120 डॉलर तक पहुंच गया था. फिलहाल इसकी कीमत करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है. अमेरिकाइजराइलईरान तनाव और तेल सप्लाई को लेकर चिंता ने बाजार को अस्थिर बना दिया है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा. ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे, जिससे रोजमर्रा के सामान और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं. इसका सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ेगा.

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