गुटखा विज्ञापन पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, अमिताभ-शाहरुख सहित कई सितारे बने विपक्षी पक्षकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुटखा कंपनियों के प्रचार को लेकर जनहित याचिका पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले में कई क्रिकेटर और फिल्मी सितारों को विपक्षी पक्षकार बनाया गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुटखा कंपनियों का प्रचार करने के मामले में अपने पूर्व के आदेश के अनुपालन में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को जवाब देने को कहा है। इसमें कई क्रिकेटर और फिल्मी अभिनेताओं को विपक्षी पक्षकार भी बनाया गया है। वहीं, इस मामले की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।

न्यायालय ने 25 नवंबर 2025 को हुई सुनवाई के दौरान पूछा था कि 2023 में याची द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर अब तक जांच लंबित क्यों है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका में सम्बंधित गुटखा कंपनियों के साथ-साथ क्रिकेटर कपिल देव, सुनील गावस्कर, वीरेंद्र सहवाग, क्रिस गेल तथा अभिनेताओं अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन, सलमान खान, रितिक रोशन, टाइगर श्रॉफ, सैफ अली खान व रणवीर सिंह को भी विपक्षी पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि उक्त हस्तियां जो पान मसाला कंपनियों का प्रचार कर रही हैं, उनमें से अधिकांश पद्म पुरस्कार धारक हैं और उनके द्वारा किए जाने वाले ऐसे विज्ञापनों से समाज में गलत संदेश जाता है, साथ ऐसे विज्ञापन उपभोक्ता कानूनों का उल्लंघन भी हैं।

तंबाकू और सिगरेट के 1 फरवरी से बढ़ गए दाम

उधर, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क तथा पान मसाला पर स्वास्थ्य उपकर एक फरवरी से लागू हो गया। यह वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की उच्चतम 40 प्रतिशत की दर के ऊपर लगाया गया। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। ये उपकर और उत्पाद शुल्क इन हानिकारक वस्तुओं पर एक जुलाई 2017 से लागू 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर का स्थान लेंगे।

इसके अलावा, एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों (चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा युक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा) के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) आधारित मूल्यांकन की नई व्यवस्था शुरू हो गई। इसके तहत जीएसटी का निर्धारण पैकेट पर घोषित खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर किया जाएगा।

पान मसाला निर्माताओं को एक फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना होगा। ऐसे उत्पादों के निर्माताओं को सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाली एक कार्यशील सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और इसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा।उन्हें उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता की जानकारी भी देनी होगी। यदि कोई मशीन लगातार कम से कम 15 दिनों तक बंद रहती है, तो वे उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकते हैं।

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