
Near Death Experience: क्या मौत वाकई अंत है या किसी नई शांति की शुरुआत? लॉरेन कनाडे के साथ जो हुआ, वो किसी चमत्कार से कम नहीं है. घर पर अचानक आए हार्ट अटैक के बाद लॉरेन पूरे 24 मिनट तक ‘क्लिनिकली डेड’ रहीं. न धड़कन थी, न सांसें लेकिन जब आधे घंटे बाद वो वापस लौटीं तो उनके पास सुनाने के लिए एक ऐसी कहानी थी जो विज्ञान और धर्म की धारणाओं को चुनौती देती है. न तो उन्होंने कोई सफेद रोशनी देखी और न ही कोई लंबी सुरंग बल्कि उन्होंने कुछ ऐसा महसूस किया जो आज भी उनके साथ है. आइए जानते हैं मौत के उन 24 मिनटों का वो रहस्यमयी अनुभव जिसने लॉरेन की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दी.
लॉरेन कैनेडे नाम की एक महिला ने दावा किया कि वह 24 मिनट तक क्लिनिकली मृत थीं. घर पर अचानक आए गंभीर हार्ट अटैक के बाद उनके दिल की धड़कन रुक गई थी. उनके पति ने तुरंत सीपीआर दिया और बाद में पैरामेडिक्स पहुंचे, लेकिन उन्हें दोबारा जीवित करने में लगभग आधा घंटा लग गया. डॉक्टरों की कोशिशों के बाद आखिरकार उनकी सांसें वापस आईं.
मौत के करीब पहुंचने वाले कई लोग बताते हैं कि उन्हें सुरंग या सफेद रोशनी दिखाई देती है. लेकिन लॉरेन का अनुभव इससे बिल्कुल अलग था. उन्होंने कहा कि उन्हें कोई दृश्य नहीं दिखा, बल्कि एक गहरी और अनोखी शांति महसूस हुई. उनके मुताबिक वह शांति इतनी मजबूत थी कि जागने के बाद कई हफ्तों तक बनी रही. लॉरेन का कहना है कि इस घटना के बाद उनकी जिंदगी दो हिस्सों में बंट गई है. एक हार्ट अटैक से पहले की जिंदगी और दूसरी उसके बाद की. वह कहती हैं कि उन्हें लगता है फरवरी में उनकी पहली जिंदगी खत्म हो गई और फिर वह दूसरी जिंदगी में जागीं. अब वह खुद को पहले जैसा इंसान महसूस नहीं करतीं.
लॉरेन साफ कहती हैं कि अब उन्हें मौत से डर नहीं लगता. हालांकि उन्होंने कोई खास दृश्य नहीं देखा, फिर भी उनके मन में किसी तरह की चिंता नहीं है. जब जिंदगी में मुश्किल समय आता है, तो वह उस शांति को याद करती हैं जो उन्होंने उस दौरान महसूस की थी. कभी-कभी वह उस जगह भी जाती हैं जहां वह गिरी थीं. उनके परिवार के लिए यह दौर बेहद डरावना था, लेकिन लॉरेन अपने बेहोशी के समय को सकारात्मक रूप में याद करती हैं. जब वह होश में आईं तो उन्हें हार्ट अटैक से पहले के पूरे हफ्ते की कोई याद नहीं थी. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अस्पताल में बिताए समय की भी ज्यादा बातें उन्हें याद नहीं रहीं.
हार्ट अटैक के बाद लॉरेन के सीने में एक डिफिब्रिलेटर लगाया गया है, जो जरूरत पड़ने पर दिल की धड़कन को सामान्य करता है. वह इसे अपनी जिंदगी का स्थायी रिमाइंडर मानती हैं कि वह मौत के कितने करीब पहुंच गई थीं. शुरुआत में उन्हें बोलने और लिखने में दिक्कत हुई, लेकिन डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया कि उनके दिमाग को कोई स्थायी नुकसान नहीं हुआ है. अब वह अपनी नई जिंदगी को अलग नजरिए से जी रही हैं.





