5 दिनों तक संजय सिंह की यात्रा का कैसा असर? पश्चिमी UP में गूंजा रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो का नारा​

मेरठ से 16 मई 2026 को शुरू हुई रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो पदयात्रा 20 मई को गाजियाबाद के अंबेडकर पार्क में ऐतिहासिक जनसमर्थन के साथ समापन हो गया. आम आदमी पार्टी ने कहा कि पांच दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जो दृश्य दिखाई दिये, उसने साफ कर दिया कि जनता अब सिर्फ भाषण नहीं, जवाब मांग रही है. युवाओं के हाथों में डिग्रियां थीं, लेकिन नौकरी नहीं. किसानों के चेहरों पर मेहनत थी, लेकिन सम्मान नहीं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। शिक्षामित्र, आशा बहनें, कर्मचारी, छोटे व्यापारी और गरीब परिवार सब एक ही सवाल पूछते दिखे, आखिर आम आदमी कब तक संघर्ष करता रहेगा और सत्ता में बैठे लोग सिर्फ वादे करते रहेंगे?

5 दिनों तक संजय सिंह की यात्रा का कैसा असर? पश्चिमी UP में गूंजा रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो का नारा​

पदयात्रा में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी हर कदम पर जनता के बीच दिखाई दिए. ना सत्ता का अहंकार, ना सुरक्षा का दिखावा, ना मंच से दूर खड़े होकर राजनीति. गांवगांव, गलीगली जाकर उन्होंने लोगों की बातें सुनीं, युवाओं का दर्द महसूस किया और भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई संसद से सड़क तक लड़ी जाएगी.

दिल्ली और पंजाब मॉडल की चर्चा

पार्टी का कहना है कि आप ने दिल्ली और पंजाब में जो मॉडल दिया, उसकी चर्चा भी इस यात्रा में हर जगह सुनाई दी. लोगों ने कहा कि अगर सरकारी स्कूल सुधर सकते हैं, अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल सकता है, बिजलीपानी में राहत मिल सकती है और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो सकती है, तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं? जनता अब तुलना कर रही है. उसे बड़ेबड़े नारों से ज्यादा जमीन पर काम दिख रहा है. यही कारण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी की इस पदयात्रा ने एक नई राजनीतिक बहस खड़ी कर दी है.

यात्रा में युवाओं के भविष्य, किसानों पर चर्चा

पार्टी का कहना है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं रहेगा, बल्कि यह युवाओं के भविष्य, किसानों के सम्मान, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की लड़ाई बनने जा रहा है. जनता अब जाति और धर्म के पुराने खेल से बाहर निकलकर अपने बच्चों के भविष्य की बात कर रही है. उसे रोजगार चाहिए, अच्छी शिक्षा चाहिए, इलाज चाहिए और ऐसा सिस्टम चाहिए जिसमें गरीब आदमी को भी सम्मान मिले.

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