पाउडर से लिखावट तक…दवा असली है या नकली कैसे पहचानें?​

सिरदर्द से लेकर मसल्स में पेन होने तक…आजकल हर छोटी हेल्थ प्रॉब्लम में हम टेबलेट, कैप्सूल या सीरप ले लेते हैं. आपको छोटी से लेकर बड़ी स्वास्थ्य समस्या में राहत दिलाने वाली ये दवाएं ही अगर आपकी सेहत की दुश्मन बन जाएं तो क्या होगा. मार्केट में आजकल न सिर्फ खानेपीने की चीजों में मिलावट की जाने लगी है, बल्कि दवाएं भी नकली बिकने लगी हैं. शासन की तरह से इसको लेकर कदम उठाए जाते हैं और आए दिन कई केस भी देखने में आते हैं. ये आवश्यक है कि एक ग्राहक के तौर पर हम खुद भी सावधान रहें. दवाएं आपकी सेहत की साथी बनी रहें इसके लिए जरूरी है कि आप इन्हें खरीदते समय कुछ बातों को ध्यान में रखें.

पाउडर से लिखावट तक…दवा असली है या नकली कैसे पहचानें?​

दवाओं से अगर साइड इफेक्ट हो जाए तो कई बार स्थिति गंभीर भी हो जाती है. यहां तक कि जान जाने का खतरा तक रहता है. दरअसल हर एक टेबलेट या सिरप को पर्टिकुलर तय किए हुए फॉर्मूला पर बनाया जाता है. इनमें अलगअलग सॉल्ट के कॉम्बिनेशन होते हैं और नकली दवाओं में यहीं पर गड़बड़ी हो जाती है. इसलिए बहुत जरूरी है कि आप दवाएं खरीदते वक्त ये भी ध्यान दें कि जो टेबलेट या कैप्सूल आप खरीद रहे हैं वो असली है या फिर नकली.

दवा के नाम की स्पेलिंग पर दें ध्यान

दवा असली है या फिर नकली…इसका पता करने के लिए आपको पैकेजिंग को ध्यान से देखना चाहिए. उसपर लिखी दवा की स्पेलिंग में अगर आपको कोई फर्क नजर आ रहा है तो हो सकता है कि ये नकली दवा हो. इसके अलावा बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट भी जरूर चेक करनी चाहिए.

खरीदने के बाद डॉक्टर को दिखाएं

आपने अगर कोई भी दवा डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से ली है तो मेडिकल स्टोर से इसे खरीदने के बाद एक बार फिर से डॉक्टर से वेरीफाई करवाना चाहिए. इससे आप न सिर्फ नकली दवा लेने से बच जाएंगे, बल्कि कई बार मेडिकल पर गलत दवा दे दी जाती है. उससे होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा.

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कंपनी का लोगो क्या है?

बाजार में जब आप दवा खरीदने जाते हैं तो आप जिस भी कंपनी की दवा ले रहे हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। उसका नाम आप पैकेजिंग पर जरूर चेक कर लें. हर कंपनी का अपना एक अलग लोगो होता है. आप ऑनलाइन लोगो का मिलान कर सकते हैं. इसके अलावा कंपनी के नाम की स्पेलिंग में अगर मिस्टेक, कोई अक्षर ज्यादा या कम दिखे तो हो सकता है कि ये दवा फर्जी हो.

क्यूआर कोड स्कैन करें

सरकार ने कुछ टॉप दवाओं पर क्यूआर कोड लगाना भी अनिवार्य किया है. दरअसल इसका मकसद ही नकली दवाओं को रोकना और ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना है. अगर आप भी कोई दवा खरीद रहे हैं तो उसके पैकेट पर बने क्यूआर कोड को स्कैन करके देखें. जब आप इसे अपने स्मार्टफोन के स्कैनर से स्कैन करते हैं तो दवा के नाम से लेकर बैच तक कि डिटेल निकलकर आ जाती है.

ये बातें भी रखें ध्यान

दवाएं हमेशा सर्टिफाइड मेडिकल से ही खरीदना चाहिए. आप चेक करें कि उनके स्टोर में उन्होंने लाइसेंस लगाया हुआ है या फिर नहीं. इसके अलावा दवा की क्वालिटी भी जरूर चेक करें. अगर पैकेट खोलने के बाद कैप्सूल चिपचिपा है या फिर टैबलेट पाउडर जैसी हो गई है तो इसे खाने से बचें. ध्यान रखें कि पैक की सील टूटी हुई नहीं होनी चाहिए. इसी तरह से जब आप सिरप खरीद रहे हो तो उसका ढक्कन भी चेक कर लें कि ये पूरी तरह से सील बंद हो. दवा अगर कुछ ही दिनों में एक्सपायर होने वाली हो तो इसे न खरीदें.

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