पहचान बदली, धर्म बदला, ठिकाने भी बदले: 11 साल से बना हुआ था MP पुलिस के लिए पहेली, ऐसे पकड़ा गया शातिर भगोड़ा!

पहचान बदली, धर्म बदला, ठिकाने भी बदले: 11 साल से बना हुआ था MP पुलिस के लिए पहेली, ऐसे पकड़ा गया शातिर भगोड़ा

कानून के हाथ लंबे होते हैं… यह कहावत मध्य प्रदेश के बालाघाट में एक बार फिर सच साबित हुई है. बालाघाट पुलिस ने एक ऐसे अपराधी को गिरफ्तार किया है जो पिछले 11 सालों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर अपनी पहचान बदलकर एक नई जिंदगी जी रहा था. हत्या के प्रयास और लूट जैसे संगीन जुर्मों का आरोपी अनिल डहारे, बिहार का मो. सद्दाम हुसैन बनकर अपनी गृहस्थी बसा चुका था, लेकिन उसका अतीत आखिरकार उसे खींचकर वापस सलाखों के पीछे ले आया.

जानकारी अनुसार, साल 2011 में डोगरगांव निवासी अनिल डहारे ने अपराध की दुनिया में कदम रखा. नकली बंदूक दिखाकर लूट, हत्या का प्रयास और एससी/एसटी एक्ट जैसे गंभीर मामलों में संलिप्त अनिल को 7 साल की सजा भी हुई थी. लेकिन 2015 में हाईकोर्ट से जमानत मिलते ही वह ऐसा ओझल हुआ कि पुलिस के लिए एक पहेली बन गया. गिरफ्तारी से बचने के लिए अनिल ने किसी मंझे हुए खिलाड़ी की तरह अपनी पहचान छुपाई. इन 11 वर्षों में उसने छत्तीसगढ़, केरल, बिहार और दिल्ली जैसे राज्यों को अपना ठिकाना बनाया. वह कभी केरल में मनीष बनकर मजदूरी करता, तो कभी छत्तीसगढ़ का निवासी बताकर लोगों को गुमराह करता.

जब अनिल बना सद्दाम हुसैन

इस अपराधी की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब वह बिहार के मधुबनी पहुंचा. यहां उसने खुद को मो. सद्दाम हुसैन के रूप में पेश किया. इसी दौरान उसकी मुलाकात एक मुस्लिम युवती से हुई. सद्दाम बने अनिल को युवती से बेहद प्यार हो गया. युवती को इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि जिसे वह अपना हमसफर मान रही है, उसका अतीत अपराधों से भरा है. यह प्यार इस कदर परवान चढ़ा कि दोनों ने मुस्लिम रीति-रिवाज के साथ निकाह कर लिया. जिस अपराधी को पुलिस 11 साल से जंगलों और शहरों में तलाश रही थी, वह सरहदें पार कर एक नई पहचान के साथ पिता और पति की जिम्मेदारी निभा रहा था.

दिल्ली में बसाया आशियाना

निकाह के बाद बिहार से अनिल (सद्दाम) अपनी पत्नी के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गया. यहां वह एक आम नागरिक की तरह ठेकेदारी करते हुए रहने लगा. आज उसके तीन मासूम बच्चे हैं, जिन्हें शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उनके पिता का अतीत कितना काला है. वह अपनी पहचान को इतनी गहराई से दफन कर चुका था कि किसी को शक तक नहीं हुआ.

खाकी की जिद: 5 राज्यों में पीछा

बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के निर्देशन में पांच विशेष टीमों ने अनिल की तलाश में जमीन-आसमान एक कर दिया. पुलिस टीम केरल के कोझीकोड से लेकर बिहार के मधुबनी और फिर दिल्ली के हरियाणा बॉर्डर तक पहुंची. तकनीकी विश्लेषण और कड़ी मशक्कत के बाद जब पुलिस दिल्ली में डीडीए (DDA) के एक ठेकेदार के पास पहुंची, तो वहां भी उसने खुद को सद्दाम ही बताया. लेकिन कानून के हाथ लंबे थे. परिजनों और लूट के शिकार फरियादी ने उसे पहचान लिया.

10 हजार का ईनामी था अनिल

लांजी एसडीओपी ओमप्रकाश (IPC) ने मामले का खुलासा करते हुए कहा कि अनिल ने अपने भाई-भाभी, माता-पिता को भी 11 साल से ना तो कॉल किया और ना कभी मिला, जिसे तलाशने में पुलिस ने पांच टीम बनाई और अलग-अलग पांच राज्यों में तलाशते रहीं. केरल में दूसरा अनिल नाम का व्यक्ति मिला जिसने इसके बारे में बताया. फिर बिहार में उसके ससुराल वालों ने बताया कि वह दिल्ली में है. फिर दिल्ली से उसे गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने फरार वारंटी आरोपी अनिल पर 10 हजार का ईनाम भी घोषित किया था, उसे माननीय न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है.

एक परिवार का क्या होगा?

11 साल का लंबा वनवास खत्म हुआ, अनिल अब सलाखों के पीछे है. लेकिन इस कहानी का सबसे मार्मिक पहलू वह बेगुनाह पत्नी और तीन बच्चे हैं, जिनकी दुनिया पल भर में उजड़ गई. ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। जिस सद्दाम के साथ उन्होंने जीवन के सपने बुने थे, वह एक अपराधी अनिल निकला. पुलिस की इस सफलता ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे भेस बदल ले या धर्म, न्याय की चौखट से वह ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकता.

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