पश्चिम एशिया इस समय आग के दरिया में बदल चुका है और हालात हर गुजरते पल के साथ और भी भयावह होते जा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में इजराइल ने दावा किया है कि उसने ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी और बसिज बल के प्रमुख गोलाम रजा सुलेमानी को मार गिराया है। यदि यह दावा सच साबित होता है तो यह ईरान की सत्ता संरचना पर एक और जबरदस्त प्रहार होगा, क्योंकि इससे पहले फरवरी के अंत में हुए हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य अधिकारी मारे जा चुके हैं।
हम आपको बता दें कि अली लारिजानी केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि ईरान की रणनीतिक सोच का अहम चेहरा माने जाते थे। वह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव थे और खामेनेई के बेहद करीबी सलाहकार भी रहे। उनकी मौजूदगी ईरान के राजनीतिक और सैन्य संतुलन के लिए बेहद जरूरी मानी जाती थी। ईरान ने अब तक उनकी मौत की पुष्टि नहीं की है। इस बीच उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर एक हस्तलिखित संदेश पोस्ट किया गया, जिसमें नौसेना के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन यह संदेश इजराइल के दावे को झुठलाने में नाकाम रहा।
दूसरी ओर, गोलाम रजा सुलेमानी की मौत का दावा भी बेहद अहम है। बसिज बल को ईरान के अंदरूनी विरोध को कुचलने वाली ताकत माना जाता है। इस बल पर आरोप है कि उसने प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई की और व्यापक गिरफ्तारियां कीं। ऐसे में सुलेमानी का खत्म होना ईरान की आंतरिक पकड़ को कमजोर कर सकता है। इजराइल ने इसे ईरान की कमान और नियंत्रण व्यवस्था पर बड़ा प्रहार बताया है।
हम आपको यह भी बता दें कि इजराइल के हमले केवल नेताओं तक सीमित नहीं हैं। उसने तेहरान, शिराज और तबरीज जैसे शहरों में एक साथ हमले कर ईरान के सुरक्षा ठिकानों, मिसाइल भंडार और ड्रोन अड्डों को निशाना बनाया। यह स्पष्ट संकेत है कि यह युद्ध अब पूरी तरह खुला और आक्रामक हो चुका है। जवाब में ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने लगातार मिसाइल हमले किए, जिनके चलते इजराइल के कई हिस्सों में सायरन बज उठे और धमाकों की आवाजें सुनाई दीं।
इस संघर्ष का असर खाड़ी देशों को भी बड़ा नुकसान पहुँचा रहा है। अबू धाबी में मिसाइल अवरोध के मलबे से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कुवैत में दो लोग घायल हुए। दोहा और दुबई में भी धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह साफ संकेत है कि यह युद्ध अब क्षेत्रीय दायरे से निकलकर व्यापक खतरे में बदल रहा है।
इसी बीच अल्बानिया ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है और ईरान को आतंकवाद समर्थक देश बताया है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के खिलाफ बढ़ते दबाव को दर्शाता है। पहले ही कई पश्चिमी देश इस बल को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं।
उधर, चीन ने इस संकट के बीच मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। उसने ईरान, लेबनान, जॉर्डन और इराक को राहत पहुंचाने की बात कही है, जहां लाखों लोग इस युद्ध की मार झेल रहे हैं। चीन ने तत्काल युद्धविराम की मांग भी दोहराई है, लेकिन जमीनी हालात इससे बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरान ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यह युद्ध उसी ने शुरू नहीं किया, लेकिन इसे खत्म करने की ताकत उसी के पास है। ईरानी सेना ने अमेरिका को भी सीधे संदेश दिया है कि अगर जमीनी हमला हुआ तो उसका अंजाम वियतनाम जैसा होगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान किसी भी स्तर पर संघर्ष के लिए तैयार है।
सबसे खतरनाक पहलू यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम क्षेत्र को भी इस युद्ध से जोड़ा जा रहा है। यदि यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे पूरी दुनिया आर्थिक संकट में फंस सकती है।
कुल मिलाकर यह सिर्फ एक क्षेत्रीय टकराव नहीं रह गया है, बल्कि यह खुला ऐलान है कि अब दुनिया एक खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। हर मिसाइल, हर धमाका और हर मौत इस आग को और भड़का रही है। ताकतवर देश अपने-अपने मोर्चे पर उतर चुके हैं और बयानबाजी अब सीधे जंग में बदल चुकी है। अगर यही रफ्तार जारी रही तो यह टकराव सीमाओं को तोड़कर वैश्विक तबाही में बदल सकता है। सवाल अब यह नहीं है कि जंग रुकेगी या नहीं, सवाल यह है कि यह कब और कितना बड़ा विस्फोट करेगी। ये खबर आप गज़ब वायरल में पढ़ रहे हैं। अब दुनिया देख नहीं रही, बल्कि धीरे-धीरे इस भयंकर आग की चपेट में आती जा रही है।




