राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में चुनावी धोखाधड़ी रोकने के लिए भारतीय वोटर आईडी की वकालत की है. ट्रंप ने हर वोटर के लिए वोटर आईडी अनिवार्य करने की बात कही है. भारत में मतदान करने वाले मतदाताओं के लिए वैध फोटो पहचान दस्तावेज की व्यवस्था है, लेकिन अमेरिका में इसको लेकर राज्यों में अलगअलग नियम हैं. अमेरिका में भारत, मेक्सिको या यूरोप जैसा कोई सेंट्रल नेशनल आईडी सिस्टम या वोटर आईडी व्यवस्था नहीं है.

अमेरिका में राज्य मतदाता की पहचान के नियम खुद तय करते हैं. यही वजह है कि यहां इसको लेकर नेशनल सिस्टम नहीं है. यहां के कुछ राज्य मतदान के लिए फोटो आईडी अनिवार्य करते हैं तो कुछ राज्य दूसरे नियम अपनाते हैं. अब सवाल है कि अमेरिका में चुनाव के लिए मतदाता की पहचान का सिस्टम कैसा है और दूसरे देशों में वोटर आईडी को लेकर क्या नियम है?

अमेरिका में कैसे होती है मतदाता की पहचान?

अमेरिका में आमतौर पर चुनाव के दौरान मतदाता की पहचान के लिए तीन नियम तय हैं. यह राज्यों के हिसाब से बदलते हैं.

  • पहला: कई राज्यों में मतदान के लिए फोटो आईडी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या स्टेट आईडी को प्रूफ के तौर पर पर इस्तेमाल किया जाता है.
  • दूसरा: कुछ राज्य गैरफोटो आईडी भी स्वीकार करते हैं. जैसे यूटिलिटी बिल, बैंक स्टेटमेंट जिसमें नामपता हो. इससे उनकी पहचान की पुष्टि होती है.
  • तीसरा: कई राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में पोलिंग बूथ पर कोई आईडी मांगी ही नहीं जाती, वहां पहचान की पुष्टि हस्ताक्षर मिलान या पहले से मौजूद रिकॉर्ड्स के जरिए होती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

यूरोप से जापान तक कैसे होती है मतदाता की पहचान?

  • यूरोपीय देश: यूरोपीय देशों में से सिर्फ एक को छोड़कर बाकी सभी में वोट डालने के लिए सरकार द्वारा जारी फोटो वोटर आईडी दिखाना अनिवार्य है. ब्रिटेन इसका अपवाद रहा है, लेकिन अब यह भी आईडी की अनिवार्यता की तरफ बढ़ा है.
  • मेक्सिको: यहां हर 18 साल से अधिक उम्र के नागरिकों नेशनल इलेक्टोरल इंस्टीट्यूट की तरफ से “वोटर क्रेडेंशियल” कार्ड मिलता है. इसमें फोटो के साथ फिंगरप्रिंट बायोमेट्रिक्स और तीन QR कोड होते है. चुनाव के अलावा यह कार्ड बैंकिंग और यात्रा जैसे कामों में भी पहचान पत्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
  • ब्रिटेन : यह उन गिनेचुने विकसित लोकतंत्रों वाले देशों में रहा है जहां पहले फोटो आईडी अनिवार्य नहीं थी, लेकिन पिछले कुछ सालों में ब्रिटेन भी फोटोआईडी अनिवार्यता की तरफ बढ़ा है.
  • जापान: यहां दूसरे देशों जैसा फोटो आईडी सिस्टम नहीं है. जापान में मतदान के लिए वोटर्स को ईमेल पर वोटिंग प्लेस एंटेंस टिकट भेजा जाता है. पोलिंग सेंटर पर वोटर मेल किया हुआ टिकट दिखाता है. ऑफिसर टिकट स्कैन करके उसकी जांच करता है. अगर वोटर को मेल पर पोलिंग एंट्रेंस टिकट नहीं मिलता है तो बायोमेट्रिक के जरिए उनकी पहचान की पुष्टि की जाती है.
  • चीन: यहां मतदान के लिए रेजिडेंट आईडी का इस्तेमाल किया जाता है. इसे ही पूरे देश में स्टैंडर्ड नेशनल आईडी के तौर पर पहचान मिली हुई है. इसमें मतदाता की जानकारी के साथ उनका बायोमेट्रिक डाटा समेत कई जानकारियां होती हैं. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। हर बार चुनाव से पहले लोकल इलेक्शन कमेटी सोसायटी में जानती है और वोटर के डाटाबेस को अपडेट करती है.

भारतीय वोटर आईडी कार्ड.

भारत का सिस्टम कितना पुराना?

भारत का वोटर आईडी सिस्टम दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने डेमोक्रेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम्स में से एक माना जाता है. भारत में मतदाता सूची की शुरुआत 195152 के पहले आम चुनाव से ही हो गई थी, लेकिन उस वक्त फोटो पहचान पत्र नहीं होता था. सिर्फ मतदाता सूची में नाम दर्ज होता था और उसी आधार पर वोट डाला जाता था. फोटो पहचान पत्र यानी EPIC की शुरुआत 1993 में हुई, जब चुनाव आयोग ने पूरे देश में फोटो वोटर आईडी कार्ड जारी करना शुरू किया.

वोटर आईडी कार्ड भारत का निर्वाचन आयोग जारी करता है. यह आधिकारिक पहचान पत्र है, जिसमें वोटर की फोटो, नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, पता और एक यूनीक 10अंकों/अक्षरों का EPIC नंबर होता है.