शुक्रवार को सिनेप्रेमियों में पर्दे पर अपना खौफ बिठाने के लिए हैवान बनकर अक्षय कुमार बड़े पर्दे पर आ रहे हैं. उनके साथ सैफ अली खान भी प्रमुख भूमिका में होंगे. बॉक्स ऑफिस पर ये फिल्म कितना टिकेगी ये वक्त ही बताएगा, लेकिन शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों में लगातार दिनों से लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. इस दौरान सेंसेक्स में 1750 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखी जा चुकी है. सेंसेक्स और निफ्टी की जान निकालने में ग्लोबल मार्केट के 6 हैवान पूरी तरह से एक्टिव हो गए हैं और आम निवेशकों का लगातार खून चूस रहे हैं. इन तीन दिनों में शेयर बाजार निवेशकों को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. जिनमें से दो लाख करोड़ रुपए का नुकसान बुधवार को ही हुआ है.

अगर इन 6 हैवानों की बात करें तो सबसे बड़ा हैवान शेयर बाजार के लिए कच्चा तेल बना हुआ है. जोकि 100 डॉलर के पार चला गया है. ईरान और अमेरिका के बीच की टेंशन भी कम छोटा हैवान नहीं है. उसने भी बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. सेकेंड्री मार्केट को छोड़ प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी का मूड काफी खराब देखने को मिल रहा है. आईटी स्टॉक में गिरावट, रुपए में भारी गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी निवेशकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है. जिसकी वजह से सेंसेक्स, निफ्टी और निवेशकों को काफी नुकसान पहुंच रहा है. आइए शेयर बाजार के आंकड़ों और निवेशकों के नुकसान को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…
सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई. ये समाचार आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे है। तेल की बढ़ती कीमतों और दूसरी चिंताओं की वजह से निवेशकों में घबराहट दिखी और सेंसेक्स व निफ्टी भारी गिरावट के साथ बंद हुए.सेंसेक्स 813 अंक से ज़्यादा गिरकर 74,764 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 लगभग 204 अंक गिरकर 23,431 पर बंद हुआ. इस गिरावट से BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन में 2 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमी आई और यह घटकर 484 लाख करोड़ रुपए रह गया.
अगर बात लगातार तीन दिनों की करें तो सेंसेक्स में 2.29 फीसदी की गिरावट देखने को मिल चुकी है. आंकड़ों को देखें तो 4 सितंबर को सेंसेक्स 76,515.43 अंकों पर बंद हुआ था. जोकि 74,764.23 अंकों पर आ गया है. इसका मतलब है कि सेंसेक्स में 1,751.2 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी में तीन दिनों में 1.95 फीसदी गिरावट आ चुकी है. आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 4 सितंबर को 23,897.70 अंकों पर था, जिसके बाद से इसमें 466.2 अंकों की गिरावट आ चुका है. यही कारण है कि बीएसई के मार्केट कैप में 4,08,424.76 करोड़ रुपए की गिरावट आ चुकी है.
कौनकौन से शेयरों में आई गिरावट
सेंसेक्स में गिरावट की अगुवाई करते हुए इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा और टीसीएस के शेयरों में 25% की गिरावट आई, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में लगभग 2% की गिरावट देखी गई. इसके उलट, अडानी पोर्ट्स के शेयरों में लगभग 4% की बढ़त हुई और टाटा स्टील के शेयर 2% से ज़्यादा चढ़े.
बाजार के ब्रॉडर इंडेक्सेस में भी गिरावट आई. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.6% तक गिरे. सेक्टर्स की बात करें तो निफ्टी IT में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि निफ्टी मेटल में लगभग 2% की बढ़त हुई. कुल मिलाकर बाजार का रुख नकारात्मक रहा. NSE पर 1,484 शेयरों में बढ़त के मुकाबले 2,092 शेयरों में गिरावट देखी गई, जबकि 100 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ.
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे छह मुख्य कारण हैं:
ईरानअमेरिका के बीच तनाव बढ़ा
मंगलवार को मिडिल ईस्ट में तनाव तब और बढ़ गया जब यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले किए, जिससे अमेरिका का एक सहयोगी देश भी इस संघर्ष में बुरी तरह उलझ गया. इस बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई तेल टैंकरों पर हमला किया और ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला किया.
