
Prime Minister Mark Carney visit to India: कनाडा और भारत के बीच पिछले कुछ सालों से चली आ रही तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है. जून 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के रिश्ते अचानक बेहद खराब हो गए थे. उस समय कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में खड़े होकर दावा किया था कि इस हत्याकांड में भारतीय एजेंसियों की भूमिका हो सकती है. भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए “बेबुनियाद और बेतुका” बताया था. इसके बाद हालात इतने बिगड़े कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को बाहर निकाला, वीजा सेवाएं प्रभावित हुईं और व्यापार वार्ताएं भी ठप पड़ गईं. भारत लगातार कहता रहा कि कनाडा में खालिस्तानी तत्वों को खुली छूट मिल रही है, जिससे भरोसे का संकट गहराता गया. लेकिन अब 2026 में हालात बदलते दिख रहे हैं.
कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा का बड़ा संकेत
अब कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी 26 फरवरी से भारत दौरे पर आ रहे हैं. पहले मुंबई में उद्योग जगत के नेताओं से मुलाकात होगी और उसके बाद नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अहम बातचीत तय है. दिलचस्प बात यह है कि इस यात्रा से ठीक पहले कनाडा ने अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाया है. The Toronto Star की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ कनाडाई अधिकारी ने बैकग्राउंड ब्रीफिंग में कहा कि अब उन्हें भरोसा है कि पहले जिन गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए जा रहे थे, वे जारी नहीं हैं. अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच लगातार संवाद चल रहा है और हमें लगता है कि ऐसी गतिविधियां अब बंद हो चुकी हैं.” एक अन्य अधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हालात पहले जैसे होते, तो यह उच्चस्तरीय यात्रा संभव ही नहीं होती.
सुरक्षा सहयोग फिर शुरू, संवाद के रास्ते खुले
कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी स्पष्ट किया कि देश अपनी जमीन पर ट्रांसनेशनल अपराध और सुरक्षा मामलों पर कार्रवाई जारी रखेगा, लेकिन भारत के साथ सुरक्षा और कानून प्रवर्तन स्तर पर सहयोग फिर से शुरू किया जा रहा है. यानी टकराव की जगह अब बातचीत और सहयोग की नीति अपनाई जा रही है.
कार्नी का ‘प्रैग्मैटिक रीसेट’ क्यों अहम माना जा रहा?
कार्नी सरकार इस बदलाव को “प्रैग्मैटिक रीसेट” बता रही है. ट्रूडो के पद छोड़ने के बाद से ही रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश शुरू हो गई थी. 2025 में दोनों देशों ने फिर से हाई कमिश्नर नियुक्त किए और सुरक्षा संवाद बहाल हुआ. कनाडा अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने साझेदार मजबूत करना चाहता है. 2024 में भारत-कनाडा व्यापार 30.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था. अब CEPA समझौते के जरिए 2030 तक इसे 70 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. ऊर्जा, न्यूक्लियर, क्रिटिकल मिनरल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े समझौतों की संभावना जताई जा रही है.
कुछ विरोध की आवाजें भी
हालांकि कनाडा के सिख समुदाय के कुछ नेता इस नए रुख से खुश नहीं हैं. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ब्रिटिश कोलंबिया के धार्मिक नेता मोनिंदर सिंह ने Toronto Star से कहा कि निज्जर हत्या के बाद उन्हें कई बार सुरक्षा चेतावनियां मिलीं और वे इस नए कूटनीतिक बदलाव को “विश्वासघात” मानते हैं. वहीं कनाडा के ट्रेड मंत्री मनींदर सिद्धू का कहना है कि देश अपनी घरेलू सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक हित दोनों को साथ लेकर चल सकता है. कुल मिलाकर, भारत और कनाडा के बीच चली आ रही कड़वाहट धीरे-धीरे कम होती दिख रही है. कार्नी की भारत यात्रा को रिश्तों की नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बदलाव स्थायी दोस्ती में बदलता है या सिर्फ कूटनीतिक नरमी तक सीमित रहता है.


