अभी अभीः सोने, चांदी, प्लैटिनम पर भारत सरकार ने लगाई पाबंदी, जानें इस बड़े फैसले का मतलब!


नई दिल्‍ली: सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। इसके तहत उसने तत्काल प्रभाव से सोने, चांदी और प्लैटिनम से बनी सभी तरह की चीजों के आयात पर सख्‍त पाबंदियां लगा दी हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय ( डीजीएफटी ) ने इन नई बंदिशों को जारी किया है। इनका मकसद उन मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के दुरुपयोग को रोकना है, जिनका फायदा उठाकर कुछ आयातक चोरी-छिपे कीमती धातुएं देश में ला रहे थे।

इस अधिसूचना में साफ किया गया है कि आयात पर लगी ये पाबंदियां सभी मामलों पर लागू होंगी। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पहले से कोई कॉन्‍ट्रैक्‍ट हुआ था या कोई ऐसा ‘लेटर ऑफ क्रेडिट’ जारी हुआ था जिसे रद्द नहीं किया जा सकता। या फिर कोई एडवांस पेमेंट किया गया था या माल पहले ही भेजा जा चुका था। ये नए नियम इन सभी पर भारी पड़ेंगे।

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि जो माल अभी रास्ते में है, उसके लिए किसी भी तरह की छूट या विशेष व्यवस्था नहीं की जाएगी। डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, आईटीसी (एचएस) कोड के ‘चैप्‍टर 71’ के तहत आने वाली सभी चीजों के लिए इंपोर्ट पॉलिसी और शर्तें तत्काल प्रभाव से बदल दी गई हैं।

किन-किन चीजों पर पड़ेगा असर?
इस चैप्‍टर में कई अलग-अलग तरह के उत्पादों का जिक्र किया गया है। इनमें बिना तराशे हुए मोती, तराशे हुए मोती, रत्न (कीमती और अर्ध-कीमती दोनों), कीमती और गैर-कीमती धातुएं, इन धातुओं से बनी चीजें, कीमती धातुओं की परत चढ़ी चीजें, नकली आभूषण और करेंसी शामिल हैं।

क्‍यों बेहद अहम है यह कदम?
देश में कीमती धातुओं की एंट्री को कंट्रोल करने के लिए सरकार की ओर से अब तक उठाया गया यह सबसे अहम कदम है।
भारत में सोने की खपत दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे ज्‍यादा है।
लिहाजा, आयात पर लगी पाबंदियों में किसी भी बदलाव का सीधा असर आभूषण उद्योग पर पड़ेगा।
साथ ही सराफा बाजार और आभूषणों की खुदरा कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।

सरकार ने यह कदम अभी क्यों उठाया?
कुछ व्यापारी एफटीए पार्टनर देशों के रास्ते सोने और चांदी को देश में ला रहे थे।
वे इन देशों से आने वाली धातुओं में बहुत मामूली बदलाव करते थे।
फिर शुल्क में मिलने वाली छूट (ड्यूटी बेनिफिट्स) का दावा करते थे।
इससे देश के घरेलू उद्योग को भारी नुकसान पहुंच रहा था। सरकार के राजस्व पर भी बुरा असर पड़ रहा था। इन कमियों को दूर करके केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश में केवल वैध व्यापार ही हो। कीमती धातुओं के आयात को बेहतर ढंग से कंट्रोल किया जा सके।

कैसे पड़ सकता है इसका असर?
ज्‍वेलरी सेक्‍टर में देश भर में लाखों कारीगरों को रोजगार मिला हुआ है।
इस फैसले का असर सेक्‍टर पर पड़ने की पूरी संभावना है।
कई छोटे और मंझोले आभूषण निर्माता, आभूषण बनाने के लिए आयातित सोने और चांदी पर ही निर्भर रहते हैं।
उम्मीद है कि उद्योग जगत के प्रतिनिधि जल्द ही सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे ताकि वे इस फैसले के सही मायने समझ सकें।
अगर किसी तरह की कोई शंका हो तो उसका स्पष्टीकरण मांग सकें।

अर्थव्‍यवस्‍था से जुड़ा है मुद्दा
भारत में सोने का आयात हमेशा से ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। इसका देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) पर सीधा असर पड़ता है। जब भी सोने की ग्‍लोबल कीमतें बढ़ती हैं या आयात के नियम सख्त होते हैं तो इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है।

इस फैसले से सरकार ने दिया है मैसेज
भारत में सोना सिर्फ एक निवेश या गहनों की चीज नहीं है। इसका गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व है। खासकर शादियों और त्योहारों के दौरान। इस नोटिफिकेशन के जरिए सरकार ने एक कड़ा संदेश दिया है कि वह व्यापार नियमों की किसी भी तरह की अनदेखी या उल्लंघन की इजाजत नहीं देगी। व्यापारियों और आयातकों को सलाह दी गई है कि वे कस्टम्स पर किसी भी तरह के नुकसान या देरी से बचने के लिए अपने पेंडिंग ऑर्डर और शिपमेंट की तुरंत समीक्षा करें।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ग्‍लोबल बाजार पहले से ही अस्थिर हैं। आने वाले दिनों में इस पाबंदी का घरेलू बाजार में सोने की कीमतों और गहनों की उपलब्धता पर आखिरकार क्या असर पड़ेगा, इस पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।

डीजीएफटी ने कहा है कि संशोधित नीति को तत्काल प्रभाव से सख्ती से लागू किया जाएगा। इन चीजों का व्यापार करने वाले आयातकों और व्यवसायों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन से अपडेट रहें और किसी भी तरह की कानूनी या नियामक समस्या से बचने के लिए नए दिशानिर्देशों का पालन करें।

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