सावधान! गूगल पर भूलकर भी सर्च न करें ये 6 चीजें, वरना सीधे जाना पड़ सकता है जेल!


आज की दुनिया में टेक्नोलॉजी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है. सर्च इंजन, सोशल मीडिया और AI टूल्स के बिना दिन अधूरा लगता है. लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं समझते कि इंटरनेट पर किया गया हर सर्च रिकॉर्ड होता है. आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर उसे आप तक ट्रेस भी किया जा सकता है. खासकर तब, जब आप किसी गैरकानूनी या संवेदनशील विषय को सर्च करते हैं.

भारतीय साइबर कानून कितने सख्त हैं
भारत में IT Act, IPC और UAPA जैसे कानून ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर काफी सख्त हैं. इन कानूनों के तहत अधिकारियों को यह अधिकार है कि वे संदिग्ध ऑनलाइन व्यवहार की जांच करें. कई मामलों में सिर्फ गलत चीज सर्च करना ही आपको जांच के दायरे में ला सकता है, भले ही आपने कोई गैरकानूनी काम किया हो या नहीं.

1. आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़ी सर्च क्यों खतरनाक हैं
अगर कोई व्यक्ति आतंकी संगठनों, उनके विचारों, भर्ती प्रक्रिया या प्रचार सामग्री से जुड़ी जानकारी सर्च करता है, तो यह बेहद गंभीर मामला बन सकता है. ऐसे कंटेंट को देखने या खोजने पर सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो जाती हैं. भारत में इस तरह की गतिविधियां गैरकानूनी मानी जाती हैं और UAPA जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है.

2. बच्चों से जुड़े अवैध कंटेंट पर जीरो टॉलरेंस
बच्चों के यौन शोषण, आपत्तिजनक तस्वीरों, वीडियो या ऐसे किसी भी कंटेंट से जुड़ी सर्च भारत में सबसे गंभीर अपराधों में गिनी जाती है. चाहे ऐसा कंटेंट गलती से ही क्यों न सामने आ जाए, कानून इसमें कोई ढील नहीं देता. इसके लिए लंबी जेल सजा तक का प्रावधान है और “अनजाने में हुआ” जैसी कोई दलील नहीं मानी जाती.

3. हैकिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़ी जानकारी भी जोखिम भरी
फोन हैक करना, Wi-Fi तोड़ना, बैंक अकाउंट में सेंध लगाना, UPI या OTP फ्रॉड जैसे विषयों पर सर्च करना भी आपको मुश्किल में डाल सकता है. भले ही आपको यह सिर्फ जानकारी जुटाने जैसा लगे, लेकिन साइबर सेल इसे आपराधिक इरादे के तौर पर देख सकती है. भारत में ऑनलाइन ठगी बढ़ने के कारण ऐसे सर्च पर खास नजर रखी जाती है.

4. हथियार, बम और विस्फोटक से जुड़ी जिज्ञासा भी भारी पड़ सकती है
घर पर बम बनाने, अवैध हथियारों, हथियारों में बदलाव या 3D प्रिंटेड गन जैसी चीजों को सर्च करना बेहद खतरनाक है. भले ही यह सिर्फ जिज्ञासा हो, लेकिन अधिकारी अक्सर ऐसे मामलों में कोई जोखिम नहीं लेते. ऐसे सर्च आपको सीधे सुरक्षा एजेंसियों की नजर में ला सकते हैं.

5. ड्रग्स और डार्क वेब की तलाश भी सुरक्षित नहीं
ड्रग्स बनाने या बेचने की जानकारी, डार्क वेब के अवैध मार्केटप्लेस या गुप्त लेनदेन से जुड़े टूल्स सर्च करना भी गंभीर अपराध है. नारकोटिक्स और साइबर कानून मिलकर ऐसे मामलों पर नजर रखते हैं. आपकी डिजिटल पहचान उतनी छुपी हुई नहीं होती, जितना आप सोचते हैं.

6. फर्जी दस्तावेज और पहचान की जालसाजी
आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट जैसे सरकारी दस्तावेजों की नकल बनाना या उन्हें एडिट करने से जुड़ी जानकारी खोजना भी अपराध है. फर्जी ID या “वेरिफाइड” अकाउंट खरीदने जैसी सर्च सीधी पहचान की धोखाधड़ी मानी जाती है, जिसमें कोई कानूनी रास्ता नहीं है.

ChatGPT और AI टूल्स को लेकर गलतफहमी न रखें
AI प्लेटफॉर्म्स पहले ही साफ कर देते हैं कि वे गैरकानूनी अनुरोधों को ब्लॉक करते हैं. संदिग्ध पैटर्न फ्लैग किए जा सकते हैं और सेफ्टी के लिए चैट्स की समीक्षा भी हो सकती है. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। AI टूल्स को इंटरनेट का गुप्त कोना समझना भारी भूल है, यहां आप पूरी तरह अनजान या गुमनाम नहीं होते.

अनजाने में अपराध से कैसे बचें
इंटरनेट का इस्तेमाल सीखने और सही जानकारी के लिए करें, शॉर्टकट ढूंढने के लिए नहीं. रिसर्च के लिए भरोसेमंद और वैध स्रोतों पर ही जाएं. अगर गलती से कोई गैरकानूनी कंटेंट दिख जाए, तो तुरंत रिपोर्ट करें. वायरल क्लिकबेट या खतरनाक ट्रेंड्स के झांसे में न आएं.

सोच-समझकर टाइप करें
आज के दौर में एक गलत सर्च आपको कानूनी परेशानी, पूछताछ या डिजिटल निगरानी तक में डाल सकता है. भारतीय साइबर कानून “मुझे पता नहीं था” जैसी दलील के लिए ज्यादा जगह नहीं छोड़ते. इसलिए टाइप करने से पहले सोचें, क्योंकि कुछ सेकंड की जिज्ञासा आपकी आजादी से कहीं ज्यादा महंगी पड़ सकती है.

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