
ऑपरेशन सिंदूर के बाद निलंबित की गई सिंधु जल संधि पर भारत अब एक कदम और आगे बढ़ने वाला है। जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से झेलम नदी के ऊपर वुलर बैराज परियोजना का काम शुरू किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जल्दी ही इस पर केंद्र की सहायता के काम शुरू होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में एक नई गिरावट देखने को मिली थी। मानवता के नाम पर भारत जिस सिंधु जल संधि को मानता आया था, ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने उसे रद्द कर दिया। पाकिस्तान की तरफ से इसको लेकर काफी बातें कि गई लेकिन केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कह दिया कि संधि शांति काल के लिए थी, अगर पाकिस्तान शांति स्थापित नहीं करना चाहता है, तो यह संधि भी नहीं रहेगी। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अब इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार चार दशक से बंद पड़ी वुलर बैराज परियोजना को एक बार फिर से शुरू करने जा रही है। इसका उद्देश्य झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह को नियंत्रित करना है।
भारत सरकार और जम्मू-कश्मीर सरकार ने सिंधु जल संधि को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब जबकि यह संधि निलंबित हो गई है, तो स्थानीय उमर अब्दुल्ला सरकार इसे फिर से शुरू करने जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र और प्रदेश की सरकार जल्दी ही मिलकर इस पर काम शुरू करेंगी।
वर्तमान में क्या है वुलर झील की स्थिति?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिंधु जल संधि के निलंबित होने के फैसले के बाद वुलर बैराज झील एक बार फिर से सभी के ध्यान में आ गई है। मुख्यमत्री उमर अब्दुल्ला ने इसको लेकर विधानसभा में कहा था कि उनकी सरकार केंद्र से साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है इनमें अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल परियोजना (वुलर बैराज) पर बात जारी है। गौरतलब है कि इस परियोजना के लिए पहले एशियाई बैंक से फंडिंग ली गई थी, लेकिन सिंधु संधि के कारण यह बंद हो गई थी।
वर्तमान स्थिति की बात करें, तो झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार इस झील का आकार बदलता रहता है। इसका न्यूनतम आकार 20 वर्ग किलोमीटर है, जबकि अधिकतम करीब 190 वर्ग किलोमीटर है।
स्थानीय लोगों को भी इस वैराज के बनाए जाने से अपने रोजगार के बढ़ने की उम्मीद है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय लोगों ने बताया कि सर्दियों में झेलन नदी के जल का प्रवाह कम हो जाता है, जिसकी वजह से वुलर के ज्यादातर हिस्से सूख जाते हैं, अब जबकि सरकार इस परियोजना पर काम कर रही है, तो इससे हमारी आजीविका में भी सुधार होगा। गौरतलब है कि बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक सैकड़ों लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए इस झील में नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन झील के सिकुड़ने की वजह से उनकी पारंपरिक आजीविका खत्म होती जा रही है।
पाकिस्तान ने दी प्रतिक्रिया
भारत की तरफ से सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान की तरफ से लगातार बयान जारी किए जा रहे थे। पाकिस्तान की तरफ से चेतावनी भी दी गई थी कि अगर पानी रोका गया तो इसे युद्ध का कदम माना जाएगा, हालांकि भारत ने अपना फैसला कायम रखा। केंद्र व राज्य सरकार मिलकर जल्दी ही इस पर काम शुरू करने जा रही है।