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आज कहा कि उन्होंने खाड़ी में अमेरिका के दो जहाजों और आठ तेल टैंकरों पर हमला किया है. यह हमला ईरान के पांच टैंकरों पर अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया. ईरानी सरकारी मीडिया ने समूह के बयान का हवाला देते हुए यह जानकारी दी. समूह ने कहा कि उसने उन 10 जहाजों पर हमला किया जो होर्मुज जलडमरूमध्य के उस इलाके से गुजरने की कोशिश कर रहे थे जिसे उसने “प्रतिबंधित और असुरक्षित” बताया था.
तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार
मिडिल ईस्ट युद्ध में हालिया तनाव के कारण तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं. इस साल की शुरुआत में युद्ध के दौरान कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, लेकिन बाद में छोटी अवधि के संघर्षविराम और बातचीत से उम्मीद जगी थी कि संघर्ष जल्द खत्म हो जाएगा, जिससे कीमतें $90 प्रति बैरल से नीचे आ गई थीं. हालांकि, हालिया तनाव ने निवेशकों को फिर से डरा दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रह सकता है, जो वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है.
IPO की धूम का DStreet पर असर
बुधवार को छह मेनबोर्ड IPO पब्लिक बिडिंग के लिए खुल रहे हैं, जिनमें रेंटोमोजो , करमतारा इंजीनियरिंग , एलसीसी प्रोजेक्ट्स , स्टीमहाउस इंडिया , मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस और एसेट रिकंस्ट्रक्शन शामिल हैं. जानकारों का मानना है कि हाल ही में हुई ज़बरदस्त लिस्टिंग से भारत के प्राइमरी मार्केट में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे सेकेंडरी मार्केट में थोड़ी गिरावट आ सकती है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा कि तेजी से बढ़ते IPO मार्केट की वजह से मार्केट से लिक्विडिटी खिंच रही है, जिससे निफ्टी में लगातार गिरावट आ रही है.
IT शेयरों पर दबाव
बड़ी IT कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट से भी मार्केट नीचे आ रहा था. निफ्टी IT इंडेक्स 3% से ज्यादा गिर गया, जबकि कोफोर्ज के शेयरों में 5 फीसदी की गिरावट आई. कंपनी ने 8 सितंबर, 2026 को नॉनएग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरपर्सन ओम प्रकाश भट्ट के इस्तीफे की घोषणा की थी, जो तुरंत प्रभाव से लागू हुआ. इंफोसिस, TCS, टेक महिंद्रा और अन्य IT शेयरों में भी भारी गिरावट आई, क्योंकि फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों ने निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी थीं.
रुपए में गिरावट
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95.1050 पर आ गया, जिससे गिरावट का सिलसिला जारी रहा. LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार, पिछले कुछ सेशन में FII की लगातार बिकवाली से करेंसी पर और दबाव बढ़ा है. उन्होंने कहा कि आगे चलकर, मार्केट में शामिल लोग इस हफ़्ते US PCE प्राइस इंडेक्स और अगले हफ्ते फेड के पॉलिसी फैसले पर बारीकी से नजर रखेंगे. मार्केट का रुझान ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को ध्यान में रख रहा है. रुपए की रेंज 94.5095.25 के बीच देखी जा सकती है.
FII की बिकवाली
NSE के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों के नेट सेलर बने रहे और मंगलवार को 123 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. हालांकि यह एक दिन की बहुत बड़ी बिक्री नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में FII की लगातार बिकवाली से दलाल स्ट्रीट पर सेंटीमेंट कमज़ोर हुआ है. इस महीने अब तक छह में से चार सेशन में FII भारतीय शेयरों के नेट सेलर रहे हैं.
दलाल स्ट्रीट के लिए आगे क्या है?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विजयकुमार ने बताया कि जून के बाद से IPO से होने वाला लिस्टिंग गेन बढ़कर लगभग 22 फीसदी हो गया है, जिससे रिटेल और इंस्टीट्यूशनल, दोनों तरह के निवेशक IPO मार्केट की ओर आकर्षित हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बात समझ में आती है क्योंकि 2026 में अब तक निफ्टी का रिटर्न 9.5% रहा है.
उन्होंने आगे कहा कि जिन FIIs ने इस साल अब तक एक्सचेंजों के जरिए 2,84,000 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची है, उन्होंने भी इस साल अब तक IPO में लगभग 36,000 करोड़ रुपए लगाए हैं। हर कोई IPO मार्केट के इस तेज़ी के दौर का फ़ायदा उठा रहा है. इस होड़ ने IPO के वैल्यूएशन को भी बढ़ा दिया है. वैल्यूएशन की परवाह किए बिना IPO सब्सक्राइब हो रहे हैं. एनालिस्ट ने सलाह दी कि IPO के लिए अप्लाई करते समय निवेशकों को समझदारी दिखानी चाहिए.



