छत्तीसगढ: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नेतानार गांव में ‘जन जन सुविधा केंद्र’ मॉडल का उद्घाटन किया। यह कदम बस्तर के इतिहास में एक बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक बदलाव लेकर आया है, क्योंकि साल 2013 से संचालित एक सुरक्षा चौकी को अब आधिकारिक तौर पर स्थानीय आदिवासी समुदाय की भलाई और सेवा के लिए एक समर्पित केंद्र में बदल दिया गया है।

इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने स्थानीय नागरिकों को भरोसा दिलाते हुए कहा, “आज का दिन सचमुच ऐतिहासिक है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आगामी छह महीनों के भीतर यह केंद्र, जो अभी केवल एक सरकारी पहल दिख रहा है, स्थानीय आदिवासियों की चहलपहल, उपस्थिति और मुस्कान से जीवंत हो उठेगा। यह भूमि भारत के हर नागरिक के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल है, क्योंकि यह अमर शहीद वीर गुंडा धुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि है। आज उनसे प्रेरणा लेते हुए नेतानार कैंप को जनकल्याण के केंद्र के रूप में समर्पित किया जा रहा है।”
‘नियाद नेल्लानार’ योजना से बदलेगी बस्तर की तस्वीर
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नियाद नेल्लानार’ योजना के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प का मतलब केवल सुरक्षा बल तैनात करना नहीं है, बल्कि इस सुदूर अंचल के गरीब आदिवासियों तक बड़े शहरों जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना है।
गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्री केदार कश्यप के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस योजना के तहत अब हर गांव में राशन की दुकानें और प्राथमिक स्कूल खोले जा रहे हैं। हर गरीब परिवार के घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की मुहिम तेज गति से चल रही है। इसके साथ ही, स्थानीय निवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर राशन कार्ड और अन्य आवश्यक सरकारी पहचान पत्र जारी किए जा रहे हैं।
पुनर्वास और रोजगार का नया रोडमैप
स्थानीय युवाओं के विकास का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने बताया कि भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर क्षेत्र के करीब 3,000 युवाओं और महिलाओं के पुनर्वास के लिए एक विशेष कार्यक्रम चला रही हैं। इनमें से जो लोग पूरी तरह अनपढ़ हैं, उन्हें साक्षर बनाने के लिए आरएसएस के स्वयंसेवक शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से पढ़नालिखना सिखा रहे हैं।
अमित शाह ने क्षेत्र के आर्थिक विकास का खाका खींचते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट निर्देश है कि नक्सलवाद का प्रभाव कम होने के बाद भी हमें शांत नहीं बैठना है। नक्सलवाद का वास्तविक अंत तभी होगा जब हम अगले 5 वर्षों में इन सभी प्रभावित गांवों को खुशहाल और ऊर्जावान आदिवासी समुदायों में बदल देंगे। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। आने वाले समय में डेयरी सेक्टर और वनोपज मिलकर यहां स्थानीय रोजगार के नए और बड़े अवसर पैदा करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही देश को आजादी वर्षों पहले मिल गई थी, लेकिन बस्तर के दुर्गम इलाकों के लिए विकास और वास्तविक स्वतंत्रता की नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है और दोनों सरकारें इस क्षेत्र के चहुंमुखी विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।





