खुद को खास और दूसरों को कमतर समझते हैं? ये सेल्फ कॉन्फिडेंस नहीं, हो सकता है दिमागी विकार, जानें Narcissistic Personality Disorder​

25 साल का रुद्राक्ष दिखने में स्मार्ट है, पढ़ालिखा है और समझदार भी है, लेकिन इतना भी नहीं कि उसके जैसा कोई दूसरा हो ही नहीं। मेरी मुलाकात रुद्राक्ष से एक कॉन्वोकेशन में हुई। हम दोनों का परिचय हुआ, बातोंबातों में मैंने रुद्राक्ष की खूबसूरती की और बोलने के तरीके की तारीफ कर दी। वैसे भी मेरी आदत है कि अगर कोई व्यवहार और देखने में अच्छा लगे तो मैं सामने ही उसकी तारीफ कर देती हूं। लेकिन मेरी एक छोटीसी तारीफ सुनते ही रुद्राक्ष मानो सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह लगातार अपनी ही तारीफों के पुल बांधने लगा। कभी अपनी खूबसूरती के किस्से सुनाता, तो कभी अपनी समझदारी और पर्सनैलिटी की बातें करने लगता। उसकी हर बात में खुद को सबसे बेहतर साबित करने की कोशिश साफ नजर आ रही थी।

खुद को खास और दूसरों को कमतर समझते हैं? ये सेल्फ कॉन्फिडेंस नहीं, हो सकता है दिमागी विकार, जानें Narcissistic Personality Disorder​

रुद्राक्ष को ऐसा लगता था कि उससे ज्यादा स्मार्ट, खूबसूरत और समझदार शायद ही कोई हो। इतना ही नहीं, उसे दूसरों की कमियां निकालने और खुद को महान दिखाने में भी मजा आता था। पहली नजर में यह आत्मविश्वास या सेल्फलव लग सकता है, लेकिन मनोवैज्ञानिक भाषा में यह व्यवहार कई बार Narcissistic Personality Disorder यानी NPD की ओर इशारा करता है। यह एक ऐसा पर्सनैलिटी डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानने लगता है और दूसरों की भावनाओं या जरूरतों को महत्व नहीं देता।

समझाती हूं आपको Narcissistic Personality Disorder क्या है?

वैसे तो मैं फिलोसोफी की छात्रा रही हूं लेकिन मुझे साइकोलॉजी भी अच्छी खासी समझ आने लगी है। जिस डिसआर्डर की मैं बात कर रही हूं इसे साइकोलॉजी में Narcissistic Personality Disorder कहा जाता है। ये कोई बीमारी नहीं है जिसका इलाज किया जाए ये एक पर्सनालिटी डिसऑर्डर है जिसमें व्यक्ति खुद को दूसरों से ज्यादा महत्वपूर्ण और श्रेष्ठ समझने लगता है। साइकोलोजिस्ट के मुताबिक इस डिसआर्डर से पीड़ित इंसान खुद को परिवार,आसपास के लोगों और कार्यस्थल पर ये महसूस करता है कि उसे लोग खास ट्रीटमेंट दें।

NPD और मानसिक बीमारी में क्या फर्क है?

जब मैंने नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की चर्चा एक जानी मानी साइकोलोजिस्ट डॉ. टीना गुप्ता से थी जो वी केयर क्लिनिक, हौज खास एवं मैक्स हॉस्पिटल, पंचशील पार्क, नई दिल्ली में बतौर सीनियर कंसल्टेंट काम करती हैं, ने बताया कि ये एक पर्सनालिटी डिसऑर्डर है जो मानसिक बीमारी से अलग है। बातों बातों में उन्होंने इस डिसऑर्डर की एक के बाद एक परत खोलना शुरु कर दी। उन्होंने बातचीत में बताया मानसिक बीमारी में दवाओं का रोल ज्यादा होता है, जबकि पर्सनैलिटी डिसऑर्डर व्यक्ति के लंबे समय से चले आ रहे व्यवहार, सोच और रिश्तों को देखने के तरीके से जुड़ा होता है। जितना मैंने साइकेट्रिस से समझा और पढ़ा उसमें पता चला कि इस पर्सनालिटी डिसऑर्डर में व्यक्ति का स्वभाव और व्यवहार धीरेधीरे एक पैटर्न बन जाता है जिसका इलाज किसी दवा से नहीं हो सकता है। डॉ. टीना गुप्ता ने बातचीत में बताया कि उनके पास ऐसी बहुत सी फैमिली आती हैं जो अपने पिता,पति या भाई की इस तरह की पर्सनालिटी का जिक्र करती हैं।

Narcissistic Personality Disorder के मुख्य लक्षण

आमतौर पर इस पर्सनालिटी से जुड़े लोगों में हम जो लक्षण महसूस करते हैं और साइकेट्रिस्ट बताते हैं उनमें पीड़ित व्यक्ति खुद को सबसे बेहतर और खास समझता है। उसे लगता है कि उसके बराबर पढ़ालिखा,काबिल, खूबसूरत दूसरा कोई नहीं। आपको बता दू ये परेशानी मेल और फीमेल दोनों में हो सकती है। कुछ लड़किया खुद को सबसे खूबसूरत मानती है, अपने से बेहतर कुछ नहीं दिखता उन्हें, वो भी इस डिसआर्डर की शिकार है।

NPD से पीड़ित लोगों का टारगेट क्या होता है?

