रक्षाबंधन से पहले एक ज्वैलरी ब्रांड का विज्ञापन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. इस विज्ञापन में बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती नजर आ रही हैं. विज्ञापन सामने आने के बाद इस पर बवाल मच गया है. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। वहीं काशी के कुछ विद्वानों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे सनातन परंपरा के अनुरूप नहीं बताया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कुत्तों को राखी बांधना धर्म सम्मत है या नहीं?

ज्वैलरी ब्रांड के विज्ञापन में कृति सेनन ने बांधी कुत्ते को राखी

रक्षाबंधन के मौके पर एक ज्वैलरी ब्रांड की ओर से राखी से जुड़ा विज्ञापन जारी किया गया है. इसमें अभिनेत्री कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती हुई दिखाई दे रही हैं. विज्ञापन में उनके पहनावे और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर सोशल मीडिया पर अलगअलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे पालतू जानवरों के प्रति प्रेम और उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव दिखाने का तरीका मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि रक्षाबंधन की धार्मिक परंपरा को इस तरह बदलना उचित नहीं है. इसी बीच काशी के कुछ विद्वानों ने भी विज्ञापन और पालतू जानवरों को राखी बांधने की परंपरा पर सवाल उठाए हैं.

काशी के विद्वानों ने भी जताया विरोध

बनारस के आचार्य पवन त्रिपाठी ने इसे सनातन विरुद्ध बताया है. टीवी 9 से हुई बातचीत में आचार्य पवन त्रिपाठी ने कहा कि रक्षाबंधन एक सनातनी परम्परा है लेकिन इसके व्यापारीकरण ने इसका स्वरुप बिगाड़ दिया है. कुत्तों को राखी बांधना कहीं से भी मर्यादित और धर्म सम्मत नही है. आचार्य कहते हैं कि सैकड़ों साल पहले पुरोहित अपने जजमानों को और गुरू अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे. पौराणिक मान्यता है कि देवासुर संग्राम में इन्द्राणी ने विजय की कामना लिए इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था. रक्षा और स्नेह का यही भाव कालांतर में भाई और बहन के रिश्तों में राखी के रूप में दिखा.

स्त्री के लिए उसका मायका एक अहम पक्ष है. और भाई उसके मायका का भविष्य भी है और प्रधान भी. इसलिए रक्षा सूत्र के जरिए वो अपने भाई के प्रति स्नेह को प्रदर्शित करती है जबकि भाई उसकी रक्षा का संकल्प लेता है. जिस रक्षा बंधन को मुगलों ने मान्यता दी उसको ये विक्षिप्त लोग व्यापारीकरण में अंधे होकर उसका स्वरुप बिगाड़ रहे हैं. आप कुत्ते को भोजन दीजिए और उसकी देखभाल करिए ये तो धर्म सम्मत है. लेकिन कुत्ते को राखी बांधना या मऊर पहना देना ये सनातन के दृष्टिकोण से घोर निंदनीय है.

ज्योतिषाचार्य ने भी विज्ञापन पर उठाए सवाल

ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय उपाध्याय ने भी इस विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताई है.उन्होंने इसे सनातनी परंपरा से छेड़छाड़ करने वाला बताया है.

उन्होंने रक्षाबंधन में बोले जाने वाले प्रसिद्ध रक्षा सूत्र मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः.
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

इस मंत्र का भाव है कि जिस रक्षा सूत्र से महान शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधा जा रहा है. यह रक्षा सूत्र तुम्हारी रक्षा करे और अपने संकल्प से विचलित न हो. ज्योतिषाचार्य के अनुसार, रक्षासूत्र का धार्मिक संदर्भ और उसका इस्तेमाल विशेष परंपराओं से जुड़ा हुआ है. इसलिए इसे विज्ञापन के माध्यम से किसी दूसरे रूप में प्रस्तुत करने पर धार्मिक दृष्टि से सवाल उठना स्वाभाविक है.

कुत्तों को राखी बांधना धर्म सम्मत है या नहीं?

सनातन धर्म के प्रमुख पारंपरिक ग्रंथों और रक्षाबंधन की सामान्य धार्मिक परंपरा में कुत्ते को राखी बांधने की कोई स्थापित विधि या अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं बताई गई है. राखी मुख्य रूप से रक्षा सूत्र है, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों में मनुष्य को बांधने की परंपरा रही है. रक्षाबंधन के आधुनिक स्वरूप में भाईबहन के रिश्ते को इसका सबसे प्रमुख रूप माना जाता है. यानी पालतू जानवर से प्रेम करना और उसकी देखभाल करना धर्मसम्मत माना जा सकता है, लेकिन कुत्ते को रक्षाबंधन की धार्मिक राखी बांधने की कोई सर्वमान्य शास्त्रीय परंपरा नहीं है. इसी अंतर को लेकर काशी के विद्वान इस विज्ञापन पर आपत्ति जता रहे हैं.