दरवाजा खुलते ही उड़ गए होश,’ करीब डेढ़ साल से नहीं बदले थे बुजुर्ग ने कपडे, बॉडी से आ रही थी बदबू!.

हरियाणा के करनाल में एक बुजुर्ग होम्योपैथिक डॉक्टर को एक सामाजिक संस्था ने उनके घर से रेस्क्यू किया है. वे महीनों से बेहद खराब और गंदगी भरे हालात में अकेले रह रहे थे. उनकी पत्नी और बेटियां ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. वीडियो सामने आने के बाद लोग परिवार और पड़ोसियों पर सवाल उठा रहे हैं.

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हरियाणा के करनाल से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है. यहां एक सामाजिक संस्था ने एक बुजुर्ग होम्योपैथिक डॉक्टर को उनके ही घर से रेस्क्यू किया है. वे पिछले कई महीनों से बेहद दयनीय और गंदगी भरे हालात में अकेले रह रहे थे.

डेढ़ साल से नहीं बदले कपड़े

अपना आशियाना’ नाम की संस्था के सदस्य राजकुमार अरोड़ा ने बताया कि जब वे बुजुर्ग के पास पहुंचे, तो वहां का नजारा देख दंग रह गए. बुजुर्ग के शरीर और कपड़ों से तेज बदबू आ रही थी. बताया जा रहा है कि उन्होंने करीब डेढ़ साल से अपने कपड़े तक नहीं बदले थे और घर में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं था.

ऑस्ट्रेलिया में रहता है परिवार

हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग का परिवार आर्थिक रूप से काफी मजबूत है. उनकी पत्नी और दोनों बेटियां ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. संस्था ने जब उनकी पत्नी से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि उनके पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वे खुद ही सबसे अलग रहना चाहते थे. पत्नी के मुताबिक, उन्होंने सेक्टर 7 वाले घर पर उनकी देखभाल के लिए एक सहायक (अटेंडेंट) भी रखा था, लेकिन बुजुर्ग वहां रहने को तैयार नहीं थे और अपने पुराने घर में अकेले रहने चले गए.

सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा

इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है, जिसमें संस्था के लोग बुजुर्ग को सहारा देकर बाहर निकाल रहे हैं. वीडियो देखकर लोग काफी नाराज हैं और कई सवाल पूछ रहे हैं. इतने पैसे और विदेश में रहने का क्या फायदा, जब आप अपने माता-पिता का ख्याल नहीं रख सकते? क्या 18 महीनों में किसी पड़ोसी, दोस्त या रिश्तेदार ने एक बार भी हाल नहीं जाना?. इंसानियत के नाम पर यह एक शर्मनाक घटना है.

अब संस्था ही बनी सहारा

फिलहाल बुजुर्ग डॉक्टर को ‘अपना आशियाना’ शेल्टर होम में भेज दिया गया है, जहाँ उनकी देखभाल की जा रही है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि बुढ़ापे में केवल पैसा ही काफी नहीं होता, अपनों का साथ और देखभाल सबसे ज्यादा जरूरी है.

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