इस विकार से पीड़ित लोगों का टारगेट दूसरों को कंट्रोल करने की कोशिश करना होता हैं। ऐसे लोग परिवार और पार्टनर पर हावी रहते हैं, दूसरों की भावनाओं को नहीं समझते, जरूरत से ज्यादा आलोचना करते हैं, खुद को हमेशा सही मानते हैं, दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। हमारे आसपास ऐसे लोग काफी देखने को मिल जाएंगे जो NPD का शिकार है।

सेल्फ कॉन्फिडेंस और Narcissist में क्या अंतर है?

रुद्राक्ष की बातें सुनकर मुझे कुछ अटपटा लगा तो मैंने नेट पर सर्च किया और जल्द ही मैंने उसकी इस पर्सनालिटी के डिसआर्डर को जज कर लिया। मैंने महसूस किया  ऐसे लोग अक्सर अपने सेल्फ लव को अपना कॉन्फिडेंस मान लेते हैं लेकिन साइकोलॉजी में उनकी पर्सनालिटी का ये कॉन्फिडेंस एक नुस्ख है जो लोगों को नीचा दिखाता है। सेल्फ कॉन्फिडेंस एक सकारात्मक गुण है, जो परिवार,दोस्त,सहकर्मी किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन narcissism में व्यक्ति खुद को दूसरों से ज्यादा श्रेष्ठ समझने लगता है। वह दूसरों की भावनाओं की कद्र नहीं करता और रिश्तों में बराबरी खत्म होने लगती है। यही बात इसे सामान्य आत्मविश्वास से अलग बनाती है।

यह डिसऑर्डर किस उम्र में दिखाई देने लगता है?

डॉ. टीना गुप्ता ने इस डिसऑर्डर के पनपने की उम्र पर भी मेरी बातचीत हुई,उनके मुताबिक इस पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की पहचान आमतौर पर यंग एडल्टहुड यानी 20 से 25 साल की उम्र के बीच होने लगती है। मेरे हिसाब से बच्चों और किशोरों में इस उम्र में कुछ व्यवहारिक संकेत दिखाई तो देते हैं जिसके लिए कई हार्मोनल परिवर्तन जिम्मेदार होते हैं। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। साइकोलोजिस्ट के मुताबिक कम उम्र में इस डिसऑर्डर का निदान नहीं किया जा सकता, क्योंकि उस उम्र में उनकी पर्सनालिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती।

Narcissistic Personality Disorder के कारण क्या हो सकते हैं?

हर बीमारी के पनपने का कोई ना कोई कारण जरूर होता है, इसी तरह इस विकार के पनपने की भी कई वजह हैं जैसे बचपन का माहौल, पेरेंटिंग स्टाइल, परिवार में लगातार कंट्रोल या भावनात्मक दबाव, जेनेटिक कारण, बचपन के अनुभव और ट्रॉमा जैसे फैक्टर इस पर्सनालिटी विकार को जन्म दे सकते हैं। कई बार परिवार में पहले से ऐसे व्यवहारिक पैटर्न मौजूद होने पर अगली पीढ़ी में भी यह समस्या दिखाई दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिसऑर्डर के लिए काफी हद तक सोशल मीडिया भी जिम्मेदार है। Computers in Human Behavior जर्नल में प्रकाशित एक व्यापक मेटाएनालिसिस के अनुसार, सोशल मीडिया और नार्सिसिस्टिक प्रवृत्तियों के बीच गहरा संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम पर अत्यधिक समय बिताते हैं, अपनी तस्वीरों को बारबार पोस्ट करते हैं और केवल तारीफ की भूख रखते हैं, उनमें NPD के लक्षण तेजी से उभरते हैं। सोशल मीडिया ऐसे लोगों को अपनी ‘काल्पनिक श्रेष्ठता’ को बढ़ावा देने का मंच देता है।

NPD का रिश्तों और शादी पर क्या असर पड़ता है?

