किसान परिवार का बेटा, एक्टिंग की खातिर केमिस्ट की नौकरी छोड़कर बना चौकीदार, 13 साल संघर्ष के बाद चमकी किस्मत​

हिंदी सिनेमा में ऐसे कई स्टार हैं, जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री में पहचान हासिल करने में सालों लग गए। किसी ने 5 साल तो किसी ने 15 साल एड़ियां रगड़ीं, तब कहीं जाकर अपनी पहचान बनाने में सफलता मिल पाई। नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी इन्हीं स्टार्स में से एक हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी कई बार अपने स्ट्रगल के बारे में खुलकर बात कर चुके हैं। आज भले ही वह इंडस्ट्री के सबसे काबिल अभिनेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन उनके लिए यहां तक का सफर तय कर पाना बिलकुल भी आसान नहीं था। एक समय था जब वह गुजरात की एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी करते थे, लेकिन फिर एक्टिंग का जुनून उन्हें मुंबई ले आया, जहां उन्हें काफी पापड़ बेलने पड़े। आज नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जन्मदिन है, इस मौके पर आपको उनके एक केमिस्ट से एक्टर बनने के सफर के बारे में बताते हैं।

किसान परिवार का बेटा, एक्टिंग की खातिर केमिस्ट की नौकरी छोड़कर बना चौकीदार, 13 साल संघर्ष के बाद चमकी किस्मत​

केमिस्ट से बन गए चौकीदार

नवाजुद्दीन सिद्दीकी आज अपना 52वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक कस्बे बुढ़ाना में हुआ था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। नवाजुद्दीन सिद्दीकी के पिता किसान थे, लेकिन उनके सपने हमेशा से बड़े थे। बचपन से ही वह एक्टर बनने का सपना देखते आए थे। लेकिन, तब उनके परिवार में एक्टिंग को किसी प्रोफेशन या करियर के तौर पर नहीं देखते थे। नवाजुद्दीन ने हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर नौकरी की तलाश में वडोदरा जा पहुंचे। यहां उन्होंने एक पेट्रोकेमिकल कंपनी में केमिस्ट की नौकरी पकड़ ली, नौकरी बढ़िया थी, लेकिन वह एक्टर बनना चाहते थे।

नौकरी छोड़ एक्टिंग में रखा कदम

कुछ समय तक नौकरी करने के बाद नवाजुद्दीन दिल्ली आ गए और यहां उनका झुकाव थिएटर की ओर बढ़ा। उन्होंने एनएसडी में दाखिला लिया और एक्टिंग की बारीकियां सीखीं, लेकिन बिना काम के खर्चा चलाना मुश्किल था। ऐसे में उन्होंने वॉचमैन तक की नौकरी की। मुंबई में संघर्ष और भी बढ़ गया। शुरुआत में कुछ छोटेमोटे रोल मिले। 1999 में आमिर खान की ‘सरफरोश’ में एक चोरउचक्के की छोटी सी भूमिका निभाई और फिर शूल, मुन्नाभाई एमबीबीएस जैसी फिल्मों में छोटेमोटे रोल किए, मगर पहचान नहीं मिल सकी।

13 साल का संघर्ष करने के बाद मिली पहचान

फिल्म इंडस्ट्री में अपने कदम रखने के बाद करीब 13 साल तक नवाजुद्दीन सिद्दीकी को संघर्ष करना पड़ा। 2012 में रिलीज हुई अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’  में उन्होंने फैजल खान की भूमिका निभाई और खूब सुर्खियां बटोरीं। उनका डायलॉग ‘बाप का, दादा का, भाई का… सबका बदला लेगा तेरा फैजल’ आज भी पुराना नहीं हुआ है। इसके बाद नवाजुद्दीन ‘द लंच बॉक्स’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘रमन राघव 2.0’, ‘मंटो’ और ‘रात अकेली है’ सहित कई शानदार फिल्मों में नजर आए। वहीं ‘सेक्रेड गेम्स’ वेब सीरीज में भी अपने दमदार अभिनय से सभी के दिल जीत लिए।

ः 

 

Leave a Reply