11 साल बाद जेल से मुस्कुराते हुए निकला स्वयंभू संत रामपाल, 20 गाड़ियों के काफिले में आश्रम रवाना!


चंडीगढ़: हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में हुई हिंसा में महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत होने के मामले में हिसार सेंट्रल जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा स्वयंभू संत रामपाल आज शुक्रवार को रिहा हो गया है। उसे देशद्रोह से जुड़े एक मामले में जमानत मिली है। उसके अनुयायी उसकी रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। जमानत की खबर अनुनायियों की लगी तो एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में जेल के बाहर जुटना शुरू हो गए थे। आज रामपाल 11 साल, 4 महीने और 24 दिन बाद जेल से बाहर आते ही उसके अनुनायियों ने उसका स्वागत किया। रामपाल के वकील महेंद्र सिंह नैन ने कहा कि हाईकोर्ट से बेल ऑर्डर मिल गया है, जिसे हिसार कोर्ट में जमा कर दिया गया और बेल बांड भरने के बाद रिहाई हो गई।

सतलोक आश्रम के प्रमुख रामपाल की उम्र 78 साल है। जेल के गेट से रामपाल मुस्कुराता हुआ निकला। इस दौरान गेट पर तैनात एक पुलिस कर्मचारी ने रामपाल के सामने हाथ जोड़े। इसके बाद वह सफेद पर्दे लगी फॉर्च्यूनर में बैठकर निकल गया। रामपाल हिसार से सोनीपत जिले के गोहाना में स्थित धनाना के सतलोक आश्रम के लिए रवाना हुआ। उसके काफिले में डिफेंडर, फॉर्च्यूनर जैसी 20 गाड़ियां थी। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को रामपाल को जमानत मंजूर की थी। पुलिस ने जेल के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। शहर में भी कानून-व्यवस्था बिगड़ने की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया। रामपाल मूलरूप से सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र के धनाना गांव के रहने वाला है। उसके गांव में भी एक भव्य सतलोक आश्रम बना हुआ है और ऐसे में जमानत मिलने के बाद वह अपने पैतृक गांव धनाना स्थित आश्रम के लिए रवाना हो गया है।

जेल में कैदी नंबर 1005 था रामपाल
2014 में हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव हुआ था। इस दौरान महिलाओं और बच्चों समेत 6 लोगों की मौत हो गई थी। इसी मामले में रामपाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने रामपाल को दोषी ठहराया था। इस केस में करीब 425 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 58 की गवाही अहम रही। कोर्ट ने सुनवाई के बाद हत्या सहित अन्य धाराओं में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जेल में रामपाल की पहचान कैदी नंबर 1005 के रूप में थी। वह जेल में एक स्पेशल बैरक में रहता था। अधिकतर समय लाइब्रेरी में आध्यात्मिक किताबें पढ़कर गुजारता था।

रिहाई की खुशी में देशभर के आश्रमों में होगा सत्संग
रामपाल की रिहाई के बाद एक मई से तीन मई तक देश और विदेश में सत्संग होंगे। आश्रमों के सेवादारों से मिली जानकारी के अनुसार विश्व शांति के लिए रामपाल की तरफ से एक से तीन मई तक सत्संग किया जाएगा। सतलोक के देश के अंदर 14 आश्रम संचालित है और छह आश्रमों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा 72 देशों में इनके आश्रम की शाखाएं हैं। सभी आश्रमों और शाखाओं में सत्संग का आयोजन किया जाएगा।

हिंसा के बाद हिसार के दोनों आश्रम सील
रोहतक के करौथा आश्रम में विवाद होने के बाद आश्रम संचालक रामपाल और उनके साथियों ने बरवाला में चंडीगढ़ हाईवे पर सतलोक आश्रम बनाया था। आश्रम के अंदर रामपाल का आलीशान आशियाना बनाया हुआ था। तीसरी मंजिल पर रामपाल रहता था। सतलोक आश्रम प्रकरण के दौरान अंदर बैठे रामपाल की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस और अनुयायियों के बीच टकराव हुआ था। पुलिस प्रशासन की तरफ से बुलडोजरों की सहायता से आश्रम के बाहरी हिस्सों को तोड़ा गया था। आश्रम की छतों से अनुयायी पेट्रोल बम पुलिस कर्मचारियों पर फेंक रहे थे। रामपाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस प्रशासन की तरफ से अनुयायियों को बाहर निकाला गया था। फिर आश्रम को सील कर दिया था। जो आज भी सील है। दौलतपुर मार्ग पर बने आश्रम को भी सील किया गया। दोनों आश्रम की संपत्ति को केस से अटैच किया हुआ है।

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