8 लाख में खरीदते किडनी, फिर 1 करोड़ में करते डील… एंबुलेंस ड्राइवर के इशारे पर कानपुर का अस्पताल बना गुर्दा बाजार, 6 डॉक्टर भी अरेस्ट!

8 लाख में खरीदते किडनी, फिर 1 करोड़ में करते डील…  एंबुलेंस ड्राइवर के इशारे पर कानपुर का अस्पताल बना गुर्दा बाजार, 6 डॉक्टर भी अरेस्ट

Kanpur News: यूपी में कानपुर से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है. कानपुर पुलिस ने एक ऐसे संगठित किडनी ट्रांसप्लांट गैंग का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार नेपाल से लेकर पश्चिम बंगाल और एनसीआर तक फैले हुए हैं. यह गैंग गरीबी का फायदा उठाकर चंद रुपयों के बदले लोगों के गुर्दे निकाल लेता था और उसे रईसों को करोड़ों रुपये में बेच देता था. कानपुर पुलिस की गिरफ्त में आए 6 डॉक्टर इस काले साम्राज्य के मुख्य स्तंभ थे. इनमें अहूजा नर्सिंग होम की मालकिन डॉ. प्रीति आहूजा का नाम सबसे चौंकाने वाला है, जो शहर के कई प्रतिष्ठित संगठनों में सक्रिय थीं.

उनका साथ दे रहे थे उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा. इनके अलावा दो अन्य नर्सिंग होम के मालिक और पार्टनर डॉ. राजेश कुमार, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. रामप्रकाश कुशवाहा और डॉ. कुलदीप को भी पुलिस ने सलाखों के पीछे भेज दिया है. पुलिस का मानना है कि इन डॉक्टरों ने चिकित्सा नैतिकता को ताक पर रखकर अस्पताल को गुर्दा बाजार बना दिया था.

आठवीं पास एंबुलेंस ड्राइवर

इस पूरे गिरोह का संचालन कोई उच्च शिक्षित व्यक्ति नहीं, बल्कि आठवीं पास एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल कर रहा था. शिवम ही वह कड़ी था जो डायलिसिस करा रहे रईस मरीजों को गुर्दा दिलाने का लालच देता था. वह सोशल मीडिया (टेलीग्राम और व्हाट्सएप) के जरिए ऐसे गरीबों को तलाशता था जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती थी. हैरानी की बात यह है कि वह डोनर्स को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का उदाहरण देता था. वह कहता था कि “जब एक किडनी पर अमिताभ बच्चन स्वस्थ जीवन जी सकते हैं, तो आप क्यों नहीं?” पैसे की चाहत और इस तरह के भावनात्मक जाल में फंसकर मासूम लोग अपनी किडनी देने को तैयार हो जाते थे.

नोएडा कनेक्शन और डॉ. रोहित

जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का सबसे बड़ा खिलाड़ी नोएडा का डॉ. रोहित है. डॉ. रोहित अपनी टीम के साथ चार्टर्ड प्लेन या फ्लाइट से लखनऊ आता था और फिर कार के जरिए कानपुर पहुंचता था. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ऑपरेशन की रात नर्सिंग होम के पूरे स्थानीय स्टाफ को छुट्टी पर भेज दिया जाता था और सीसीटीवी कैमरे मेंटेनेंस के नाम पर बंद कर दिए जाते थे. रात के अंधेरे में गुर्दा निकालने और प्रत्यारोपण करने के बाद डॉ. रोहित की टीम सुबह होने से पहले ही शहर छोड़ देती थी. अस्पताल के रिकॉर्ड में इस अवैध काम को छिपाने के लिए ‘नॉर्मल सर्जरी’ या ‘पथरी के ऑपरेशन’ का फर्जी कच्चा पर्चा बनाया जाता था.

करोड़ों का खेल, डोनर को सिर्फ चंद लाख

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, एक किडनी ट्रांसप्लांट का पैकेज 60 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच होता था. इसमें से किडनी देने वाले गरीब व्यक्ति को महज 8 से 10 लाख रुपये थमाए जाते थे. बाकी की मोटी रकम डॉक्टरों, दलालों और हॉस्पिटल मालिकों के बीच बंटती थी. इस गिरोह ने एक अफ्रीकी महिला का भी अवैध ट्रांसप्लांट किया था, जिसका इलाज करते हुए आठवीं पास शिवम का वीडियो वायरल हुआ है.

मौत का सौदा और प्रशासनिक लापरवाही

यह धंधा सिर्फ अवैध ही नहीं, बल्कि जानलेवा भी था. कानपुर में ट्रांसप्लांट के बाद स्थिति बिगड़ने पर एक महिला की दिल्ली के मैक्स अस्पताल में मौत हो गई. इसके अलावा बिहार के रहने वाले आयुष की किडनी निकालकर मेरठ की पारुल तोमर को लगाए जाने के मामले में भी भारी सौदेबाजी के पुख्ता सबूत मिले हैं. प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी लापरवाही सामने आई है. साल 2025 में कुछ इनपुट्स मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी. हालांकि, अब पुलिस ने आरोही अस्पताल को सील कर दिया है और फरार चल रहे डॉ. मुदस्सिर अली, डॉ. अफजल, दलाल नवीन पांडे और वैभव मुद्गल की तलाश तेज कर दी है. इन पर 25,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है.

नेटवर्क का विस्तार: नेपाल तक फैले तार

कानपुर पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस गैंग का नेटवर्क कानपुर, लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, नोएडा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि नेपाल तक फैला हुआ है. पुलिस अब गैंग चार्ट बनाकर एक-एक अपराधी की संपत्ति कुर्क करने और उन्हें सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी कर रही है.

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