आज के समय में हाई यूरिक एसिड की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यूरिक एसिड एक टॉक्सिक पदार्थ है, जो शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने पर बनता है. सामान्य परिस्थितियों में यह किडनी के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाता है. जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक बनने लगे या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए, तो इसका स्तर बढ़ सकता है.
ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जानें इसे कंट्रोल करने के लिए क्या खाएं" loading="lazy" />इसके पीछे प्यूरीन से भरपूर भोजन, पानी कम पीना, , शराब का सेवन, कुछ दवाएं और किडनी से जुड़ी समस्याएं कारण बन सकती हैं. जब इसका स्तर सामान्य सीमा से ऊपर चला जाता है, तो जोड़ों में दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याएं होने लगती हैं. लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर किडनी पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि यूरिक एसिड कितना होने पर बढ़ा हुआ माना जाता है और इसे कंट्रोल करने के लिए क्या खाना चाहिए.
यूरिक एसिड कितना होने पर बढ़ा हुआ माना जाता है?
आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि बताते हैं कि आमतौर पर पुरुषों में 7 mg/dL से अधिक और महिलाओं में 6 mg/dL से अधिक यूरिक एसिड स्तर को बढ़ा हुआ माना जा सकता है. हालांकि सामान्य सीमा अलगअलग लैब और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार थोड़ी बदल सकती है. इसलिए रिपोर्ट की सही व्याख्या डॉक्टर की सलाह से करनी चाहिए.
अगर यूरिक एसिड लगातार बढ़ा रहे, तो जोड़ों में दर्द, खासकर पैर के अंगूठे, टखनों और घुटनों में सूजन की समस्या हो सकती है. कुछ लोगों में बारबार पथरी बनने या किडनी पर असर पड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए नियमित जांच और समय पर कंट्रोल जरूरी है.
हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए क्या खाएं?
यूरिक एसिड को कंट्रोल रखने के लिए अधिक पानी पीना बेहद जरूरी है. ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम फैट वाले दूध व दही जैसी चीजें फायदेमंद हो सकती हैं. विटामिन सी से भरपूर फल जैसे संतरा और आंवला भी मदद कर सकते हैं.
चेरी, खीरा और लौकी जैसे हल्की चीजें भी कई लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती हैं. संतुलित डाइट अपनाने से यूरिक एसिड को कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है.
किन आदतों से यूरिक एसिड को कंट्रोल रखने में मदद मिलती है?
वजन कंट्रोल रखें, नियमित व्यायाम करें और पूरे दिन पर्याप्त पानी पिएं. शराब, मीठे पेय और अत्यधिक प्यूरीन वाली चीजों का सेवन सीमित करें. समयसमय पर जांच कराते रहें और अगर डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे नियमित रूप से लें. स्वस्थ लाइफस्टाइल लंबे समय तक बेहतर कंट्रोल में मदद करती है.