रुद्राक्ष का इस तरह का बर्ताव देखकर मेरे मन में उसकी पर्सनल लाइफ से जुड़े सवाल भी उठने लगे। मुझे ये महसूस होने लगा इस तरह का आदमी जिसे सिर्फ अपनी अच्छाईयां दिखती है वो कैसे एक भाई, बेटा और बाप का किरदार निभाता होगा। आपको बता दूं मैंने इस टॉपिक को करने के लिए जितनी भी रिसर्च और बातचीत की है उसमें ये ही साबित हुआ है कि NPD से पीड़ित व्यक्ति के साथ रिश्ते निभाना मुश्किल होता है। ऐसे लोग अपने पार्टनर को जरूरत से ज्यादा कंट्रोल कर सकते हैं। ऐसी पर्सनालिटी के लोगों के साथ रहने से पार्टनर की भावनाओं को महत्व नहीं मिल सकता, रिश्ते में बराबरी नहीं हो सकती, ज्यादा आलोचना करने वाला इंसान दूसरों को कंट्रोल में देखना चाहता है। ऐसे लोगों के साथ रहने से दूसरे व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होने लगता है, परिवार के दूसरे सदस्य मानसिक तनाव महसूस कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहने से पार्टनर और बच्चों में भी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

Journal of Marital and Family Therapy में छपी एक स्टडी के मुताबिक, नार्सिसिस्टिक पार्टनर के साथ रहने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर शोध किया गया। रिसर्च से साबित हुआ कि NPD से पीड़ित व्यक्ति का पार्टनर ‘गैसलाइटिंग’ और अत्यधिक नियंत्रण का शिकार होता है। इसके कारण पार्टनर में Selfdoubt, क्रोनिक एंग्जायटी और ‘लो सेल्फएस्टीम की समस्या पैदा हो जाती है। इसे चिकित्सा विज्ञान में Narcissistic Abuse Syndrome भी कहा जाता है।

क्या NPD से पीड़ित व्यक्ति को अपनी समस्या का एहसास होता है?

NPD एक डिसआर्डर है जिसे दूसरे लोग समझते हैं लेकिन पीड़ित को इसका अहसास नहीं होता। साइकेट्रिस्ट के मुताबिक इस डिसऑर्डर से पीड़ित इंसान अपने स्वभाव को सामान्य मानते हैं और अक्सर यह महसूस नहीं कर पाते कि उनके कारण परिवार या रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

क्या NPD के साथ डिप्रेशन और एंग्जायटी भी कर सकता है?

मैंने इस टॉपिक पर बात करते करते डॉक्टर से पूछा क्या Narcissistic Personality Disorder वाले लोगों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, शराब या नशे की लत जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है तो उन्होंने जवाब दिया हां। आपको यहां क्लीयर करना चाहती हूं कि ये पर्सनालिटी डिसऑर्डर कैसे तनाव और डिप्रेशन का कारण बनता है। जब ऐसे लोगों को जिंदगी में असफलता या भावनात्मक झटका मिलता है, तो ये लोग उसे संभाल नहीं पाते और तनाव में रहते हैं।

NPD का इलाज संभव है?

साइकेट्रिस्ट के अनुसार पर्सनालिटी डिसऑर्डर का इलाज आसान नहीं होता। सबसे बड़ी चुनौती व्यक्ति को इलाज और थेरेपी के लिए तैयार करना होती है। इस पर्सनालिटी का शिकार आदमी खुद में कोई कमी महसूस नहीं करता, वो खुद को सर्वश्रेष्ठ मानता है तो वो कैसे खुद का इलाज कराएंगा। साइकोलोजिस्ट इस परेशानी का इलाज काउंसलिंग, साइकोथेरेपी, बिहेवियर थेरेपी और फैमिली सपोर्ट से करते हैं। इस परेशानी से पीड़ित व्यक्ति का इलाज करने का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को यह समझाना होता है कि उसके व्यवहार का असर उसकी और उसके परिवार की जिंदगी पर कैसे पड़ रहा है। अगर परिवार में किसी व्यक्ति में narcissistic traits दिखाई दें तो सबसे पहले परिवार को इस समस्या को समझने की जरूरत होती है।

Harvard Review of Psychiatry के एक क्लिनिकल पेपर के अनुसार, NPD के मरीजों का इलाज सबसे कठिन माना जाता है। रिसर्च बताती हैं कि नार्सिसिस्टिक लोग शायद ही कभी खुद अपनी मर्जी से थेरेपी के लिए आते हैं, क्योंकि उनका ‘डिफेंस मैकेनिज्म’ उन्हें यह मानने ही नहीं देता कि उनमें कोई कमी है। वे अक्सर तब साइकोलॉजिस्ट के पास पहुंचते हैं जब वे गंभीर डिप्रेशन, अकेलेपन या किसी बड़े बिजनेस/रिश्ते के टूटने के सदमे से गुजर रहे होते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता, शैक्षणिक उद्देश्यों और सामान्य यूरोलॉजिकल/मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है। इंटरनेट पर दी गई जानकारी या किसी के व्यवहार के आधार पर खुद या किसी अन्य व्यक्ति की मानसिक स्थिति का आकलन न करें। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस तरह के व्यवहारिक पैटर्न, अत्यधिक मानसिक तनाव या डिप्रेशन का सामना कर रहा है, तो बिना देरी किए किसी योग्य मनोचिकित्सक से संपर्क कर उचित थेरेपी और चिकित्सकीय परामर्श लें।

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