तारिक रहमान के शपथ से पहले बांग्लादेश से आया भारत के लिए भड़काऊ बयान, दुनिया हैरान!

तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ लेने वाले हैं। लेकिन शपथ से पहले ही भारत और बांग्लादेश रिश्तों पर बड़ा तूफान खड़ा हो गया है। आपको बता दें कि तारिक रहमान के विदेश सलाहकार हुमायूं कबीर ने भारत के उस फैसले पर खुलकर ऐतराज जताया है जिसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को शरण दी गई थी। कबीर ने साफ कहा है और साफ शब्दों में कहा है कि ढाका की अदालत हसीना को अपराधी करार दे चुकी है और अब बांग्लादेश में उनके लिए कोई भी जगह नहीं है। यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी कि बीएनपी ने जबरदस्त जीत दर्ज की है। दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता परिवर्तन तय किया है और अब नई सरकार अपने तेवर दिखा रही है। 

कबीर ने यहां तक कह दिया है कि शेख हसीना जैसी टेररिस्ट और उनकी पार्टी को कंट्रोल करने की जिम्मेदारी भारत की है। सीधा संदेश यही है कि ढाका अब नई शर्तों पर बात करने वाला है। तो वहीं दूसरी तरफ विदेश नीति पर भी बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। कबीर ने कहा है कि शेख हसीना सरकार के दौरान भारत से रिश्ते एकतरफ़ा थे और देश को काफी नुकसान हुआ था। अब नई सरकार किसी एक देश पर निर्भर रहने वाली नीति से दूर रहेगी। भारत हो, चीन हो या कोई भी पड़ोसी देश संबंध संतुलित और राष्ट्र हित के आधार पर होने वाले हैं। हालांकि आपको बता दें कि उन्होंने यह भी कहा है कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी हैं और सहयोग इस समय जरूरी है। उन्होंने खुलासा किया कि तारिक रहमान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत हो चुकी है और बातचीत काफी सकारात्मक हुई है। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। यानी कि सख्ती के साथ-साथ संवाद की लाइन भी खुली हुई है। 

बता दें कि तारिक रहमान ने खुद कहा है कि यह कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। लेकिन बीएनपी के वरिष्ठ नेता पहले ही संकेत दे चुके हैं कि सरकार में आते ही भारत से प्रत्यार्पण की मांग की जाएगी। और आपको बता दें और याद दिला दें अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद 15 साल सत्ता में रही शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटने के बाद वह भारत चली गई और नवंबर 2025 में ढाका की अदालत ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों में मौत की सजा सुना दी। उनकी पार्टी आवामी लीग को हालिया चुनावों में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया था। तस्वीर बिल्कुल साफ है। नई सरकार, नया तेवर मगर पुराने अध्याय का हिसाब अभी भी बाकी है और ऐसा ही लग रहा है। 

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